Bharatpur : RGHS को इंश्योरेंस कंपनी को सौंपने का विरोध, कर्मचारी महासंघ ने चेताया- योजना से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं

Bharatpur : RGHS को इंश्योरेंस कंपनी को सौंपने का विरोध, कर्मचारी महासंघ ने चेताया- योजना से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं

RGHS Scheme : अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के जिलाध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि आरजीएचएस योजना पर वित्तीय भार का हवाला देते हुए इस योजना को इंश्योरेंस मोड पर देने का पुरजोर विरोध किया जाएगा। अधिकारियों को स्पष्ट रूप से चेताया कि आरजीएचएस योजना में भ्रष्टाचार कर रहे चंद अस्पतालों और फार्मेसी वालों तथा कर्मचारियों की वजह से आम निर्दोष कर्मचारी व पेंशनरों के चिकित्सा संबंधी अधिकारों पर कुठाराघात नहीं होने देंगे एवं योजना के मूल स्वरूप में कोई भी छेड़छाड़ बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

महासंघ के महामंत्री बृजमोहन शर्मा ने कहा कि यदि राज्य सरकार आरजीएचएस योजना को इंश्योरेंस कंपनी को सौंपने का प्रयास करती है तो प्रदेश के 8.5 लाख कर्मचारी व 4 लाख पेंशनर सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के पुतला का कल होगा दहन

महासंघ के मीडिया प्रभारी प्रेम मंगल ने कहा कि 12 मई को दोपहर 2 बजे भरतपुर कलक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर कर्मचारियों द्वारा राज्य के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के पुतला का दहन किया जाएगा। साथ ही 15 से 25 मई तक चिकित्सा मंत्री के राजकीय दौरों का बहिष्कार कर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

वर्ष 2025-26 में ₹4300 करोड़ के वार्षिक खर्च पर पहुंची

जिलाध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2021-22 में 600 करोड़ रुपए से प्रारंभ हुई योजना वर्ष 2025-26 में 4300 करोड़ रुपए के वार्षिक खर्च पर पहुंच गई है। योजना के खर्चे में बेतहाशा वृद्धि का मुख्य कारण मॉनिटरिंग का अभाव है।

इसकी मॉनिटरिंग लगभग असंभव

उन्होंने बताया कि प्रतिदिन लगभग 50000 कर्मचारी इलाज के लिए जाते हैं एवं उनकी की टीआईडी जेनरेट होती है, सिर्फ 34 कर्मचारियों की ओर से लगभग 10000 मेडिकल इंस्टीट्यूट, हॉस्पिटल एवं मेडिकल स्टोर्स की ओर से की जा रही चिकित्सा की मॉनिटरिंग करना लगभग असंभव है, इसी वजह से दबाव में आकर बिना सही-गलत का वेरिफिकेशन किए सैकड़ों करोड़ के बिलों का भुगतान किया जाता है।

आरजीएचएस में नया इंश्योरेंस मॉडल

राजस्थान सरकार ने राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) को इंश्योरेंस मॉडल में चलाने की तैयारी अंतिम चरण में है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को इसके लिए मुख्यमंत्री की हरी झंडी मिल चुकी है। सरकार का लक्ष्य है कि नया मॉडल लागू शीघ्र लागू किया जाए। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह बदलाव राज्य की दूसरी बड़ी योजना ‘मां योजना’ के सफल मॉडल से प्रेरित है, जहां बीमा कंपनी के जरिए क्लेम और भुगतान प्रक्रिया अपेक्षाकृत सुचारू रूप से संचालित हो रही है।

उधर दूसरी तरफ योजना को इंश्योरेंस मॉडल में बदलने के संभावित ड्राफ्ट से पहले ही प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स एसोसिएशन ने कई अहम सुझाव देते हुए अपनी चिंताएं सामने रखी हैं। इंश्योरेंस मॉडल को लेकर अस्पतालों का कहना है कि यदि इसे लागू किया जाता है तो यह पूरी तरह पुनर्भरण आधारित होना चाहिए, ताकि अनावश्यक जटिलताओं से बचा जा सके।

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