घर बनाना महंगा… बेमौसम बारिश से बिहार में 150 करोड़ कच्ची ईंटें घुलीं, ₹1 रुपए तक महंगी मिलेगी 1 ईंट

घर बनाना महंगा… बेमौसम बारिश से बिहार में 150 करोड़ कच्ची ईंटें घुलीं, ₹1 रुपए तक महंगी मिलेगी 1 ईंट

90% भट्ठों में उत्पादन ठप, अब 30 दिन तक नहीं बनेगी नई ईंट
बिहार में अप्रैल के आखिरी और मई के पहले हफ्ते की बारिश ने ईंट उद्योग की कमर तोड़ दी है। प्रदेश में महज 10 दिनों के भीतर करीब 150 करोड़ कच्ची ईंटें बारिश में भीगकर मिट्टी में मिल गईं। इस तबाही के कारण राज्य के 90 प्रतिशत ईंट भट्ठों में उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। अगले 30 दिनों तक नई ईंटें तैयार नहीं हो सकेंगी। आपूर्ति घटने से बाजार में ईंटों की कीमत 25 पैसे से लेकर 1 रुपए तक बढ़ गई है। पटना जैसे शहरों में प्रति 1500 ईंट पर सीधे 1000 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर उत्पादन जल्द शुरू नहीं हुआ, तो निर्माण क्षेत्र की लागत और बढ़ सकती है। पटना, भागलपुर, बेगूसराय और आरा सहित सभी जिलों के भट्ठा मालिकों को भारी चपत लगी है। बिहार ईंट निर्माता संघ के जनरल सेक्रेटरी संजीव कुमार के अनुसार, बारिश से कच्ची ईंटें पानी में घुलकर नष्ट हो गई हैं। मालिकों को भारी नुकसान हुआ है, इसी वजह से राज्य भर में ईंटों की कीमत बढ़ाई गई है। संघ के बेगूसराय इकाई के अध्यक्ष मुरारी कुमार ने कहा कि जिले में अलग-अलग बढ़ोत्तरी हुई है। कीमत अचानक क्यों बढ़ी? बारिश से 150 करोड़ कच्ची ईंटें बर्बाद हो गईं। कच्चा माल भीगने से उत्पादन बंद है। बाजार में ईंटों की कमी (सप्लाई चेन टूटने) की वजह से भट्ठा मालिकों ने दाम बढ़ा दिए हैं। आम लोगों और सरकारी प्रोजेक्ट पर क्या असर होगा?… घर बनाने का बजट बढ़ जाएगा। लागत बढ़ने से लोग निर्माण कार्य रोक सकते हैं। वहीं सड़क, स्कूल और आवास जैसी सरकारी योजनाओं का बजट प्रभावित होगा और काम में देरी होगी। 90% भट्ठों में उत्पादन ठप, अब 30 दिन तक नहीं बनेगी नई ईंट
बिहार में अप्रैल के आखिरी और मई के पहले हफ्ते की बारिश ने ईंट उद्योग की कमर तोड़ दी है। प्रदेश में महज 10 दिनों के भीतर करीब 150 करोड़ कच्ची ईंटें बारिश में भीगकर मिट्टी में मिल गईं। इस तबाही के कारण राज्य के 90 प्रतिशत ईंट भट्ठों में उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। अगले 30 दिनों तक नई ईंटें तैयार नहीं हो सकेंगी। आपूर्ति घटने से बाजार में ईंटों की कीमत 25 पैसे से लेकर 1 रुपए तक बढ़ गई है। पटना जैसे शहरों में प्रति 1500 ईंट पर सीधे 1000 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर उत्पादन जल्द शुरू नहीं हुआ, तो निर्माण क्षेत्र की लागत और बढ़ सकती है। पटना, भागलपुर, बेगूसराय और आरा सहित सभी जिलों के भट्ठा मालिकों को भारी चपत लगी है। बिहार ईंट निर्माता संघ के जनरल सेक्रेटरी संजीव कुमार के अनुसार, बारिश से कच्ची ईंटें पानी में घुलकर नष्ट हो गई हैं। मालिकों को भारी नुकसान हुआ है, इसी वजह से राज्य भर में ईंटों की कीमत बढ़ाई गई है। संघ के बेगूसराय इकाई के अध्यक्ष मुरारी कुमार ने कहा कि जिले में अलग-अलग बढ़ोत्तरी हुई है। कीमत अचानक क्यों बढ़ी? बारिश से 150 करोड़ कच्ची ईंटें बर्बाद हो गईं। कच्चा माल भीगने से उत्पादन बंद है। बाजार में ईंटों की कमी (सप्लाई चेन टूटने) की वजह से भट्ठा मालिकों ने दाम बढ़ा दिए हैं। आम लोगों और सरकारी प्रोजेक्ट पर क्या असर होगा?… घर बनाने का बजट बढ़ जाएगा। लागत बढ़ने से लोग निर्माण कार्य रोक सकते हैं। वहीं सड़क, स्कूल और आवास जैसी सरकारी योजनाओं का बजट प्रभावित होगा और काम में देरी होगी।  

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