भोजशाला विवाद में नया ट्विस्ट, वाग्देवी की मूर्ति को बताया जैन यक्षिणी अंबिका, मांगा पूजा का अधिकार

भोजशाला विवाद में नया ट्विस्ट, वाग्देवी की मूर्ति को बताया जैन यक्षिणी अंबिका, मांगा पूजा का अधिकार

Bhojshala controversy: भोजशाला मामले में इंदौर हाई कोर्ट में बुधवार को भी सुनवाई जारी रही। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की कोर्ट में दिल्ली के सलकचंद जैन की ओर से भोजशाला को जैन गुरुकुल बताते हुए दायर की गई याचिका पर तर्क रखे गए। जैन की ओर से पेश वकील दिनेश पी राजभर ने कहा कि भोजशाला में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को कई पशुओं के चिह्न मिले हैं। जैन समाज में 24 तीर्थंकर हैं, जिनकी पूजा होती है। प्रत्येक तीर्थंकर के लिए एक पशु चिह्न है। जैसे आदिनाथ भगवान के लिए बैल और महावीर भगवान के लिए शेर है। भोजशाला के सर्वे में पशुओं के चिह्न मिले हैं। ये चिह्न जैन समाज के तीर्थंकरों के लिए पहचाने जाने वाले पशुओं के हैं, जो बताते हैं कि भोजशाला जैन गुरुकुल था।

दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए अभिभाषक राजभर ने कहा कि जैन समाज भोजशाला पर दावा नहीं करता, लेकिन चाहता है कि उसे भी पूजा का अधिकार मिले। एएसआइ ने 7 अप्रैल 2003 को आदेश जारी कर मंगलवार को हिंदुओं को पूजा और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दे दी, लेकिन जैन धर्मावलंबियों के लिए कुछ नहीं कहा। भोजशाला जैन गुरुकुल है। राजा भोज ने ही इसका निर्माण कराया था। उस समय बड़ी संख्या में जैन शोधार्थी यहां अध्ययन करते थे। (mp news)

रिपोर्ट को बताया एकतरफा

वकील राजभर ने एएसआइ की सर्वे रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि एएसआइ केवल एक धर्म विशेष का समर्थन कर रहा है। उन्होंने एएसआइ के इस इमारत और पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के दावे को भी गलत साबित करने की कोशिश की। एएसआइ सर्वे में जो मूर्तियां मिलीं, उन्हें जैन समाज के देवी-देवताओं की मूर्तियों के रूप में संरक्षित किया जाए। साथ ही लंदन के संग्रहालय में रखी जिस मूर्ति को वाग्देवी की बताया जा रहा है, उसे जैन धर्म से जुड़ी अंबिका की मूर्ति बताते हुए उन्होंने कहा कि ये मूर्ति जैन यक्षिणी अंबिका की है। इसे लंदन से लाया जाए। सर्वे में मिले साक्ष्य बताते हैं कि भोजशाला में जो कॉलम हैं, वे माउंटआबू जैन मंदिर की तरह बने हैं।

कोर्ट ने मांगों पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राजभर से उनकी मांगों को लेकर सवाल पूछा कि वे यह स्पष्ट करें कि वे भोजशाला को जैन मंदिर सिद्ध करना चाहते हैं या जैन गुरुकुल? इस पर राजभर ने कहा कि वे इंदौर आकर व्यक्तिगत रूप से अपनी बात कोर्ट के समक्ष रखना चाहते हैं। कोर्ट ने उन्हें गुरुवार को उपस्थित होने को कहा। कोर्ट ने उनसे कहा कि वे याचिका में चाही गई राहत पढ़कर बताएं। इस पर राजभर ने कहा कि याचिका में मांग की गई है कि जैन समाज को भोजशाला में पूजा का अधिकार मिले, भोजशाला को लेकर एक ट्रस्ट का गठन किया जाए। इसमें जैन समाज को प्रतिनिधित्व मिले, लंदन संग्रहालय से अंबिका और सरस्वतीदेवी की मूर्तियों को वापस लाया जाए और भोजशाला परिसर में जैन गुरुकुल बनाया जाए।

महाधिवक्ता ने रखा शासन का पक्ष

बुधवार को ही राज्य के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने राज्य सरकार का पक्ष भी कोर्ट के समक्ष रखा। उन्होंने यहां आए दिन विवाद की स्थिति को रखते हुए कहा कि जब भी वसंत पंचमी शुक्रवार को आती है, धार में विवाद की स्थिति बन जाती है। एएसआइ सर्वे में यह बात सिद्ध हुई है कि भोजशाला मंदिर ही है। महाधिवक्ता ने भोजशाला मामले का सार प्रस्तुत करते हुए बताया कि कब-क्या अधिसूचना जारी हुई थी। उन्होंने कहा कि सर्वे में यह बात भी सामने आई कि मस्जिद को पहले से बनी संरचना पर बनाया गया है। मेहराब नए बनाए गए थे, जो बताते हैं कि मंदिर तोड़ कर ही मस्जिद का निर्माण किया गया। (mp news)

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