Yuan vs Dollar: दुनिया में डिजिटल पेमेंट का दौर बढ़ता जा रहा है। इस दौड़ में चीन ने एक ऐसा कदम उठाया है जिससे इंटरनेशनल लेवल पर बना हुआ डॉलर का दबदबा अब कमजोर हो सकता है। अभी तक दुनिया मे लेनदेन का जरिया अमेरिकी डॉलर था। लेकिन चीन ने इंडोनेशिया के साथ मिलकर एक नई क्रॉस-बॉर्डर QR पेमेंट सिस्टम लॉन्च की है। इस सिस्टम के जरिए दोनों देशों के नागरिक एक दूसरे के देशों में अपने ऐप के जरिए खरीदारी कर सकते हैं।
क्या है क्रॉस-बॉर्डर QR पेमेंट सिस्टम?
यह ऐसी डिजिटल टेक्नोलॉजी है जिसके जरिए लोग जब दूसरे देश में हो तो वहां अपने देश में चलने वाले बैंकिंग ऐप के जरिए QR कोड स्कैन करके पेमेंट कर सकते है। इससे अलग-अलग देशों का पेमेंट सिस्टम लिंक होता है और करेंसी एक्सचेंज की जरूरत नहीं होती। इसी कड़ी में चीन का Alipay और इंडोनेशिया का QRIS शामिल हैं। यह कदम डॉलर पर निर्भरता कम करने और युआन को वैश्विक मंच पर आगे बढ़ाने की बीजिंग की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।
कैसे कम होगा डॉलर का दबदबा?
इस सिस्टम की बदौलत चीन एशियाई देशों में अपनी करेंसी की धाक जमाने की कोशिश में है। इंडोनेशिया से पहले चीन थाईलैंड, वियतनाम, मलेशिया और सिंगापुर में भी यही काम कर चुका है। दक्षिण-पूर्व एशिया (ASEAN) देशों के साथ इस तरह से मजबूत आर्थिक रिश्ते बनाकर चीन डॉलर को चुनौती दे रहा है।
फ्रेंच इन्वेस्टमेंट बैंक Natixis की एशिया-पैसिफिक चीफ इकोनॉमिस्ट Alicia Garcia-Herrero के मुताबिक इस तरह के कदम उठाना यह बताता है कि बीजिंग ग्लोबल मार्केट में डॉलर के चलन को कम करके चीन के युआन का चलन बढ़ाना चाहता है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चीन अपने Cross-border Interbank Payment System (CIPS) को भी मजबूत कर रहा है। यह पश्चिमी देशों के SWIFT सिस्टम का विकल्प माना जा रहा है।
भारत इस दौड़ में कहां?
भारत और चीन एशिया के दो बड़े देश है जिनके बीच हर मामले में कॉम्टीशन रहता है। इसी कड़ी अब यह भी जुड़ गया है। एक ओर चीन अपने करेंसी को बढ़ाने के लिए एशियाई देशों में क्रॉस-बॉर्डर QR पेमेंट सिस्टम को बढ़ावा दे रहा है। वहीं, दूसरी ओर भारत भी अपने UPI को विश्व स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल UPI भूटान, नेपाल, सिंगापुर, UAE, फ्रांस, श्रीलंका, मॉरीशस और कतर में लाइव हो चुका है। सिंगापुर का PayNow सीधे UPI से जुड़ा है।


