मणिपुर में मैतेई-कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़के तीन साल हो चुके हैं, लेकिन 37 लाख की आबादी वाले इस छोटे से राज्य में आज भी दोनों समुदायों में डर का माहौल है। डर इसलिए, क्योंकि दोनों ही समुदायों के हथियारबंद ‘वॉलेंटियर’ कभी भी गोलीबारी शुरू कर देते हैं। राज्य में इस वक्त 50 से ज्यादा उग्रवादी समूह सक्रिय हैं। इनमें से आधे सरकार के साथ बातचीत में शामिल हैं, फिर भी हिंसा की ताजा घटनाओं में इन्हीं की संलिप्तता सामने आई है। राज्य में तैनात एक शीर्ष सैन्य अधिकारी ने भास्कर को बताया कि देश से नक्सलवाद खत्म करने के बाद केंद्र सरकार का पूरा फोकस अब पूर्वोत्तर के उग्रवाद पर है। इसमें भी मणिपुर सबसे ऊपर है। उग्रवाद के खात्मे का लक्ष्य 2029 तय किया गया है। इसकी शुरुआत अमरनाथ यात्रा के बाद हो सकती है। मासूम मौतें: आखिर 25 दिन बाद परिवार ने किया दोनों बच्चों का अंतिम संस्कार 7 अप्रैल को ट्रोंगलाओबी में जिन 2 मासूम बच्चों की संदिग्ध उग्रवादियों के बम धमाके में मौत हुई थी, उनका अंतिम संस्कार शनिवार को लामथाबुंग ग्राउंड में कर दिया गया। बच्चों के शव तब से ही मुर्दाघर में रखे थे। परिवार का कहना था कि जब तक बच्चों को न्याय नहीं मिलता, अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। भास्कर ने दो दिन पहले इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। बच्चों की दादी ने बताया कि सरकार ने हमें पैसा, नौकरी देने की बात की, लेकिन हमने मना कर दिया। हमें बच्चों के लिए न्याय चाहिए। एक्शन प्लान के 3 स्टेप… तीन साल में क्या बदला: 60 हजार लोगों के हालात जस के तस, सिर्फ सीएम नए ———————— ये खबर भी पढ़ें… जिन्हें कपड़े उतारकर घुमाया, वो मणिपुरी लड़कियां कहां गईं: 3 साल से सुनवाई जारी, विक्टिम बोलीं- जिंदा हूं, पर दुनिया मुझे भूल गई
जिन लड़कियों का वीडियो वायरल हुआ था, उनके बारे में गवाह बताती हैं, ‘वे अभी मणिपुर में ही रहती हैं। उस खौफ की वजह से आज भी घर से बाहर नहीं निकलती हैं। किसी से बात नहीं करतीं हैं। परिवारवालों और करीबियों से थोड़ी बात कर लेतीं हैं। डर इतना है कि आज भी कई दिन तक खाना नहीं खाती हैं। इस बात से भी डरती हैं कि वो वीडियो फिर से सोशल मीडिया पर कभी सामने न आ जाए।’ पढ़ें पूरी खबर…
मणिुपर हिंसा- 3 साल में सिर्फ CM बदला, हालात नहीं:केंद्र सरकार 2029 तक उग्रवाद खत्म करने की तैयारी में; शुरुआत अमरनाथ यात्रा के बाद


