बेगूसराय सदर प्रखंड क्षेत्र में पपीता सहित अन्य फल फसलों की खेती करने वाले किसान इन दिनों गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। बदलते मौसम और तकनीकी जानकारी के अभाव के कारण उनकी फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है और किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। परना निवासी अरुण महतो, सांख के गौरव कुमार और ब्रह्मदेव यादव, तथा चांदपुरा के अमित कुमार ने बताया कि गर्मी और ठंड दोनों मौसमों में पपीते के पौधे सूख रहे हैं। इस समस्या के कारण किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। किसानों का कहना है कि उन्हें समय पर आवश्यक तकनीकी सलाह और जानकारी नियमित रूप से नहीं मिल पाती है। वे अपने स्तर पर जैविक खाद और अन्य तरीकों का उपयोग कर बेहतर उत्पादन का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। कृषि विशेषज्ञ महावीर महतो के अनुसार, बदलते मौसम के प्रभावों को देखते हुए आधुनिक तकनीकों और सावधानियों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि किसानों को मौसम संबंधी जानकारी पर नजर रखनी चाहिए और फसल बीमा जैसी योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए, जिससे आर्थिक जोखिम कम हो सके। किसानों का मानना है कि यदि उन्हें समय पर उचित मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और सहयोग मिले, तो क्षेत्र में बागवानी को नई दिशा मिल सकती है और उनकी आय में उल्लेखनीय सुधार संभव है। बेगूसराय सदर प्रखंड क्षेत्र में पपीता सहित अन्य फल फसलों की खेती करने वाले किसान इन दिनों गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। बदलते मौसम और तकनीकी जानकारी के अभाव के कारण उनकी फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है और किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। परना निवासी अरुण महतो, सांख के गौरव कुमार और ब्रह्मदेव यादव, तथा चांदपुरा के अमित कुमार ने बताया कि गर्मी और ठंड दोनों मौसमों में पपीते के पौधे सूख रहे हैं। इस समस्या के कारण किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। किसानों का कहना है कि उन्हें समय पर आवश्यक तकनीकी सलाह और जानकारी नियमित रूप से नहीं मिल पाती है। वे अपने स्तर पर जैविक खाद और अन्य तरीकों का उपयोग कर बेहतर उत्पादन का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। कृषि विशेषज्ञ महावीर महतो के अनुसार, बदलते मौसम के प्रभावों को देखते हुए आधुनिक तकनीकों और सावधानियों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि किसानों को मौसम संबंधी जानकारी पर नजर रखनी चाहिए और फसल बीमा जैसी योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए, जिससे आर्थिक जोखिम कम हो सके। किसानों का मानना है कि यदि उन्हें समय पर उचित मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और सहयोग मिले, तो क्षेत्र में बागवानी को नई दिशा मिल सकती है और उनकी आय में उल्लेखनीय सुधार संभव है।


