आमतौर पर लोग डॉक्टर के पास तब जाते हैं, जब किसी बीमारी के स्पष्ट लक्षण दिखते हैं। लेकिन हार्ट डिजीज, किडनी डिजीज और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के लक्षण शुरुआत में नजर नहीं आते। स्क्रीनिंग की मदद से स्पष्ट लक्षणों से पहले ही इन बीमारियों का पता लगाया जा सकता है। इसलिए हेल्थ स्क्रीनिंग को ‘साइलेंट लाइफसेवर’ कहा जाता है। इससे न सिर्फ बीमारी का जल्दी पता लगता है, बल्कि इलाज भी आसान हो जाता है। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज समझेंगे कि हेल्थ स्क्रीनिंग क्या है। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. संचयन रॉय, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- हेल्थ स्क्रीनिंग क्या है और यह करवाना क्यों जरूरी है? जवाब- हेल्थ स्क्रीनिंग एक प्रिवेंटिव मेडिकल टेस्ट प्रक्रिया है। सवाल- हेल्थ स्क्रीनिंग में कौन से टेस्ट करवाने जरूरी हैं? जवाब- हेल्थ स्क्रीनिंग में जरूरी टेस्ट उम्र, जेंडर और रिस्क फैक्टर के अनुसार तय होते हैं। सामान्य गाइडलाइन इस तरह हैं- अब समझते हैं कि कॉमन बीमारियों का पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट करवाने जरूरी हैं- डायबिटीज लिपिड प्रोफाइल टेस्ट यूरिक एसिड विटामिन डेफिशिएंसी लिवर हेल्थ किडनी हेल्थ थायरॉइड ब्लड प्रेशर और हार्ट हेल्थ सवाल- कितने अंतराल पर हेल्थ स्क्रीनिंग करवानी चाहिए? जवाब- यह उम्र और रिस्क फैक्टर से तय होता है- 20-30 वर्ष: हर 2-3 साल में बेसिक जांच। 30-40 वर्ष: हर 1-2 साल में स्क्रीनिंग। 40+ वर्ष: हर साल फुल बॉडी चेकअप डायबिटीज/बीपी/थायरॉइड पेशेंट: 6-12 महीने में फैमिली हिस्ट्री या हाई रिस्क: डॉक्टर की सलाह के मुताबिक लाइफस्टाइल (स्मोकिंग, मोटापा) के अनुसार अंतराल घट-बढ़ सकता है। सवाल- अगर कोई लक्षण न हो, क्या तब भी हेल्थ स्क्रीनिंग करवानी चाहिए? जवाब- हां, लक्षणों के बिना भी स्क्रीनिंग जरूरी है, क्योंकि कई बीमारियों में लक्षण नहीं दिखते हैं। सवाल- हेल्थ स्क्रीनिंग से शुरुआती स्टेज में ही किन बीमारियों का पता चल सकता है? जवाब- हेल्थ स्क्रीनिंग के जरिए कई बीमारियों का शुरुआती स्टेज में पता लगाया जा सकता है- सवाल- क्या मेंटल हेल्थ की जांच भी जरूरी है और यह कैसे की जाती है? जवाब- हां, मेंटल हेल्थ भी उतनी ही जरूरी है जितनी फिजिकल हेल्थ है। सवाल- आंखों की और सुनने की क्षमता की जांच कितने समय में करानी चाहिए? जवाब- ये रिस्क फैक्टर के हिसाब से बदल सकता है। 20-40 वर्ष: हर 2 साल में आंखों की जांच कराएं। 40+ वर्ष: साल में एक बार (ग्लूकोमा रिस्क बढ़ता है।) कराएं। डायबिटिक लोग: हर साल रेटिना जांच जरूरी है। कान की जांच: 50+ उम्र में हर 1-2 साल में जांच करवाएं। सवाल- क्या डेंटल हेल्थ के लिए भी कोई एडवांस टेस्ट और स्क्रीनिंग होती है? जवाब- हां, डेंटल स्क्रीनिंग में बेसिक और एडवांस दोनों जांच होती हैं। ओरल एग्जाम: कैविटी, मसूड़ों की बीमारी की पहचान होती है। डेंटल एक्स-रे: अंदरूनी सड़न और इन्फेक्शन का पता चलता है। सवाल- हेल्थ स्क्रीनिंग का खर्च कितना आता है और क्या ये जांचें इंश्योरेंस में कवर होती हैं? जवाब- हेल्थ स्क्रीनिंग का खर्च इस बात से तय होता है कि किस लेवल की स्क्रीनिंग करवा रहे हैं। बेसिक हेल्थ चेकअप: 1,000-3,000 रुपए। फुल बॉडी पैकेज: 3,000- 10,000 रुपए। एडवांस टेस्ट में यह खर्च बढ़ सकता है। इंश्योरेंस ………………
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