पटना में खोले जा रहे सबसे ज्यादा म्यूल अकाउंट:साइबर प्रहार 3.0 के तहत बिहार में 5036 फर्जी खाते चिह्नित, 22 शाखाएं रडार पर

पटना में खोले जा रहे सबसे ज्यादा म्यूल अकाउंट:साइबर प्रहार 3.0 के तहत बिहार में 5036 फर्जी खाते चिह्नित, 22 शाखाएं रडार पर

साइबर ठगी के खिलाफ बिहार पुलिस ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है। मंगलवार को ‘साइबर प्रहार 3.0’ के तहत साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (CCSU) ने 5036 म्यूल यानी फर्जी बैंक खातों की पहचान की है। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठग ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने में करते थे। यह कार्रवाई नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 5078 शिकायतों के आधार पर की गई है। पुलिस का कहना है कि इन खातों के जरिए साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क चल रहा था, जिसे अब तोड़ने की तैयारी है। 22 बैंक शाखाएं रडार पर, कर्मियों की भूमिका जांच में जांच में सामने आया है कि ये फर्जी खाते वर्ष 2025-26 में खोले गए थे। इस संबंध में 22 बैंक शाखाओं को चिह्नित किया गया है, जहां सबसे अधिक म्यूल खाते खुले हैं। इन शाखाओं में कार्यरत संदिग्ध बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन खातों को खोलने में लापरवाही बरती गई या जानबूझकर नियमों की अनदेखी की गई। पूरा नेटवर्क तोड़ने पर फोकस इस अभियान का लक्ष्य सिर्फ खाताधारकों पर कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे साइबर ठगी नेटवर्क को खत्म करना है। इसमें बैंकिंग सिस्टम से जुड़े लोग, फर्जी सिम सप्लायर और संगठित गिरोह भी जांच के दायरे में हैं। पहले भी मिल चुकी है बड़ी सफलता इससे पहले चलाए गए ‘साइबर प्रहार 2.0’ अभियान में भी पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली थी। उस दौरान राज्य भर में 1216 संदिग्ध खातों की पहचान की गई, 122 मामले दर्ज हुए और 234 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। लगभग 72 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़े मामलों में भी कानूनी कार्रवाई की गई थी। पटना बना हॉटस्पॉट, कई जिले रडार पर म्यूल खातों के मामले में पटना सबसे आगे रहा है, जहां 272 संदिग्ध खाते पकड़े गए। इसके अलावा मोतिहारी, भागलपुर, बेतिया, पूर्णिया, वैशाली और मुजफ्फरपुर जैसे जिले भी इस सूची में शामिल हैं। इन जिलों में पुलिस विशेष निगरानी रख रही है। पटना: 272 खाते मोतिहारी: 95 भागलपुर: 55 बेतिया: 50 पूर्णिया: 49 वैशाली: 44 मुजफ्फरपुर: 43
बैंक कर्मियों की मिलीभगत के संकेत जांच के दौरान कुछ मामलों में बैंक कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। भोजपुर, कटिहार और पटना में तीन बैंक कर्मियों को गिरफ्तार किया गया है। इन पर फर्जी खाते खुलवाने में सहयोग करने का आरोप है। इससे साफ है कि साइबर ठगी का नेटवर्क केवल बाहर से ही नहीं, बल्कि सिस्टम के अंदर से भी जुड़ा है। फर्जी सिम कार्ड विक्रेताओं पर भी कार्रवाई साइबर अपराध में फर्जी सिम कार्ड का भी बड़ा रोल सामने आया है। इसी को देखते हुए 167 संदिग्ध सिम कार्ड विक्रेताओं को चिन्हित किया गया है। इनके खिलाफ जांच और सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन सिम कार्डों का इस्तेमाल किन-किन मामलों में किया गया। बच्चों से जुड़े मामलों में भी सख्ती साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई ने बच्चों से जुड़े ऑनलाइन अपराधों पर भी कार्रवाई तेज कर दी है। Tipline रिपोर्ट के आधार पर 20 संदिग्ध लोगों की पहचान की गई है। पटना और वैशाली में तीन मामले दर्ज कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में संदिग्ध सामग्री मिली है, जिसकी जांच की जा रही है। साइबर अपराधियों के लिए कड़ा संदेश साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई, बिहार का यह अभियान साफ संकेत देता है कि अब बिहार में साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। साइबर प्रहार 3.0 के जरिए पुलिस पूरे नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में काम कर रही है। आने वाले दिनों में इस अभियान से और बड़े खुलासे सामने आने की उम्मीद है। साइबर ठगी के खिलाफ बिहार पुलिस ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है। मंगलवार को ‘साइबर प्रहार 3.0’ के तहत साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (CCSU) ने 5036 म्यूल यानी फर्जी बैंक खातों की पहचान की है। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठग ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने में करते थे। यह कार्रवाई नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 5078 शिकायतों के आधार पर की गई है। पुलिस का कहना है कि इन खातों के जरिए साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क चल रहा था, जिसे अब तोड़ने की तैयारी है। 22 बैंक शाखाएं रडार पर, कर्मियों की भूमिका जांच में जांच में सामने आया है कि ये फर्जी खाते वर्ष 2025-26 में खोले गए थे। इस संबंध में 22 बैंक शाखाओं को चिह्नित किया गया है, जहां सबसे अधिक म्यूल खाते खुले हैं। इन शाखाओं में कार्यरत संदिग्ध बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन खातों को खोलने में लापरवाही बरती गई या जानबूझकर नियमों की अनदेखी की गई। पूरा नेटवर्क तोड़ने पर फोकस इस अभियान का लक्ष्य सिर्फ खाताधारकों पर कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे साइबर ठगी नेटवर्क को खत्म करना है। इसमें बैंकिंग सिस्टम से जुड़े लोग, फर्जी सिम सप्लायर और संगठित गिरोह भी जांच के दायरे में हैं। पहले भी मिल चुकी है बड़ी सफलता इससे पहले चलाए गए ‘साइबर प्रहार 2.0’ अभियान में भी पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली थी। उस दौरान राज्य भर में 1216 संदिग्ध खातों की पहचान की गई, 122 मामले दर्ज हुए और 234 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। लगभग 72 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़े मामलों में भी कानूनी कार्रवाई की गई थी। पटना बना हॉटस्पॉट, कई जिले रडार पर म्यूल खातों के मामले में पटना सबसे आगे रहा है, जहां 272 संदिग्ध खाते पकड़े गए। इसके अलावा मोतिहारी, भागलपुर, बेतिया, पूर्णिया, वैशाली और मुजफ्फरपुर जैसे जिले भी इस सूची में शामिल हैं। इन जिलों में पुलिस विशेष निगरानी रख रही है। पटना: 272 खाते मोतिहारी: 95 भागलपुर: 55 बेतिया: 50 पूर्णिया: 49 वैशाली: 44 मुजफ्फरपुर: 43
बैंक कर्मियों की मिलीभगत के संकेत जांच के दौरान कुछ मामलों में बैंक कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। भोजपुर, कटिहार और पटना में तीन बैंक कर्मियों को गिरफ्तार किया गया है। इन पर फर्जी खाते खुलवाने में सहयोग करने का आरोप है। इससे साफ है कि साइबर ठगी का नेटवर्क केवल बाहर से ही नहीं, बल्कि सिस्टम के अंदर से भी जुड़ा है। फर्जी सिम कार्ड विक्रेताओं पर भी कार्रवाई साइबर अपराध में फर्जी सिम कार्ड का भी बड़ा रोल सामने आया है। इसी को देखते हुए 167 संदिग्ध सिम कार्ड विक्रेताओं को चिन्हित किया गया है। इनके खिलाफ जांच और सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन सिम कार्डों का इस्तेमाल किन-किन मामलों में किया गया। बच्चों से जुड़े मामलों में भी सख्ती साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई ने बच्चों से जुड़े ऑनलाइन अपराधों पर भी कार्रवाई तेज कर दी है। Tipline रिपोर्ट के आधार पर 20 संदिग्ध लोगों की पहचान की गई है। पटना और वैशाली में तीन मामले दर्ज कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में संदिग्ध सामग्री मिली है, जिसकी जांच की जा रही है। साइबर अपराधियों के लिए कड़ा संदेश साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई, बिहार का यह अभियान साफ संकेत देता है कि अब बिहार में साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। साइबर प्रहार 3.0 के जरिए पुलिस पूरे नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में काम कर रही है। आने वाले दिनों में इस अभियान से और बड़े खुलासे सामने आने की उम्मीद है।  

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