झुंझुनूं के गुढ़ा गौड़जी इलाके में जहां 1000 फीट की गहराई पर भी ट्यूबवेल सूख जाते हैं, वहां श्रीसरदारपुरा के श्रीराम काजला वैज्ञानिक तरीके से खेती कर लाभ कमा रहे हैं। पहले वे ई-मित्र कियोस्क संचालक थे, लेकिन वर्ष 2020 में कोरोना के चलते इसे बंद करना पड़ गया। तब श्रीराम काजला ने अपनी पुश्तैनी खेती संभाली। खरीफ में बाजरा, मूंग,ग्वार तथा रबी में गेहूं, सरसों व मसूर उगाने लगे। मगर इससे परिवार का गुजारा मुश्किल था। इसके बाद बारिश का पानी इकट्ठा करना शुरू किया। अब वे फार्म पॉन्ड, ड्रिप सिंचाई प्रणाली और नेट हाउस तकनीक अपनाकर महज 0.6 हेक्टेयर जमीन से सालाना 8 से 10 लाख रुपए की आमदनी कर रहे हैं। दरअसल वे परंपरागत फसलों के बजाय बागवानी से लाभ कमाने में सफल रहे हैं। श्रीराम के साथ उनकी पत्नी भी खेती में सहयोग कर रही हैं। अब वे आसपास के किसानों को निशुल्क बीज और तकनीकी जानकारी भी दे रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक भी पहुंच रहे हैं नवाचार देखने जिले के कृषि वैज्ञानिक और प्रशासनिक अधिकारी भी इनके इस नवाचार को देखने श्रीसरदारपुरा पहुंच रहे हैं। श्रीराम काजला ने बताया कि पहले लगता था कि कम पानी में कुछ नहीं होगा, लेकिन फार्म पॉन्ड और ड्रिप सिस्टम से बूंद-बूंद सिंचाई शुरू की तो यही जमीन सोना उगलने लगी। पारंपरिक गेहूं व बाजरा की खेती से मुश्किल से परिवार का गुजारा हो पाता था। ऐसे में राज्य सरकार की मदद से 30+30 का फार्म पॉन्ड बनवाया और बारिश का पानी सहेजना शुरू किया। इसके बाद ड्रिप सिस्टम पद्धति अपनाकर पानी की 40% बचत की। नेट हाउस तैयार कर 2200 वर्ग मीटर में आधुनिक खेती शुरू की। रासायनिक खादों को छोड़ वर्मी कंपोस्ट और डीकंपोजर को अपनाया। परंपरागत फसलों को छोड़कर खीरा, तरबूज, प्याज, मिर्ची की खेती शुरू की। 200 पेड़ पपीता और नींबू के भी लगए। अब नेट हाउस में साल में दो बार खीरा की फसल ले रहे हैं। इससे पांच लाख रुपए की आय हो रही है। 200 नींबू के पेड़ों से साल में डेढ़ से दो लाख रुपए की कमाई हो रही है। साथ ही इनके बीच तरबूज, मिर्च, पपीता की खेती कर रहे हैं। इस मिश्रित खेती से दो से तीन लाख रुपए की आमदनी हो रही है। पिछले साल जून-जुलाई में करीब दस लाख रुपए में नेटहाउस लगवाया था। अगस्त में पहली बार इसमें खीरे की फसल की। फिर दूसरी बार मार्च में की है। पहली बार वाली फसल से करीब पांच-छह लाख रुपए की बिक्री हुई। बीस किमी दूर सिंघाना मंडी में हर दूसरे दिन आठ क्विंटल तक खीरा बेचते हैं।


