गयाजी का तापमान 43॰ सेल्सियस तक पहुंच चुका है। सुबह 9 बजे के बाद से सड़कें सुनसान होने लगती है। मौसम विभाग के अनुसार अभी गर्मी और बढ़ेगी। मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 100 बेड का विशेष लू वार्ड तैयार किया गया है। वार्ड में एसी, ठंडा पानी, जरूरी दवाएं और पूरी मेडिकल टीम तैनात है। डॉक्टर, नर्स और वार्ड अटेंडेंट की ड्यूटी तय कर दी गई है। वहीं, सड़कों पर घूम-घूमकर काम करने वाले, ठेले लगाने वाले और फुटपाथ पर दुकान लागने वालों की परेशानियां बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि गर्मी है तो क्या कर सकते हैं, घर-परिवार और बच्चों के लिए तो धूप में निकलना ही होगा। गैस सिलेंडर डिलीवर करने वाले बोले, मन नहीं करता घर से निकलने का कड़ी धूप में घरेलू गैस सिलेंडर की डिलीवरी करने के लिए संतोष सिंह जा रहे थे। उनके ठेले पर गैस के सिलेंडर पूरी तरह से लोड थे। गर्म हवा और तेज धूप में वे अपने ठेले को खींच रहे थे। उन्होंने कहा कि बहुत ज्याद गर्मी है। तापमान इतना बढ़ गया है कि काम करना मुश्किल है। मन नहीं करता है कि घर से बाहर निकलूं, पर क्या करें काम नहीं करेंगे तो घर कैसे चलेगा।
हालात बदल गए हैं, 50 डिग्री तक तापमान जा सकता है
इसी तरह सड़क किनारे मनोज कुमार सत्तू का ठेला लगाते हैं। मनोज कहते है कि अप्रैल में पहले ऐसी गर्मी पहले नहीं होती थी। अब पहले वाली बात नहीं रह गई है। हालात बदल गए हैं। अभी तो गर्मी और बढ़ेगी। 50 डिग्री तक तापमान जा सकता है। भयंकर गर्मी है, पर परिवार के लिए घर से निकलना ही पड़ेगा भीषण गर्मी पर सड़क पर प्रभु कुमार भी मिले। प्रभु साइकिल पर घूम-घूमकर इडली बेचा करते हैं। बहुत ज्यादा गर्मी होने के कारण वे काफी थक चुके थे। इसलिए सड़क किनारे साइकिल खड़ी कर आराम कर रहे थे। प्रभु कहते हैं कि भयंकर गर्मी है, लेकिन क्या कर सकते हैं परिवार के लिए तो निकलना ही न पड़ेगा।
मरीजों के लिए शफ्टिंग के लिए एंबुलेंस भी तैनात मगध मेडिकल कॉलेज मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. केके सिन्हा ने बताया कि पहले मरीज इमरजेंसी में आएंगे, वहां प्राथमिक इलाज होगा, फिर उन्हें लू वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा।
इमरजेंसी से लू वार्ड की दूरी करीब 500 मीटर है। इस दूरी को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने छोटी एम्बुलेंस तैनात की है। यह एंबुलेंस 24 घंटे उपलब्ध रहेंगी। मतलब, मरीज को स्ट्रेचर पर ढोने की जरूरत नहीं पड़ेगी, तुरंत शिफ्टिंग होगी। आईस पैक भी हमारे पास उपलब्ध है।
इधर अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। खासकर लू, डिहाइड्रेशन और बुखार के मरीज आ रहे हैं। लेकिन राहत की बात यह है कि अस्पतालों में पहले से तैयारी कर ली गई है। जनरल वार्ड में पंखे-कूलर लगाए जा रहे हैं। पीने के पानी की व्यवस्था दुरुस्त की जा रही है। बिजली कटने की स्थिति में जनरेटर भी तैयार रखे गए हैं।
स्कूलों की टाइमिंग भी बदली जा रही है। बच्चों को दोपहर की तपिश से बचाने के लिए सुबह की शिफ्ट में पढ़ाई कराई जा रही है।
कुल मिलाकर, गया इस वक्त तप रहा है। लेकिन इस तपिश के बीच सिस्टम भी सक्रिय है। प्रशासन, अस्पताल और आम लोग—तीनों मोर्चे पर तैयारी दिख रही है। यही वजह है कि संकट के बीच भी हालात संभले हुए हैं। गयाजी का तापमान 43॰ सेल्सियस तक पहुंच चुका है। सुबह 9 बजे के बाद से सड़कें सुनसान होने लगती है। मौसम विभाग के अनुसार अभी गर्मी और बढ़ेगी। मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 100 बेड का विशेष लू वार्ड तैयार किया गया है। वार्ड में एसी, ठंडा पानी, जरूरी दवाएं और पूरी मेडिकल टीम तैनात है। डॉक्टर, नर्स और वार्ड अटेंडेंट की ड्यूटी तय कर दी गई है। वहीं, सड़कों पर घूम-घूमकर काम करने वाले, ठेले लगाने वाले और फुटपाथ पर दुकान लागने वालों की परेशानियां बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि गर्मी है तो क्या कर सकते हैं, घर-परिवार और बच्चों के लिए तो धूप में निकलना ही होगा। गैस सिलेंडर डिलीवर करने वाले बोले, मन नहीं करता घर से निकलने का कड़ी धूप में घरेलू गैस सिलेंडर की डिलीवरी करने के लिए संतोष सिंह जा रहे थे। उनके ठेले पर गैस के सिलेंडर पूरी तरह से लोड थे। गर्म हवा और तेज धूप में वे अपने ठेले को खींच रहे थे। उन्होंने कहा कि बहुत ज्याद गर्मी है। तापमान इतना बढ़ गया है कि काम करना मुश्किल है। मन नहीं करता है कि घर से बाहर निकलूं, पर क्या करें काम नहीं करेंगे तो घर कैसे चलेगा।
हालात बदल गए हैं, 50 डिग्री तक तापमान जा सकता है
इसी तरह सड़क किनारे मनोज कुमार सत्तू का ठेला लगाते हैं। मनोज कहते है कि अप्रैल में पहले ऐसी गर्मी पहले नहीं होती थी। अब पहले वाली बात नहीं रह गई है। हालात बदल गए हैं। अभी तो गर्मी और बढ़ेगी। 50 डिग्री तक तापमान जा सकता है। भयंकर गर्मी है, पर परिवार के लिए घर से निकलना ही पड़ेगा भीषण गर्मी पर सड़क पर प्रभु कुमार भी मिले। प्रभु साइकिल पर घूम-घूमकर इडली बेचा करते हैं। बहुत ज्यादा गर्मी होने के कारण वे काफी थक चुके थे। इसलिए सड़क किनारे साइकिल खड़ी कर आराम कर रहे थे। प्रभु कहते हैं कि भयंकर गर्मी है, लेकिन क्या कर सकते हैं परिवार के लिए तो निकलना ही न पड़ेगा।
मरीजों के लिए शफ्टिंग के लिए एंबुलेंस भी तैनात मगध मेडिकल कॉलेज मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. केके सिन्हा ने बताया कि पहले मरीज इमरजेंसी में आएंगे, वहां प्राथमिक इलाज होगा, फिर उन्हें लू वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा।
इमरजेंसी से लू वार्ड की दूरी करीब 500 मीटर है। इस दूरी को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने छोटी एम्बुलेंस तैनात की है। यह एंबुलेंस 24 घंटे उपलब्ध रहेंगी। मतलब, मरीज को स्ट्रेचर पर ढोने की जरूरत नहीं पड़ेगी, तुरंत शिफ्टिंग होगी। आईस पैक भी हमारे पास उपलब्ध है।
इधर अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। खासकर लू, डिहाइड्रेशन और बुखार के मरीज आ रहे हैं। लेकिन राहत की बात यह है कि अस्पतालों में पहले से तैयारी कर ली गई है। जनरल वार्ड में पंखे-कूलर लगाए जा रहे हैं। पीने के पानी की व्यवस्था दुरुस्त की जा रही है। बिजली कटने की स्थिति में जनरेटर भी तैयार रखे गए हैं।
स्कूलों की टाइमिंग भी बदली जा रही है। बच्चों को दोपहर की तपिश से बचाने के लिए सुबह की शिफ्ट में पढ़ाई कराई जा रही है।
कुल मिलाकर, गया इस वक्त तप रहा है। लेकिन इस तपिश के बीच सिस्टम भी सक्रिय है। प्रशासन, अस्पताल और आम लोग—तीनों मोर्चे पर तैयारी दिख रही है। यही वजह है कि संकट के बीच भी हालात संभले हुए हैं।


