रेवाड़ी और धारूहेड़ा में निकाय चुनाव में 14 दिन का समय बचा है। भाजपा में फिलहाल नॉट आल इज वैल वाली स्थिति दिख रही है। जिला मुख्यालय से धारूहेड़ा तक पार्टी में धड़ेबाजी स्पष्ट नजर आ रही है। जिसे अपने पक्ष में भुनाने के लिए विपक्ष कोई मौका नहीं छोड़ रहा है। जिससे 10 मई को होने वाले चुनाव में रेवाड़ी और धारूहेड़ा में भाजपा के सामने अपनी सत्ता बचाने की चुनौती बनती दिख रही है। ऐसे में अब पार्टी को इससे बाहर निकालने के लिए मुख्यमंत्री के दो मई के रेवाड़ी दौरे पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। पूर्व मंत्री भी विवाद में कूदे कांग्रेस नेता पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव भी भाजपा की इस लड़ाई में कूद पड़े हैं। शुक्रवार को पार्टी उम्मीदवार नेहारिका चौधरी का नामांकन करवाने रेवाड़ी पहुंचें पूर्व मंत्री ने विधायक लक्ष्मण सिंह यादव केंद्रीय मंत्री लक्ष्मण सिंह के कथित विवाद को जनता के जनादेश का अपमान बताते हुए इसकी निंदा की थी। जानिए विवाद को कैसे हवा मिली रेवाड़ी- धारूहेड़ा में 10 मई को निकाय चुनाव होने हैं। चेयरमैन उम्मीदवारों नाम घोषित करने में देरी को केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह और विधायक लक्ष्मण सिंह यादव के बीच उम्मीदवारों के चयन को लेकर हुई बहस से जोड़कर प्रचारित किया गया। अंत में दोनों जगह राव इंद्रजीत सिंह की पसंद के चेहरों को टिकट मिला। टिकट मिलने के बाद भाजपा उम्मीदवार विनिता पीपल ने अपनी पहली पत्रकार वार्ता में पीएम मोदी से जिला अध्यक्ष और प्रभारी सभी को धन्यवाद दिया। अपने संबोधन में उन्होंने विधायक लक्ष्मण सिंह का नाम नहीं लिया। पास बैठी जिलाध्यक्ष के बताने के बाद भी विनिता पीपल ने उसे अनदेखा कर दिया। विनिता पीपल की पीसी ने विवाद को और हवा दे दी। नामांकन से बनाई दूरी रेवाड़ी और धारूहेड़ा में भाजपा उम्मीदवारों ने 24 अप्रैल को नामांकन किए। रेवाड़ी में राज्यमंत्री गौरव गौतम और धारूहेड़ा में राजेश नागर की मौजूदगी में नामांकन किया। इस दौरान जिला प्रभारी और प्रधान सहित पार्टी के अधिकतर पदाधिकारी मौजूद रहे। विधायक लक्ष्मण की गैर-मौजूदगी विवाद में आग में घी डालने का काम कर गई। जानिए विधायक क्या बोले विधायक लक्ष्मण यादव ने कहा कि पार्टी के सभी उम्मीदवार सर्वमान्य है। पहले से तय कार्यक्रम के चलते बाहर होने के कारण वह शुक्रवार को नामांकन में शामिल नहीं हो पाए। दो मई को मुख्यमंत्री रेवाड़ी में चुनावी सभा को संबोधित करेंगे। पहले सीएम को अस्पताल का शिलान्यास करना था। आंचार संहिता के चलते अब केवल चुनावी जनसभा होगी। राव इंद्रजीत सिंह से विवाद में विधायक ने कहा कि जैसा प्रचारित किया जा रहा है, वैसा कुछ नहीं हुआ। पार्टी मीटिंग में सभी ने अपनी राय रखी। जिसके बाद सीनियर नेताओं ने अंतिम निर्णय लिए। राव इंद्रजीत सिंह यदि मुझे कुछ कहते भी है तो बड़े होने के नाते यह उनका अधिकार है। मीडिया और विपक्ष 12 साल बाद भी राव इंद्रजीत सिंह को भाजपा से अलग देखता है। उनके लंबे अनुभव को देखते हुए पार्टी उनकी बातों को प्राथमिकता देती हैं। जिसमें कुछ भी गलत नहीं है। हम सब मिलकर रेवाड़ी- धारूहेड़ा में कमल खिलाने के लिए एकजुटता से काम करेंगे।


