रेवाड़ी में गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल रहा उपचार:50 प्रतिशत डिलीवरी केस रेफर, फोन करने पर भी नहीं पहुंचते बेहोशी के डॉक्टर

रेवाड़ी में गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल रहा उपचार:50 प्रतिशत डिलीवरी केस रेफर, फोन करने पर भी नहीं पहुंचते बेहोशी के डॉक्टर

रेवाड़ी में बेहोशी के डाक्टर की मनमानी के चलते कोसली का नागरिक अस्पताल गर्भवती महिलाओं के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है। अस्पताल में डिलीवरी करवाने के लिए आने वाली करीब 50 प्रतिशत महिलाओं को रेवाड़ी या पीजीआई रोहतक रेफर किया जा रहा है। HIV किट सहित आवश्यक जांच और दवाओं का भी अभाव है। जिससे गर्भवती महिलाओं और उनके अभिभावकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है और सरकारी सुविधाओं से महरूम होना पड़ रहा है। तीन दिन फिक्स, संसाधन भी अधूरे महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीति ने कहा कि अस्पताल के लिए हायर किए गए बेहोशी के डॉक्टर पारिवारिक समस्या के चलते छुट्‌टी पर चल रहे हैं। अस्थाई रूप से रेवाड़ी से तीन दिन के लिए डाक्टर की ड्यूटी लगाई हुई हैं, परंतु वे आते ही नहीं। जिससे डिलीवरी के लिए आने वाली महिलाओं को रेफर करना पड़ता है। अस्पताल में डिलीवरी के लिए आने वाली महिलाओं के लिए आवश्यक दवाईयों और जांच किट की भी पूरी व्यवस्था नहीं है। जिससे अधिकतर मामलों में उपचार संभव नहीं होने के चलते रेफर करना पड़ता है। जल्द होगा समस्या का समाधान एसएमओ डॉ. विक्रम ने बताया कि एचआईवी जांच किट नहीं मिल रही हैं। बेहोशी के डॉक्टर की भी समस्या बनी हुई है। मामला संज्ञान में आने के बाद सीएमओ को अवगत करवाया गया है। उन्होंने जल्द समस्या के समाधान का भरोसा दिया है। मरीज बोले, नहीं कोई सुविधा मरीज राजबाला, रेखा, मनीषा, ललिता, मुकेश, सावित्री और शांति ने एसएमओ को शिकायत दी। जिसमें बताया कि सरकारी गर्भवती महिलाओं को सभी सुविधाएं फ्री देने का वादा करती है। हकीकत में सरकारी अस्पताल में कोई सुविधा नहीं मिलती। एचआईवी और UPT जैसे टेस्ट भी बाहर करवाने पड़ते हैं। पैसे वाले लोग तो वैसे ही सरकारी अस्पतालों में नहीं आते, गरीब आते हैं तो उन्हें भी बाहर टेस्ट करवाने और दवा खरीदने के लिए विवश किया जाता है। आयरन टेबलेट ही मिलती है दिव्या ने कहा कि यहां मैं पहले भी आती रही हूं। डाक्टर जो दवाई लिखते हैं, उसमें से एक आयरन की टेबलेट देकर बाकी बाहर से खरीदने की बोलकर वापस भेज देते हैं। हम गरीब लोगों के लिए ऐसा करना कैसे संभव हो सकते हैं। एक टेस्ट किया, कल फिर बुलाया शीतल ने कहा कि वह तीन माह से परेशान थी। घर वालों ने जब कोई सुनवाई नहीं की तो वह अस्पताल पहुंची। यहां एक टेस्ट किया और दूसरे के लिए कल फिर आने को कहा। एक गोली देकर बाकी बाहर से खरीदने की बोल दिया। अब मैं कैसे घर जाऊं और कैसे दवा खरीदूं।

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