संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने महिला आरक्षण बिल को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसे बीजेपी की सोची-समझी साजिश बताया, जिसका उद्देश्य राजनीतिक लाभ लेना है। सांसद बर्क ने दावा किया कि बीजेपी और एनडीए सरकार यह बिल पांच राज्यों में हुए चुनावों और तमिलनाडु व पश्चिम बंगाल के आगामी चुनावों में राजनीतिक फायदा उठाने के लिए लाई थी। उन्होंने विपक्ष के हवाले से कहा कि प्रधानमंत्री ने संसद के विशेष सत्र में स्वयं स्वीकार किया था कि 2023 में महिला आरक्षण बिल सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के समर्थन से पारित हुआ था। बर्क ने सवाल उठाया कि जब दोनों पक्षों का योगदान था, तो सरकार इसे लागू करने में देरी क्यों कर रही है। बर्क ने सरकार पर जनता और महिलाओं को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के हित में काम करना चाहती थी, तो इस बिल को अब तक लागू कर दिया जाना चाहिए था। उन्होंने मौजूदा 543 सीटों पर तुरंत आरक्षण देने की मांग की, बजाय इसके कि सरकार 850 सीटों पर आरक्षण की बात करे। असांसद ने स्पष्ट किया कि विपक्ष का विरोध केवल ‘परिसीमन’ प्रक्रिया को थोपने के खिलाफ था, जिसे सरकार अपने निजी राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करना चाहती है। उन्होंने जोर दिया कि महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए। बर्क ने गरीब और मजदूर समाज के लोगों की परेशानियों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि चायवालों के यहां भी छापे डलवाए जाएंगे, तो यह प्रधानमंत्री का अपमान है, जो खुद को “चायवाला” बताते हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई गलत है और विपक्ष के लोग पीछे नहीं हटेंगे। सांसद ने दोहराया कि वे समाज के हर वर्ग की परेशानियों में उनके साथ मजबूती से खड़े रहेंगे।


