समस्तीपुर सदर अस्पताल परिसर में 100 बेड का स्पेशल केयर यूनिट(सीसीबी) बनने का रास्ता साफ हो गया है। यह स्पेशल केयर यूनिट ट्रामा सेंटर के रूप में काम करेगा। भवन पांच मंजिला होगा। जिसके निर्माण पर करीब 40 करोड़ रुपए खर्च होगा। सेंटर के निर्माण को लेकर टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। इसके लिए इमरजेंसी वार्ड के सामने ऑक्सीजन प्लांट से लेकर उत्तर की ओर सिविल सर्जन कार्यालय तक सभी पुराने भवनों को तोड़ा जाएगा। बारिश से पहले काम शुरू होने की उम्मीद है। स्पेशल केयर यूनिट के शुरू होने पर बेहतर सुविधा मिलेगी। जिससे किसी प्रकार के मरीजों को उपचार के लिए जिले से बाहर जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी। मरीजों को मिलेगी राहत सिविल सर्जन डॉ. राजीव कुमार झा ने बताया कि जल्द ही इसको लेकर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। स्पेशल केयर यूनिट में 100 बेड़ों की क्षमता होगी। यूनिट की सभी बेड आईसीयू की तरह होगी। वेंटिलेटर की सुविधा होगी। जिससे दुर्घटना से लेकर गोली लगने से घायल, ब्रेन स्टोक, बर्न केस, हार्ड अटेक जैसी गंभीर मरीजों का उपचार हो सकेगा। गंभीर मरीज को दरभंगा, पटना जाने की जरूरत नहीं होगी। तीन अनुमंडलीय अस्पताल में भी बनेगा स्पेशल केयर यूनिट स्पेशल केयर यूनिट के लिए अस्पताल में अलग से 20 स्पेशलिस्ट के साथ ही 50 अन्य डॉक्टरों की नियुक्ति होगी। 200 स्वास्थ्य कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। इसके साथ ही आधुनिक मशीन भी लगाए जाएंगे। सदर अस्पताल के साथ ही जिले के दलसिंहसराय, रोसड़ा और पूसा अनुमंडलीय अस्पताल में भी 50-50 बेड का स्पेशल केयर यूनिट का भी निर्माण होगा। इसके निर्माण प्रति यूनिट 20-20 करोड़ रुपए खर्च होंगे। सभी सुविधाएं जिला स्पेशल केयर यूनिट की तरह होगी। बेड के हिसाब से डॉक्टर और कर्मियों की तैनाती होगी। इमरजेंसी और पुराना कैंटीन तक बनेगा पार्क नई बिल्डिंग बनने के बाद इमरजेंसी से लेकर ओल्ड कैंटीन तक के भवन को तोड़ा जाएगा। वहां पार्क और पार्किंग का निर्माण होगा। ऑक्सीजन प्लांट को ब्लड बैंक से पश्चिम ले जाया जाएगा। टेंडर की प्रक्रिया पूरी सिविल सर्जन डॉ. राजीव कुमार झा ने कहा कि सदर अस्पताल परिसर में स्पेशल केयर यूनिट निर्माण को लेकर टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसके साथ ही तीन अनुमंडलीय अस्पताल में स्पेशल केयर यूनिट बनाया जा रहा है। इससे क्रिटिकल मरीजों का उपचार आसान हो जाएगा। जल्द ही भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। पूराने भवने के सामानों को चाइल्ड एंड मैटरनिटी सेंटर और मॉडल अस्पताल भवन में शिफ्ट किया जाएगा। समस्तीपुर सदर अस्पताल परिसर में 100 बेड का स्पेशल केयर यूनिट(सीसीबी) बनने का रास्ता साफ हो गया है। यह स्पेशल केयर यूनिट ट्रामा सेंटर के रूप में काम करेगा। भवन पांच मंजिला होगा। जिसके निर्माण पर करीब 40 करोड़ रुपए खर्च होगा। सेंटर के निर्माण को लेकर टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। इसके लिए इमरजेंसी वार्ड के सामने ऑक्सीजन प्लांट से लेकर उत्तर की ओर सिविल सर्जन कार्यालय तक सभी पुराने भवनों को तोड़ा जाएगा। बारिश से पहले काम शुरू होने की उम्मीद है। स्पेशल केयर यूनिट के शुरू होने पर बेहतर सुविधा मिलेगी। जिससे किसी प्रकार के मरीजों को उपचार के लिए जिले से बाहर जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी। मरीजों को मिलेगी राहत सिविल सर्जन डॉ. राजीव कुमार झा ने बताया कि जल्द ही इसको लेकर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। स्पेशल केयर यूनिट में 100 बेड़ों की क्षमता होगी। यूनिट की सभी बेड आईसीयू की तरह होगी। वेंटिलेटर की सुविधा होगी। जिससे दुर्घटना से लेकर गोली लगने से घायल, ब्रेन स्टोक, बर्न केस, हार्ड अटेक जैसी गंभीर मरीजों का उपचार हो सकेगा। गंभीर मरीज को दरभंगा, पटना जाने की जरूरत नहीं होगी। तीन अनुमंडलीय अस्पताल में भी बनेगा स्पेशल केयर यूनिट स्पेशल केयर यूनिट के लिए अस्पताल में अलग से 20 स्पेशलिस्ट के साथ ही 50 अन्य डॉक्टरों की नियुक्ति होगी। 200 स्वास्थ्य कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। इसके साथ ही आधुनिक मशीन भी लगाए जाएंगे। सदर अस्पताल के साथ ही जिले के दलसिंहसराय, रोसड़ा और पूसा अनुमंडलीय अस्पताल में भी 50-50 बेड का स्पेशल केयर यूनिट का भी निर्माण होगा। इसके निर्माण प्रति यूनिट 20-20 करोड़ रुपए खर्च होंगे। सभी सुविधाएं जिला स्पेशल केयर यूनिट की तरह होगी। बेड के हिसाब से डॉक्टर और कर्मियों की तैनाती होगी। इमरजेंसी और पुराना कैंटीन तक बनेगा पार्क नई बिल्डिंग बनने के बाद इमरजेंसी से लेकर ओल्ड कैंटीन तक के भवन को तोड़ा जाएगा। वहां पार्क और पार्किंग का निर्माण होगा। ऑक्सीजन प्लांट को ब्लड बैंक से पश्चिम ले जाया जाएगा। टेंडर की प्रक्रिया पूरी सिविल सर्जन डॉ. राजीव कुमार झा ने कहा कि सदर अस्पताल परिसर में स्पेशल केयर यूनिट निर्माण को लेकर टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसके साथ ही तीन अनुमंडलीय अस्पताल में स्पेशल केयर यूनिट बनाया जा रहा है। इससे क्रिटिकल मरीजों का उपचार आसान हो जाएगा। जल्द ही भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। पूराने भवने के सामानों को चाइल्ड एंड मैटरनिटी सेंटर और मॉडल अस्पताल भवन में शिफ्ट किया जाएगा।


