राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी (आप) में करीब 14 साल लंबा अपना कैरियर खत्म कर लिया है। उन्होंने बीजेपी के साथ अपनी राजनीतिक पारी आगे बढ़ाने का फैसला किया है। वैसे उनके इस फैसले का अनुमान तो लगाया ही जा रहा था, लेकिन 24 अप्रैल को उन्होंने औपचारिक ऐलान कर दिया।
राघव चड्ढा पेशे से सीए हैं। वह कुछ युवा पेशेवरों के साथ इंडिया अगेन्स्ट करप्शन (आईएसी) से जुड़े थे। इसी संगठन के बैनर तले दिल्ली के रामलीला मैदान में अन्ना हज़ारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन हुआ था। इसी आंदोलन के गर्भ से आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ था।
आप में रहते हुए राघव चड्ढा की काफी तरक्की हुई। शुरू में वह दिल्ली की केजरीवाल सरकार का बजट ड्राफ्ट करने में मदद करते थे। बाद में वह आप के बड़े नेताओं के सलाहकार बन गए। केजरीवाल ने उन्हें आप की नौ सदस्यों वाली राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) में अहम भूमिका दी।
2018 में चड्ढा विधायक बने और 2019 में आप ने उन्हें दक्षिण दिल्ली से लोक सभा का टिकट भी दिया। वह लोक सभा चुनाव हार गए। अंत में मार्च 2022 में आप ने उन्हें पंजाब से राज्य सभा का सांसद बनाया। साथ ही, सदन में पार्टी के उप नेता का भी दायित्व दिया।
राज्य सभा जाने के बाद चड्ढा का रुख थोड़ा बदल गया। आप नेताओं पर जब कानूनी शिकंजा कसने लगा तो चड्ढा ज्यादा सक्रिय नहीं दिखाई देते थे।
सबसे पहले सतेंदर जैन की गिरफ्तारी हुई। जैन दिल्ली सरकार के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री थे। मई में आप के मीडिया प्रभारी विजय नायर, सितंबर में मनीष सिसोदिया और मार्च 2024 में खुद अरविंद केजरीवाल जेल भेज दिए गए।
कहा जाता है कि अपने तमाम बड़े नेताओं की गिरफ्तारियों के खिलाफ सक्रिय होने के बजाय चड्ढा ने पंजाब की भगवंत मान सरकार के कामकाज में दखल देना शुरू किया और राज्य सभा में अपना कद ऊपर करने की कोशिश करने लगे।


