Retardmaxxing Trend For Gen Z : इंटरनेट की दुनिया अतरंगी है। यहां कब कब क्या ट्रेंड करने लग जाए, कोई नहीं जानता! सोशल मीडिया पर इंटरनेट की “गाली” ‘रिटार्डमैक्सिंग’ का ट्रेंड चल रहा है। ये उन लोगों को राहत दे रहा है जो ओवरथिंक करते हैं। समझते हैं कि ‘रिटार्डमैक्सिंग’ क्या है और ये कैसे ओवरथिंकिंग को रोकने में मददगार है।
Retardmaxxing meaning in Hindi | ‘रिटार्डमैक्सिंग’ का मतलब
यह शब्द दो हिस्सों से बना है: ‘Retard’ (जो यहां ‘दिमाग का कम इस्तेमाल करने’ के व्यंग्यात्मक संदर्भ में है) और ‘Maxxing’ (किसी चीज को अधिकतम सीमा तक ले जाना)। इस तरह ये शब्द इंटरनेट पर तैयार हुआ।
इसे सरल भाषा में समझिए- “इतना ज्यादा मत सोचो कि तुम पागल हो जाओ, बस काम शुरू कर दो।” यह उन लोगों के लिए है जो ‘एनालिसिस पैरालिसिस’ (इतना सोचना कि आप कोई फैसला ही न ले पाएं) के शिकार हैं। यह ऐसे ही लोगों को उस दिमागी जाल से बाहर निकालने के लिए यूज किया जाता है।

यह गाली कैसे है?
इसके नाम में ‘Retard’ शब्द का इस्तेमाल विवादास्पद है। कई लोग इसे अपमानजनक मानते हैं क्योंकि यह शब्द ऐतिहासिक रूप से मानसिक विकलांगता वाले लोगों के लिए एक गाली के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है।
यह ट्रेंड कब और कहां से शुरू हुआ?
इंटरनेट के ‘अंडरग्राउंड’ मंचों जैसे 4chan और Reddit पर ऐसे ज्ञानियों से इस तरह के शब्द उपजते हैं। जहां ‘-maxxing’ प्रत्यय (Suffix) वाले शब्दों का चलन है (जैसे Looksmaxxing)। बाद में यह TikTok और X (Twitter) के ‘सेल्फ-हेल्प’ और ‘प्रोडक्टिविटी’ ग्रुप्स में वायरल हो गया।
यह शब्द 2023 के अंत और 2024 की शुरुआत में चर्चा में आया। आधुनिक पीढ़ी (Gen Z) के बीच बढ़ती एंग्जायटी और इंफॉर्मेशन ओवरलोड के जवाब में यह एक ‘मीम’ (Meme) के रूप में शुरू हुआ, जो अब एक जीवन-दर्शन (Philosophy) की तरह बनता जा रहा है।
Psychologist Tips : मनोवैज्ञानिक के विचारों से मिलता-जुलता
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर (मनोवैज्ञानिक) पीटर गॉलविट्जर (Peter Gollwitzer) का शोध बताता है कि केवल “लक्ष्य” सोचने से काम नहीं चलता। सफलता तब मिलती है जब आप “कब, कहां और कैसे” की चिंता छोड़ छोटे-छोटे एक्शन लेना शुरू करते हैं। ‘रिटार्डमैक्सिंग’ इसी “एक्शन” वाले हिस्से पर जोर देता है।
‘अगर-मगर’ के चक्रव्यूह को तोड़ने का मकसद
जब दिमाग ‘अगर-मगर’ के चक्रव्यूह में फंस जाता है, तो रिटार्डमैक्सिंग उस चक्र को तोड़कर शरीर को एक्शन में लाता है। इसके बाद व्यक्ति फालतू की बातों को छोड़कर आगे के बारे में सोचता और काम करता है।
इसका सीधा मतलब और उद्देश्य है- “फीलिंग्स को छोड़ो, काम पर लगो।” या “ज्यादा सोचना छोड़ो और बस काम करो”।


