यूपी बोर्ड का रिजल्ट आ चुका है। जानी-मानी साइकोलॉजिस्ट व करियर काउंसलर डॉ. उज्मा कमर ने परीक्षा परिणाम पर चर्चा करते हुए कहा कि आज का वक्त वैज्ञानिक तरीकों से आकलन करने का है। प्रतिस्पर्धा बहुत अधिक है और छात्र मानसिक दबाव महसूस करते हैं, लेकिन छात्र-छात्राओं व अभिभावकों को एक बात समझना बेहद जरूरी है कि भविष्य की चुनौतियों को आज ही समझना होगा, तभी बेहतर भविष्य की नींव पड़ेगी। अपनी पसंद को दें प्राथमिकता
डॉ. उज्मा कमर ने कहा कि अक्सर छात्र दूसरों की देखा-देखी या माता-पिता की उम्मीदों के बोझ तले दबकर एक अदृश्य दबाव में अपने करियर का चुनाव करते हैं। कुछ बच्चे ट्रेंड के हिसाब से चलते हैं, तो कुछ दोस्तों की राय में गलत फैसले लेते हैं। रिजल्ट आ गया है, अब बात करियर के चुनाव की होनी चाहिए। सबसे जरूरी है अपनी आंतरिक आवाज सुनना, क्योंकि आप खुद को जितना बेहतर समझते हैं, उतना कोई और नहीं समझ सकता। इसलिए वही रास्ता चुनें जिसमें आपकी रुचि हो। अंकों का दबाव और मानसिक स्वास्थ्य
परीक्षा परिणामों के बाद अंकों और प्रतिशत को लेकर समाज में जो होड़ मची रहती है, डॉ. उज्मा कमर ने उसे मानसिक तनाव का मुख्य कारण बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिक अंक लाना ही बुद्धिमत्ता का एकमात्र पैमाना नहीं है। हालांकि अच्छे अंक आत्मविश्वास बढ़ाते हैं, लेकिन परीक्षा के बाद उनके बारे में चिंता करना व्यर्थ है। छात्र को परीक्षा की तैयारी के दौरान ही गंभीर होना चाहिए, परिणाम आने के बाद केवल भविष्य की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका
रिजल्ट कम आने पर छात्रों में बढ़ती निराशा और तनाव की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. उज्मा कमर ने कहा कि इस समय माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। बच्चों पर अतिरिक्त दबाव न डालें और न ही उन्हें डांटें। अभिभावकों को समझना चाहिए कि हर बच्चे की अपनी क्षमताएं होती हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग और नई शिक्षा नीति (NEP) का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी बच्चा बेकार नहीं होता, बस उसकी विशिष्ट प्रतिभा को पहचानने की जरूरत है। करियर के अनगिनत विकल्प
देश के कई प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के साथ काम कर चुकीं डॉ. उज्मा कमर इन दिनों एक एड्यूप्रेनियर के तौर पर काम कर रही हैं तथा शिक्षा व मीडिया से जुड़ी एक कंपनी की डायरेक्टर हैं। वह कहती हैं कि आज का दौर बदल चुका है। अब केवल ट्रेडिशनल करियर ही सफलता नहीं दिलाते, यानी केवल डॉक्टर या इंजीनियर बनना ही विकल्प नहीं है। कॉमर्स, ह्यूमेनिटीज, आर्ट्स, कंप्यूटर साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मेडिकल के कई अन्य कोर्स भी ऐसे विकल्प हैं जहां शानदार करियर बन सकता है। शिक्षा व्यवस्था लचीली हुई है और देश के साथ-साथ विदेशों में भी अफोर्डेबल एजुकेशन यानी सस्ती शिक्षा उपलब्ध हो जाती है। ग्लोबल विलेज बन रही दुनिया में अब विज्ञान का छात्र कला के विषय पढ़ सकता है और कला वाला विज्ञान के। करियर काउंसलर से मिलें और चुनें सही रास्ता
डॉ. उज्मा कमर देश की जानी-मानी साइकोलॉजिस्ट और करियर काउंसलर के रूप में पहचानी जाती हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश की सौ प्रमुख प्रभावशाली महिलाओं की लिस्ट में भी चुना जा चुका है। वह कहती हैं कि जो छात्र-छात्रा या अभिभावक भविष्य को लेकर दुविधा में हैं, उन्हें प्रोफेशनल करियर काउंसलर से मदद लेनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि छात्र-छात्रा या अभिभावक को पसंदीदा शिक्षक या अनुभवी सदस्यों से बात करनी चाहिए। इसके अलावा एप्टीट्यूड टेस्ट और साइकोमेट्रिक असेसमेंट के जरिए अपनी क्षमताओं का सटीक विश्लेषण कर सकते हैं। करियर काउंसलर की मदद लेने से न केवल सही दिशा मिलती है, बल्कि छात्र भविष्य में होने वाली बेचैनी और अवसाद से भी बच सकते हैं। यूपी बोर्ड का रिजल्ट कैसा भी रहा हो, डॉ. उज्मा कमर का संदेश स्पष्ट है कि अपने आप को पहचानें, खुद पर भरोसा रखें और संभावनाओं के खुले आसमान में अपनी पसंद की उड़ान भरें।


