भारत-चीन पर डोनाल्ड ट्रंप का विवादित पोस्ट, ईरान ने दिल्ली-बीजिंग के समर्थन में दिया बड़ा बयान

भारत-चीन पर डोनाल्ड ट्रंप का विवादित पोस्ट, ईरान ने दिल्ली-बीजिंग के समर्थन में दिया बड़ा बयान

Iran on Donald Trump India China Hellhole Post: भारत और चीन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया पर की गई विवादित पोस्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में है। एक तरफ जहां भारत में कांग्रेस और ‘आप’ समेत तमाम विपक्षी दलों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है, वहीं हैदराबाद स्थित ईरानी दूतावास ने भी दिल्ली और बीजिंग के समर्थन में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कड़ा बयान जारी किया है।

हैदराबाद स्थित ईरानी दूतावास ने लिखा, ‘चीन और भारत सभ्यता के पालने (जन्मदाता) हैं। वास्तव में, ‘नरक’ (Hellhole) तो वह जगह है, जहां के युद्ध-अपराधी राष्ट्रपति ने ईरान में सभ्यता को नष्ट करने की धमकी दी थी।’ इससे पहले ईरानी दूतावास ने यह भी लिखा था, ‘हर दिन एक नई पोस्ट के साथ ट्रंप की अमानवीयता सीमाओं के पार जाती दिख रही है। यह अपने आप में घोर नस्लवाद है।’

क्या है पूरा मामला?

अमेरिका में इन दिनों ‘जन्म के आधार पर नागरिकता’ (Birthright Citizenship) बहस का मुख्य मुद्दा बनी हुई है। इसी कड़ी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूढ़िवादी लेखक और रेडियो होस्ट माइकल सैवेज का जन्मसिद्ध नागरिकता के बारे में एक विवादित लेख सोशल मीडिया पर साझा किया।

माइकल सैवेज के इस लेख में दावा किया गया है कि मौजूदा कानून प्रवासियों को अपनी गर्भावस्था के ‘नौवें महीने’ में अमेरिका पहुंचकर स्थानीय कानूनों का अनुचित लाभ उठाने की अनुमति देता है। लेख के अनुसार, यहां (अमेरिका) जन्म लेते ही बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है और फिर वे अपने पूरे परिवार को चीन, भारत या दुनिया के किसी भी अन्य ‘नरक’ (Hellhole) से यहां ले आते हैं। सैवेज ने आगे लिखा कि यह बदलाव देखने के लिए आपको अधिक दूर जाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अब यहां कई जगहों पर अंग्रेजी नहीं बोली जाती।

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा साझा की गई इस पोस्ट में ‘बर्थराइट’ कानून की आलोचना करते हुए कहा गया है कि इसका फैसला अदालतों या वकीलों द्वारा नहीं, बल्कि देशव्यापी मतदान के आधार पर होना चाहिए।

डोनाल्ड ट्रंप की इस पोस्ट के बाद भारत में इसकी तीखी आलोचना हो रही है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से इस मामले में कड़ी आपत्ति दर्ज कराने की मांग की है। वहीं, भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उन्हें इस रिपोर्ट की जानकारी है, लेकिन फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

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