Real Estate Land Deals India: भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में तेज उछाल के संकेत मिल रहे हैं। साल 2025 में डेवलपर्स ने 149 सौदों के जरिए 3,093 एकड़ जमीन खरीदी, जिनकी कुल कीमत 54,818 करोड़ रुपए रही। यह पिछले साल की तुलना में 32% अधिक है। प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी फर्म जेएलएल के अनुसार, इतनी बड़ी जमीन खरीद आने वाले वर्षों में आवास, ऑफिस और मिश्रित परियोजनाओं की नई लहर ला सकती है। जमीन खरीद के मामले में 2026 की भी शानदार शुरुआत हुई है। मार्च तिमाही 2026 में कुल 18,000 करोड़ रुपए में बिल्डर्स ने 900 एकड़ जमीन की खरीदारी की है।
नई खरीदी जमीन पर इनका होगा निर्माण
नई खरीदी गई जमीन में से 78 फीसदी भूमि पर आवास बनेंगे। इसके अलावा 17 फीसदी जमीन वेयरहाउस-फैक्ट्री के लिए अलॉट की जाएगी। इसके अलावा डेटा सेंटर और ऑफिस के लिए 2-2 फीसदी भूमि का उपयोग होगा।
- 490 करोड़ रुपये प्रति एकड़ से भाव से बिकी मुंबई में जमीन 2026 की मार्च तिमाही में, 11 एकड़ जमीन डेवलपर्स ने खरीदे
- 22.9 करोड़ वर्ग फुट में होगा नए घर और ऑफिसों का निर्माण अगले 2 से 5 साल में, 78% जमीन रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स के लिए खरीदी गई
- 32% बढ़ी जमीन का खरीदारी, मकान-ऑफिस की बढ़ती डिमांड को देखते हुए बिल्डरों ने 2025 में 20 शहरों में खरीदी 54,800 करोड़ रुपए की जमीन, 2398 एकड़ की खरीव आवासीय परियोजनाओं के लिए
- 48% जमीन छोटे शहरों (टियर-2 सिटीज) में खरीदी गई, पर जमीन खरीदने के लिए उपयोग की गई कुल राशि में इनकी केवल 11% हिस्सेदारी
- 92,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश की पड़ेगी जरूरत प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए, जिसमें 52,000 करोड़ से ज्यादा बाहरी फंडिंग से आएंगे।
| कैटेगरी | जरूरी फंड (करोड़ रुपये में) |
|---|---|
| रेजिडेंशियल | 72,000 |
| ऑफिस | 8,700 |
| डेटा सेंटर | 2,400 |
| इंडस्ट्रियल | 2,400 |
| अन्य उपयोग | 1,364 |
| होटल | 700 |
टॉप 7 शहरों का दबदबा
पिछले साल खरीदी गई जमीन पर करीब 22.9 करोड़ वर्गफुट निर्माण की क्षमता है। यानी अगले 2 से 5 वर्षों में 20 बड़े शहरों में नए हाउसिंग प्रोजेक्ट, दफ्तर और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स लॉन्च हो सकते हैं। शीर्ष 7 शहर निवेश परिदृश्य पर अपना वर्चस्व बनाए हुए हैं और अनुमान है कि नई खरीदी गई जमीनों पर निर्माण के लिए आवश्यक कुल पूंजी का लगभग 89% ये शीर्ष 7 शहर ही आकर्षित करेंगे।
क्या होगा फायदा
जमीन सौदों में तेजी से देश में निर्माण गतिविधियों, रोजगार और संबंधित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। सप्लाई बढ़ने से देश में मकान और ऑफिस स्पेस की किल्लत नहीं होगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ने से लोगों को ज्यादा विकल्प के साथ सस्ते और बेहतर सौदे मिल सकते हैं। हालांकि जमीन खरीदना सिर्फ पहला कदम है। इन परियोजनाओं को जमीन से खड़ा करने के लिए 92,000 करोड़ रुपए से अधिक पूंजी की जरूरत होगी। इसमें से 52,000 करोड़ रकम बाहरी फंडिंग से आने का अनुमान है। यानी बैंकों, प्राइवेट इक्विटी फंड्स, एआइएफ के लिए बड़ा अवसर खुल सकता है।


