बेतिया के एक विद्यालय का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) जारी करने की प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से नकद रुपये लेते हुए एक कर्मचारी नजर आ रहा है। यह वीडियो नौतन प्रखंड स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर का बताया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विद्यालयों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोग और अभिभावक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। कार्यालय में रखे आवेदन पत्र के साथ दिखे 500 रुपए वायरल वीडियो में विद्यालय का कार्यालय स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। वहां कुछ अभिभावक और बच्चे मौजूद नजर आ रहे हैं। कार्यालय की मेज पर एक छात्र का आवेदन पत्र रखा हुआ है, जिस पर छात्र की तस्वीर भी लगी है। उसी आवेदन पत्र के साथ 500 रुपए नकद भी दिखाई दे रहे हैं। वीडियो को देखकर लोग इसे टीसी प्रक्रिया से जोड़कर देख रहे हैं। इससे संदेह जताया जा रहा है कि स्थानांतरण प्रमाण पत्र जारी करने के बदले राशि ली जा रही थी। नौवीं में नामांकन के लिए लेने पहुंचा था टीसी प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रिंस कुमार नामक छात्र वर्ष 2022 से विद्यालय में पढ़ाई कर रहा था। छात्र नौवीं कक्षा में नामांकन के लिए स्थानांतरण प्रमाण पत्र लेने स्कूल पहुंचा था। आरोप है कि इसी दौरान विद्यालय प्रशासन की ओर से टीसी जारी करने के एवज में पैसे की मांग की गई। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है। टीसी के लिए शुल्क नहीं, फिर पैसे क्यों? इस घटना के बाद लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि सामान्यता स्कूल में स्थानांतरण प्रमाण पत्र के लिए अलग से कोई शुल्क निर्धारित नहीं होता, तो फिर इस विद्यालय में पैसे किस आधार पर लिए जा रहे थे। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वीडियो में दिख रही राशि किसी वैध शुल्क का हिस्सा थी या फिर अवैध वसूली का मामला है। जब तक प्रशासनिक जांच नहीं होती, तब तक स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो सकेगी। स्कूल प्रशासन की चुप्पी से बढ़े सवाल पूरे मामले में अब तक विद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न तो वीडियो को लेकर कोई सफाई दी गई है और न ही आरोपों का खंडन किया गया है। स्कूल प्रबंधन की चुप्पी से संदेह और गहरा गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि कोई अनियमितता नहीं हुई, तो विद्यालय प्रशासन खुलकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रहा। अभिभावकों में नाराजगी वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है। कई लोगों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और नैतिकता सबसे जरूरी है। यदि बच्चों के दस्तावेज जारी करने के नाम पर पैसे लिए जाते हैं, तो यह बेहद गंभीर मामला है। अभिभावकों ने प्रशासन से मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल यह मामला केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इससे निजी और सरकारी दोनों शिक्षा संस्थानों की प्रक्रियाओं पर सवाल उठ रहे हैं। लोग मांग कर रहे हैं कि स्कूलों में फीस, प्रमाण पत्र और अन्य सेवाओं को लेकर स्पष्ट नियम सार्वजनिक किए जाएं। ताकि अभिभावकों से मनमाने तरीके से किसी तरह की राशि न वसूली जा सके। जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर फिलहाल पूरा मामला वायरल वीडियो और आरोपों पर आधारित है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि टीसी के नाम पर पैसे लिए गए थे या नहीं, और यदि लिए गए तो वह वैध शुल्क था या अवैध वसूली। स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आए और शिक्षा व्यवस्था में लोगों का भरोसा बना रहे। बेतिया के एक विद्यालय का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) जारी करने की प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से नकद रुपये लेते हुए एक कर्मचारी नजर आ रहा है। यह वीडियो नौतन प्रखंड स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर का बताया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विद्यालयों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोग और अभिभावक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। कार्यालय में रखे आवेदन पत्र के साथ दिखे 500 रुपए वायरल वीडियो में विद्यालय का कार्यालय स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। वहां कुछ अभिभावक और बच्चे मौजूद नजर आ रहे हैं। कार्यालय की मेज पर एक छात्र का आवेदन पत्र रखा हुआ है, जिस पर छात्र की तस्वीर भी लगी है। उसी आवेदन पत्र के साथ 500 रुपए नकद भी दिखाई दे रहे हैं। वीडियो को देखकर लोग इसे टीसी प्रक्रिया से जोड़कर देख रहे हैं। इससे संदेह जताया जा रहा है कि स्थानांतरण प्रमाण पत्र जारी करने के बदले राशि ली जा रही थी। नौवीं में नामांकन के लिए लेने पहुंचा था टीसी प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रिंस कुमार नामक छात्र वर्ष 2022 से विद्यालय में पढ़ाई कर रहा था। छात्र नौवीं कक्षा में नामांकन के लिए स्थानांतरण प्रमाण पत्र लेने स्कूल पहुंचा था। आरोप है कि इसी दौरान विद्यालय प्रशासन की ओर से टीसी जारी करने के एवज में पैसे की मांग की गई। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है। टीसी के लिए शुल्क नहीं, फिर पैसे क्यों? इस घटना के बाद लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि सामान्यता स्कूल में स्थानांतरण प्रमाण पत्र के लिए अलग से कोई शुल्क निर्धारित नहीं होता, तो फिर इस विद्यालय में पैसे किस आधार पर लिए जा रहे थे। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वीडियो में दिख रही राशि किसी वैध शुल्क का हिस्सा थी या फिर अवैध वसूली का मामला है। जब तक प्रशासनिक जांच नहीं होती, तब तक स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो सकेगी। स्कूल प्रशासन की चुप्पी से बढ़े सवाल पूरे मामले में अब तक विद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न तो वीडियो को लेकर कोई सफाई दी गई है और न ही आरोपों का खंडन किया गया है। स्कूल प्रबंधन की चुप्पी से संदेह और गहरा गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि कोई अनियमितता नहीं हुई, तो विद्यालय प्रशासन खुलकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रहा। अभिभावकों में नाराजगी वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है। कई लोगों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और नैतिकता सबसे जरूरी है। यदि बच्चों के दस्तावेज जारी करने के नाम पर पैसे लिए जाते हैं, तो यह बेहद गंभीर मामला है। अभिभावकों ने प्रशासन से मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल यह मामला केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इससे निजी और सरकारी दोनों शिक्षा संस्थानों की प्रक्रियाओं पर सवाल उठ रहे हैं। लोग मांग कर रहे हैं कि स्कूलों में फीस, प्रमाण पत्र और अन्य सेवाओं को लेकर स्पष्ट नियम सार्वजनिक किए जाएं। ताकि अभिभावकों से मनमाने तरीके से किसी तरह की राशि न वसूली जा सके। जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर फिलहाल पूरा मामला वायरल वीडियो और आरोपों पर आधारित है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि टीसी के नाम पर पैसे लिए गए थे या नहीं, और यदि लिए गए तो वह वैध शुल्क था या अवैध वसूली। स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आए और शिक्षा व्यवस्था में लोगों का भरोसा बना रहे।


