Strait of Hormuz Firing Dispute: होर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया तनाव के बीच भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारतीय जहाजों द्वारा ईरान को सुरक्षित मार्ग (सेफ पैसेज) के लिए किसी भी प्रकार का भुगतान न तो नकद और न ही क्रिप्टोकरेंसी में किया गया है। सरकार ने ऐसी सभी खबरों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया है।
फायरिंग के बाद उठे थे सवाल
यह विवाद 18 अप्रैल की उस घटना के बाद सामने आया, जब भारतीय-ध्वज वाले दो जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय कथित तौर पर ईरानी बलों की फायरिंग का सामना करना पड़ा और उन्हें वापस लौटना पड़ा। इस घटना के बाद समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई और विभिन्न तरह की अटकलें सामने आने लगीं।
ऑडियो क्लिप ने बढ़ाई हलचल
इसी बीच एक ऑडियो क्लिप भी सामने आई, जिसे भारतीय टैंकर सनमार हेराल्ड से जुड़ा बताया गया। इसमें जहाज का कप्तान ईरानी बलों से फायरिंग रोकने की अपील करता सुनाई देता है और कहता है कि उसे पहले ही आगे बढ़ने की अनुमति दी गई थी। इस ऑडियो के वायरल होने के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया।
सरकार ने फेक न्यूज बताया
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने इन दावों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह खबरें पूरी तरह फर्जी हैं और ऐसी कोई पुष्टि नहीं है कि किसी भारतीय जहाज ने सुरक्षित मार्ग के लिए किसी को भुगतान किया हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जहाज के मालिक से बात करने पर भी इस तरह के किसी लेन-देन की जानकारी नहीं मिली है।
क्रिप्टो स्कैम की खबरों पर भी विराम
कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि जहाज मालिकों को सुरक्षित मार्ग दिलाने के नाम पर क्रिप्टोकरेंसी के जरिए ठगी की कोशिश की जा रही है। हालांकि, सरकार ने इन खबरों को भी खारिज करते हुए कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है जो इस तरह की ठगी की पुष्टि करता हो।
शिपिंग कंपनी ने भी किया खंडन
चेन्नई स्थित शिपिंग कंपनी सनमार शिपिंग ने भी बयान जारी कर कहा कि उसके जहाज ‘सनमार हेराल्ड’ के साथ किसी तरह की क्रिप्टो ठगी या भुगतान का मामला नहीं हुआ है। कंपनी ने इन सभी खबरों को भ्रामक बताया और कहा कि वह भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर सुरक्षित संचालन सुनिश्चित कर रही है।
तनाव के बीच सतर्क भारत
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा मार्गों में से एक है जहां किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।


