कानपुर में 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए शहर के शुभम द्विवेदी सहित 26 लोगों के लिए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। शुभम के परिवार, उनकी पत्नी ऐशान्या ने ऑपरेशन सिंदूर के नायकों का शौर्य वंदन कार्यक्रम का भी आयोजन रखा। मुख्य अतिथि के रूप में स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती और विशिष्ट अतिथि के रूप में बृजेश पाठक व सतीश महाना भी शामिल हुए।
शहर के मोतीझील स्थित लाजपत भवन में बुधवार शाम को कार्यक्रम की शुरुआत शुभम और पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए 26 लोगों को श्रद्धांजलि देकर हुई। पुष्पांजलि सभा के बाद स्वरांजलि का आयोजन किया गया। इसमें विशेष रूप से सैनिकों को भी सम्मानित किया गया, जिन्हें विशिष्ट अतिथि के रूप में बुलाया गया था। सुरों के माध्यम से शुभम सहित 26 लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान डिप्टी सीएम और विधानसभा अध्यक्ष भी मौजूद रहे।
इस दौरान सेना में शहीद हुए जवानों की पत्नियों को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही उन लोगों को भी सम्मान दिया गया, जो सेना में रहते हुए घायल हुए और अपने अंग खो चुके हैं। सतीश महाना और बृजेश पाठक ने सम्मान किया। इस दौरान शुभम की पत्नी ऐशान्या और पिता संजय द्विवेदी भी मंच पर मौजूद रहे।
मंच पर डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने कहा कि कानपुर के बेटे शुभम को आतंकियों ने उनकी पत्नी के सामने ही मार दिया था। उन सभी 26 भारत माता के सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि ऐशान्या ने जो साहस दिखाया है, वह केवल भारत की बेटी ही कर सकती है। सेना को भी सलाम करता हूं, जो हमारे लिए हर समय सीमा पर लड़ती है। पूरे परिवार को नमन करता हूं। यह कार्यक्रम इसलिए है कि हम उस घटना को याद रखें, जिसमें हमारे एक बेटे को सिर्फ इसलिए मार दिया गया कि वह हिन्दू था।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि कमजोर और कायर आतंकवादियों ने इस दुखद घटना को अंजाम दिया, जिसमें हमने अपने शुभम को खो दिया। इस परिवार से हमारे पीढ़ियों से संबंध हैं। उन्होंने कहा कि जब घटना की जानकारी मिली, तो उन्होंने और डिप्टी सीएम ने तुरंत बात कर शुभम के पिता से संपर्क किया। उस समय प्राथमिकता थी कि सबसे पहले शुभम के पार्थिव शरीर को कानपुर लाया जाए।
उन्होंने कहा कि 7 मई 2025 को जब ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी मिली, तो वे सबसे पहले ऐशान्या के पास पहुंचे। उस दिन लगा कि शहीदों के लिए कुछ समर्पित करने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग नारे लगाते हैं कि हिन्दुस्तान किसी के बाप का नहीं है, तो मैं उनसे गर्व से कहता हूं कि हिन्दुस्तान हमारे बाप है। हिन्दुस्तान उनके बाप का नहीं हो सकता, जो केवल अपनी बात करते हैं और बाकी सबको काफिर समझते हैं। हिन्दुस्तान उनका का है, जो किसी आतंकवादी घटना के बाद दूसरों के दर्द को अपना दर्द समझते हैं, जिनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं।


