कैमूर। महिलाओं में बढ़ते कैंसर के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अब बचाव की दिशा में सक्रिय कदम उठा रहा है। कैमूर के सिविल सर्जन डॉ. चंदेश्वरी रजक ने सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) के बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके मुख्य कारणों और बचाव के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी। डॉ. रजक ने बताया कि महिलाओं में स्तन कैंसर के बाद सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने जानकारी दी कि यह कैंसर मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के संक्रमण के कारण होता है। यह वायरस अक्सर 14-15 वर्ष की आयु के दौरान शरीर में प्रवेश कर सकता है। समय के साथ यह वायरस गर्भाशय के निचले हिस्से में गांठ या नोड्यूल का रूप ले लेता है, जो बाद में कैंसर में बदल सकता है। सिविल सर्जन ने इस बीमारी से बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीन को सबसे प्रभावी हथियार बताया। पहला टीका लगने के छह महीने बाद दूसरी खुराक उन्होंने स्पष्ट किया कि यह टीका 14 वर्ष तक की किशोरियों के लिए विशेष रूप से अनुशंसित है। यह स्वदेशी टीका दो खुराकों में दिया जाता है, जिसमें पहला टीका लगने के छह महीने बाद दूसरी खुराक दी जाती है। डॉ. रजक ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपनी बेटियों को समय पर यह टीका लगवाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पूरी तरह सुरक्षित है और भविष्य में होने वाले जानलेवा कैंसर के खतरे को कम करता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस टीकाकरण अभियान को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कैमूर। महिलाओं में बढ़ते कैंसर के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अब बचाव की दिशा में सक्रिय कदम उठा रहा है। कैमूर के सिविल सर्जन डॉ. चंदेश्वरी रजक ने सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) के बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके मुख्य कारणों और बचाव के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी। डॉ. रजक ने बताया कि महिलाओं में स्तन कैंसर के बाद सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने जानकारी दी कि यह कैंसर मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के संक्रमण के कारण होता है। यह वायरस अक्सर 14-15 वर्ष की आयु के दौरान शरीर में प्रवेश कर सकता है। समय के साथ यह वायरस गर्भाशय के निचले हिस्से में गांठ या नोड्यूल का रूप ले लेता है, जो बाद में कैंसर में बदल सकता है। सिविल सर्जन ने इस बीमारी से बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीन को सबसे प्रभावी हथियार बताया। पहला टीका लगने के छह महीने बाद दूसरी खुराक उन्होंने स्पष्ट किया कि यह टीका 14 वर्ष तक की किशोरियों के लिए विशेष रूप से अनुशंसित है। यह स्वदेशी टीका दो खुराकों में दिया जाता है, जिसमें पहला टीका लगने के छह महीने बाद दूसरी खुराक दी जाती है। डॉ. रजक ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपनी बेटियों को समय पर यह टीका लगवाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पूरी तरह सुरक्षित है और भविष्य में होने वाले जानलेवा कैंसर के खतरे को कम करता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस टीकाकरण अभियान को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।


