कोडरमा जिले के जयनगर थाना क्षेत्र स्थित कंझियाडीह पंचायत में ईंट भट्ठे पर काम कर रहे मजदूरों पर हाथियों के झुंड ने देर रात हमला कर दिया। इस घटना में बिहार के फतेहपुर निवासी 32 वर्षीय राजकुमार मांझी और 12 वर्षीय लवकुश की मौत हो गई। जबकि गौरी देवी, कारी देवी और एक मासूम बच्चा घायल हो गए। बताया गया कि करीब 25 से 30 हाथियों का झुंड अचानक भट्ठे पर पहुंचा और झोपड़ीनुमा घरों को तोड़ते हुए सो रहे मजदूरों पर हमला कर दिया। हमले के बाद भगदड़ मच गई। इसके बाद हाथियों का झुंड पास के एक अन्य ईंट भट्ठे पर भी पहुंचा। वहां भी उत्पात मचाया। मासूम को सूंड से पटक-पटक कर मारा घटना के दौरान करीब 40 मजदूर जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। मजदूर धर्मेंद्र मांझी ने बताया कि उनका डेढ़ महीने का बच्चा झोपड़ी में फंस गया था, जिसे बचाने के लिए वे अंदर गए। इसी बीच उनका 12 वर्षीय बेटा लवकुश उनसे अलग हो गया और रास्ता भटककर हाथियों के झुंड के पास पहुंच गया। हाथियों ने उसे सूंड से पटक-पटक कर मार डाला। जिससे उसका शरीर बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया। वहीं दूसरी ओर दूसरे भट्ठे पर भगदड़ के दौरान राजकुमार मांझी भाग नहीं सके। उन्हें हाथियों ने उन्हें कुचल दिया। उनकी पत्नी गौरी देवी भी घायल हो गईं। इस भयावह घटना के बाद मजदूरों के बीच दहशत का माहौल है। कई झोपड़ियां पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं। डेढ़ साल से एक्टिव है हाथियों का झुंड स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले करीब डेढ़ वर्षों से हाथियों का झुंड जिले के विभिन्न प्रखंडों में घूम रहा है। लगातार लोगों को निशाना बना रहा है। बीते एक महीने में ही लगभग आधा दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है। मंगलवार शाम को भी हाथियों के झुंड को लोहाडंडा के पास देखा गया था। जिसके बाद वन विभाग की टीम सक्रिय हुई थी, लेकिन उन्हें पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर पाई। घटना के बाद वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी रविन्द्र कुमार मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। डीएफओ सौमित्र शुक्ला ने बताया कि हाथियों को क्षेत्र से बाहर करने के लिए पश्चिम बंगाल से विशेष टीम बुलाई गई है। मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। परिजनों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कोडरमा जिले के जयनगर थाना क्षेत्र स्थित कंझियाडीह पंचायत में ईंट भट्ठे पर काम कर रहे मजदूरों पर हाथियों के झुंड ने देर रात हमला कर दिया। इस घटना में बिहार के फतेहपुर निवासी 32 वर्षीय राजकुमार मांझी और 12 वर्षीय लवकुश की मौत हो गई। जबकि गौरी देवी, कारी देवी और एक मासूम बच्चा घायल हो गए। बताया गया कि करीब 25 से 30 हाथियों का झुंड अचानक भट्ठे पर पहुंचा और झोपड़ीनुमा घरों को तोड़ते हुए सो रहे मजदूरों पर हमला कर दिया। हमले के बाद भगदड़ मच गई। इसके बाद हाथियों का झुंड पास के एक अन्य ईंट भट्ठे पर भी पहुंचा। वहां भी उत्पात मचाया। मासूम को सूंड से पटक-पटक कर मारा घटना के दौरान करीब 40 मजदूर जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। मजदूर धर्मेंद्र मांझी ने बताया कि उनका डेढ़ महीने का बच्चा झोपड़ी में फंस गया था, जिसे बचाने के लिए वे अंदर गए। इसी बीच उनका 12 वर्षीय बेटा लवकुश उनसे अलग हो गया और रास्ता भटककर हाथियों के झुंड के पास पहुंच गया। हाथियों ने उसे सूंड से पटक-पटक कर मार डाला। जिससे उसका शरीर बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया। वहीं दूसरी ओर दूसरे भट्ठे पर भगदड़ के दौरान राजकुमार मांझी भाग नहीं सके। उन्हें हाथियों ने उन्हें कुचल दिया। उनकी पत्नी गौरी देवी भी घायल हो गईं। इस भयावह घटना के बाद मजदूरों के बीच दहशत का माहौल है। कई झोपड़ियां पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं। डेढ़ साल से एक्टिव है हाथियों का झुंड स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले करीब डेढ़ वर्षों से हाथियों का झुंड जिले के विभिन्न प्रखंडों में घूम रहा है। लगातार लोगों को निशाना बना रहा है। बीते एक महीने में ही लगभग आधा दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है। मंगलवार शाम को भी हाथियों के झुंड को लोहाडंडा के पास देखा गया था। जिसके बाद वन विभाग की टीम सक्रिय हुई थी, लेकिन उन्हें पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर पाई। घटना के बाद वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी रविन्द्र कुमार मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। डीएफओ सौमित्र शुक्ला ने बताया कि हाथियों को क्षेत्र से बाहर करने के लिए पश्चिम बंगाल से विशेष टीम बुलाई गई है। मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। परिजनों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।


