‘इडियट के कहने पर नहीं खुलेगा होर्मुज’, दूसरे दौर की वार्ता से पहले ईरान का डोनाल्ड ट्रंप पर सीधा हमला

‘इडियट के कहने पर नहीं खुलेगा होर्मुज’, दूसरे दौर की वार्ता से पहले ईरान का डोनाल्ड ट्रंप पर सीधा हमला

US Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक राजनीति और व्यापार में भारी उथल-पुथल पैदा कर दी है। दोनों देशों के बीच पाकिस्तान में आयोजित पहले चरण की वार्ता विफल रही जिसके बाद सोमवार को एक बार फिर वार्ता का आयोजन होने का दावा किया जा रहा है। इससे पहले ईरान द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला किया गया है। दक्षिण अफ्रीका स्थित ईरानी दूतावास ने एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए ट्रंप को इडियन यानी बेवकूफ करार दिया है।

खामेनेई के आदेश पर खोलेंगे होर्मुज स्ट्रेट – ईरानी दूतावास

ईरानी दूतावास ने एक वायरल ओडियो क्लिप को रिशेयर करते हुए यह तंज कसा है। इस वीडियो में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना और समुद्र में मौजूद जहाज के बीच रेडियो संचार सुनाई दे रहा है। मैरीटाइम चैनल 16 पर प्रसारित इस रेडियो संदेश में IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे जहाजों को सख्त चेतावनी दी थी। इसमें कहा गया कि यह चैनल 16 पर ईरानी सिपह नौसेना की कॉल है। होर्मुज स्ट्रेट अभी भी बंद है। हम इसे हमारे इमाम खामेनेई के आदेश पर खोलेंगे न कि किसी इडियट के ट्वीट के आधार पर।

ट्रंप के पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए कहा इडियट

इस वीडियो को ट्रंप ने शेयर करते हुए दावा किया कि IRGC की नेवी ने ईरान के अपने विदेश मंत्री को इडियट कहा है। इस पोस्ट को ईरानी दूतावास ने रिशेयर करते हुए लिखा कि, अरे इडियट, उनका मतलब है तुम्हारे इडियट राष्ट्रपति ट्रंप। गूगल पर इडियट सर्च करके देखो, तुम्हें समझ आ जाएगा कि वो कौन है। ट्रंप और ईरानी दूतावास के इस सोशल मीडिया विवाद से तनाव बढ़ने लगा है। ईरान के इस तीखे हमले ने अंतरराष्ट्रिय गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

ईरान और अमेरिका के बीच जल्द होगी वार्ता

ईरान और अमेरिका के बीच शांति बहाल होने की उम्मीद पूरी दुनिया कर रही है। खबरों की मानें तो जल्द ही इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच एक बार फिर वार्ता होने जा रही है। इससे पहले भी दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क पाकिस्तान में हो चुके हैं, हालांकि कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया था। अब एक बार फिर उम्मीद जताई जा रही है कि पाकिस्तान की पहल से बातचीत को नई दिशा मिल सकती है। अगर ऐसा नहीं हो पाता है और दोनों देशों के बीच समझौता विफल रहता है तो यह बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। इसकी वजह से एक बार फिर मिडिल ईस्ट में युद्ध के हालात पैदा हो सकते है।

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