वित्त विभाग आज जारी कर सकता आदेश… झारखंड के कई जिलों में हुए ट्रेजरी घोटाले की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब इस मामले में सीआईडी जांच और महालेखाकार से स्पेशल ऑडिट के साथ-साथ स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है। उत्पाद सचिव अमिताभ कौशल स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का नेतृत्व करेंगे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनके नाम पर सहमति दे दी है। साथ ही, सीएम ने आपराधिक जांच का जिम्मा सीआईडी को सौंपने और सभी ट्रेजरी का महालेखाकार से विशेष ऑडिट कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। वित्त विभाग इस संबंध में आदेश शुक्रवार को जारी कर सकता है। सरकार ने पूछा: बिल क्लर्क-अकाउंटेंट कब से एक ही स्थान पर कार्यरत…जानकारी दें दूसरी ओर, राज्य सरकार ने सभी डीडीओ (ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर) से इस घोटाले से जुड़ी जानकारी जुटाने का निर्देश दिया है। ट्रेजरी अफसरों को कहा गया है कि वे डीडीओ से प्रमाण पत्र लें, जिसमें यह बताया जाए कि कौन विपत्र लिपिक, लेखा लिपिक और लेखापाल कब से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं। तीन साल से अधिक समय से जमे कर्मियों की अलग सूची तैयार करने को कहा गया है। इसके अलावा यह भी जानकारी मांगी गई है कि कहीं डीडीओ और विपत्र लिपिक एक ही मोबाइल नंबर से ओटीपी तो प्राप्त नहीं कर रहे हैं। इसे संभावित मिलीभगत के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
क्यों जरूरी है सीआईडी और एसआईटी जांच जिस आपराधिक मामले की जांच सामान्य पुलिस प्रभावी ढंग से नहीं कर पाती, उसे सीआईडी को सौंपा जाता है। सीआईडी तकनीकी और आपराधिक पहलुओं से गहराई से जांच करती है। वहीं, एसआईटी किसी खास मामले पर केंद्रित होकर उसके अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल करती है। यह टीम न सिर्फ घोटाले की जड़ तक पहुंचने की कोशिश करेगी, बल्कि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियां रोकने के उपाय भी सुझाएगी। एक ही मामले में सीआईडी जहां सबूत जुटाने और आपराधिक एंगल पर काम करेगी, वहीं एसआईटी बड़े नेटवर्क, साजिश और सिस्टम की खामियों पर फोकस करेगी। इधर, गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास में ट्रेजरी घोटाले की जांच को लेकर समीक्षा बैठक हुई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मुख्य सचिव और वित्त सचिव के साथ पूरे मामले की समीक्षा की। इसके बाद मुख्य सचिव अविनाश कुमार और वित्त सचिव प्रशांत कुमार ने राज्य के सभी डीसी और ट्रेजरी अफसरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की। उन्हें अपने-अपने स्तर पर ट्रेजरी से हुए भुगतान की जांच कराने का निर्देश दिया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि रांची में जांच के दौरान पशुपालन विभाग के एक कर्मी द्वारा गड़बड़ी कर राशि निकालने का मामला सामने आया है, इसी तरह अन्य जिलों में भी जांच तेज की जाए। उन्होंने साफ कहा कि गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। वित्त विभाग आज जारी कर सकता आदेश… झारखंड के कई जिलों में हुए ट्रेजरी घोटाले की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब इस मामले में सीआईडी जांच और महालेखाकार से स्पेशल ऑडिट के साथ-साथ स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है। उत्पाद सचिव अमिताभ कौशल स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का नेतृत्व करेंगे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनके नाम पर सहमति दे दी है। साथ ही, सीएम ने आपराधिक जांच का जिम्मा सीआईडी को सौंपने और सभी ट्रेजरी का महालेखाकार से विशेष ऑडिट कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। वित्त विभाग इस संबंध में आदेश शुक्रवार को जारी कर सकता है। सरकार ने पूछा: बिल क्लर्क-अकाउंटेंट कब से एक ही स्थान पर कार्यरत…जानकारी दें दूसरी ओर, राज्य सरकार ने सभी डीडीओ (ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर) से इस घोटाले से जुड़ी जानकारी जुटाने का निर्देश दिया है। ट्रेजरी अफसरों को कहा गया है कि वे डीडीओ से प्रमाण पत्र लें, जिसमें यह बताया जाए कि कौन विपत्र लिपिक, लेखा लिपिक और लेखापाल कब से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं। तीन साल से अधिक समय से जमे कर्मियों की अलग सूची तैयार करने को कहा गया है। इसके अलावा यह भी जानकारी मांगी गई है कि कहीं डीडीओ और विपत्र लिपिक एक ही मोबाइल नंबर से ओटीपी तो प्राप्त नहीं कर रहे हैं। इसे संभावित मिलीभगत के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
क्यों जरूरी है सीआईडी और एसआईटी जांच जिस आपराधिक मामले की जांच सामान्य पुलिस प्रभावी ढंग से नहीं कर पाती, उसे सीआईडी को सौंपा जाता है। सीआईडी तकनीकी और आपराधिक पहलुओं से गहराई से जांच करती है। वहीं, एसआईटी किसी खास मामले पर केंद्रित होकर उसके अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल करती है। यह टीम न सिर्फ घोटाले की जड़ तक पहुंचने की कोशिश करेगी, बल्कि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियां रोकने के उपाय भी सुझाएगी। एक ही मामले में सीआईडी जहां सबूत जुटाने और आपराधिक एंगल पर काम करेगी, वहीं एसआईटी बड़े नेटवर्क, साजिश और सिस्टम की खामियों पर फोकस करेगी। इधर, गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास में ट्रेजरी घोटाले की जांच को लेकर समीक्षा बैठक हुई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मुख्य सचिव और वित्त सचिव के साथ पूरे मामले की समीक्षा की। इसके बाद मुख्य सचिव अविनाश कुमार और वित्त सचिव प्रशांत कुमार ने राज्य के सभी डीसी और ट्रेजरी अफसरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की। उन्हें अपने-अपने स्तर पर ट्रेजरी से हुए भुगतान की जांच कराने का निर्देश दिया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि रांची में जांच के दौरान पशुपालन विभाग के एक कर्मी द्वारा गड़बड़ी कर राशि निकालने का मामला सामने आया है, इसी तरह अन्य जिलों में भी जांच तेज की जाए। उन्होंने साफ कहा कि गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।


