हजारीबाग का युवक नोएडा हिंसा का मास्टरमाइंड, पाकिस्तान से भी जुड़े तार

हजारीबाग का युवक नोएडा हिंसा का मास्टरमाइंड, पाकिस्तान से भी जुड़े तार

नोएडा के फेज-2 स्थित होजरी कॉम्प्लेक्स में हुई हिंसा के तार हजारीबाग से जुड़ गए हैं। नोएडा पुलिस के मुताबिक इस हिंसा का मास्टरमाइंड हजारीबाग का आदित्य आनंद है। उसने एनआईटी जमशेदपुर से बीटेक किया है। पुलिस जांच में पता चला है कि यह हिंसा कोई तात्कालिक गुस्सा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी। पुलिस के मुताबिक वह इस मामले में अकेले काम नहीं कर रहा था, बल्कि उसके साथ बिहार का ऑटो चालक रूपेश रॉय और मनीषा चौहान भी शामिल थे। पुलिस ने रूपेश और मनीषा को 11 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि मुख्य आरोपी आदित्य आनंद अभी फरार है। उसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। लेकिन अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है। नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि जब नोएडा के फेज-2 में पथराव व आगजनी हो रही थी, ठीक उसी समय सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें फैलाई जा रही थीं। साइबर सेल की जांच में दो एक्स (ट्विटर) हैंडल- अनुषी तिवारी और मीर इलियास की पहचान हुई है। इन हैंडल से मजदूरों की मौत की झूठी खबरें और भ्रामक वीडियो साझा किए जा रहे थे। ये दोनों अकाउंट पाकिस्तान से संचालित हो रहे थे। पुलिस का मानना है कि इन बाहरी ताकतों का मुख्य उद्देश्य भारत के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में अशांति फैलाकर आर्थिक स्थिरता को चोट पहुंचाना था। जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपियों ने प्रदर्शन से पहले ही इसकी जमीन तैयार कर ली थी। ये तीनों आरोपी 31 मार्च और एक अप्रैल को ही नोएडा आ गए थे। नौ और दस अप्रैल को उन्होंने विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में घूम-घूम कर क्यूआर कोड स्कैन करवाए। इन कोड्स के जरिए कई वॉट्सएप ग्रुप बनाए गए, जिनमें हजारों मजदूरों को जोड़ा गया। इन्हीं ग्रुप्स के माध्यम से भड़काऊ संदेश भेजकर मजदूरों को हिंसा के लिए उकसाया गया। आदित्य व उसके साथियों का इतिहास संदिग्ध पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक आदित्य 2020 से देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाले आंदोलनों को हिंसक मोड़ देने में सक्रिय था। दिल्ली में हुए सीएए-एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन में भी ये मौजूद थे। नोएडा पुलिस ने फरार आदित्य की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की हैं। वॉट्सएप ग्रुप के डेटा को भी खंगाल रही है, ताकि इस साजिश में शामिल अन्य चेहरों की पहचान की जा सके।

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