विधान परिषद की दो सीटों के लिए उपचुनाव की घोषणा:मंगल पांडेय की सीट से उपेंद्र कुशवाहा के बेटे का चुना जाना तय, जानिए 9 सीटों का फॉर्मूला

विधान परिषद की दो सीटों के लिए उपचुनाव की घोषणा:मंगल पांडेय की सीट से उपेंद्र कुशवाहा के बेटे का चुना जाना तय, जानिए 9 सीटों का फॉर्मूला

चुनाव आयोग की ओर से गुरुवार को मंगल पांडेय के विधायक बनने से खाली हुई विधान परिषद की एक सीट के लिए उपचुनाव की घोषणा कर दी गई। इस सीट पर 12 मई को वोटिंग होगी और उसी दिन रिजल्ट भी जारी होगा। इससे पहले राधा चरण शाह के विधायक बनने के बाद खाली हुई भोजपुर-सह बक्सर स्थानीय प्राधिकरण कोटे के सीट के लिए उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है। इस सीट के लिए भी 12 मई को ही वोटिंग होगी। चुनावी शर्त के लिहाज से बीजेपी के मंगल पांडेय की सीट पर उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश विधान परिषद जाएंगे। वे फिलहाल किसी सदन के सदस्य नहीं हैं और 2025 में बनी नीतीश सरकार में मंत्री थे। लोकसभा चुनाव के दौरान BJP की तरफ से उपेंद्र कुशवाहा को लिखित में सीट के लिए आश्वासन दिया गया था। ऐसे में इस सीट पर इनका चुना जाना तय माना जा रहा है। इस बार दो पूर्व MLC के बेटे के बीच मुकाबला RJD और JDU ने भोजपुर-बक्सर स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र, MLC सीट पर उपचुनाव के लिए अपने कैंडिडेट की घोषणा कर दी है। RJD की तरफ से पूर्व MLC लालदास राय के बेटे सोनू कुमार राय को प्रत्याशी बनाया गया है। दूसरी ओर जेडीयू ने राधाचरण साह के बेटे कन्हैया प्रसाद को जेडीयू ने उम्मीदवार बनाया है। यानी यहां इस बार दो पूर्व MLC के बेटे के बीच मुकाबला होगा। विधान परिषद की 12 सीटें हो रही खाली, इन सीटों का फॉर्मूला जानिए 28 जून 2026 को विधान परिषद की 9 सीटें खाली हो रही है। इनमें राजद की 2, जदयू की 3, कांग्रेस और बीजेपी की 1-1 सीट शामिल है। 2 सीटें पहले से खाली हैं। जून 2026 में राजद से मोहम्मद फारुक और सुनील कुमार सिंह, जदयू से गुलाम गौस, भीष्म सहनी और कुमुद वर्मा, बीजेपी से संजय मयूख और कांग्रेस से समीर कुमार सिंह का कार्यकाल पूरा होगा। इनके अलावा 2 सीट (बीजेपी के सम्राट चौधरी और जदयू के भगवान सिंह कुशवाहा की) पहले से ही खाली है। ये दोनों MLC रहते विधानसभा का चुनाव जीत गए थे। सम्राट चौधरी तारापुर तो भगवान सिंह कुशवाहा जगदीशपुर से विधायक बने थे। इन दोनों का कार्यकाल 28 जून 2026 को पूरा हो रहा था। इसके साथ ही विधान परिषद की 3 सीटों के लिए उप-चुनाव होना है। इसमें एक सीट नीतीश कुमार और दूसरी सीट बीजेपी नेता मंगल पांडेय की है। मंगल पांडेय विधायक बन गए हैं। वहीं, नीतीश कुमार ने राज्यसभा का चुनाव जीतने के बाद MLC पद से इस्तीफा दे दिया है। दोनों का कार्यकाल 2030 तक है। किसके हाथ लगेगी कितनी सीटें, जानिए अगर फॉर्मूले के लिहाज से देखें तो जदयू को 4, BJP को 3, RLM और RJD को 1-1 सीट मिल सकती है। इनके साथ LJP(R) का भी जून में विधान परिषद में खाता खुल सकता है। क्या है जीत का फॉर्मूला? कुल विधायकों की संख्या ÷ कुल सीटों की संख्या + वन। 243 ÷ 10 = 24.3 यानी कि 25 विधायक। अगर पूरे महागठबंधन को मिला दें तो 41 विधायक हैं। ऐसे में दूसरा प्रत्याशी उतारने के लिए उनके पास नंबर नहीं है। दो सीटों पर उप-चुनाव होने हैं। जिनके पास बहुमत होगा, वो जीतेगा। ऐसे में संभव है कि ये दोनों सीटें NDA के पास रहे। NDA को कितनी सीटों का फायदा होगा एनडीए को इस चुनाव में कम से कम 2 सीटों का फायदा हो सकता है। अभी महागठबंधन के पास 3 सीटें हैं। 2 राजद और 1 कांग्रेस के पास। इनमें राजद बस अपनी एक सीट बचा सकती है। अब NDA में देखें तो 9 सीटों में BJP के पास 2 और जदयू के हिस्से में 4 सीटें हैं। बीजेपी के 85 और जदयू के 80 विधायक हैं। यानी 3-3 सीटों पर इनकी जीत तय है। जदयू के हिस्से नीतीश कुमार वाली सीट भी आ रही है, यानी कि 12 सीटों में 4 सीट पर फिलहाल जदयू कैंडिडेट की जीत तय मानी जा रही है। चिराग की पार्टी का विधान परिषद में खुल सकता है खाता? राज्यसभा चुनाव के दौरान LJP(R) ने बिना शर्त के NDA को समर्थन दिया था। LJP(R) सूत्रों की मानें तो पार्टी अब विधान परिषद में एक सीट की डिमांड कर रही है। पार्टी के पास 19 विधायक हैं। इन्हें जीत के लिए 6 विधायक की जरूरत है। अपने 3 सदस्यों को जिताने के बाद भी BJP के 10 विधायक बचते हैं ऐसे में केवल BJP की मदद से ही LJP(R) की जीत संभव है। हालांकि, पार्टी के नेता फिलहाल विधान परिषद के चुनाव पर कुछ भी स्पष्ट बोलने के लिए राजी नहीं हो रहे हैं। सभी पार्टी नए चेहरों को दे सकते हैं मौका बीजेपी की तरफ से तीनों सीटों पर नया नाम जाना तय माना जा रहा है। मौजूदा MLC सम्राट चौधरी पहले ही विधायक बन चुके हैं। संजय मयूख का नाम बांकीपुर विधानसभा सीट के लिए चल रहा है। इनके साथ ही जदयू भी गुलाम गौस और भीषम सहनी की जगह नए चेहरे को मौका दे सकती है। दीपक प्रकाश और निशांत कुमार, दोनों ही युवा नेताओं की एंट्री उच्च सदन में हो रही है। राजद में राबड़ी के मुंहबोले भाई सुनिल सिंह का कार्यकाल पूरा हो रहा है। उनका दोबारा विधान परिषद जाना तय माना जा रहा है। चुनाव आयोग की ओर से गुरुवार को मंगल पांडेय के विधायक बनने से खाली हुई विधान परिषद की एक सीट के लिए उपचुनाव की घोषणा कर दी गई। इस सीट पर 12 मई को वोटिंग होगी और उसी दिन रिजल्ट भी जारी होगा। इससे पहले राधा चरण शाह के विधायक बनने के बाद खाली हुई भोजपुर-सह बक्सर स्थानीय प्राधिकरण कोटे के सीट के लिए उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है। इस सीट के लिए भी 12 मई को ही वोटिंग होगी। चुनावी शर्त के लिहाज से बीजेपी के मंगल पांडेय की सीट पर उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश विधान परिषद जाएंगे। वे फिलहाल किसी सदन के सदस्य नहीं हैं और 2025 में बनी नीतीश सरकार में मंत्री थे। लोकसभा चुनाव के दौरान BJP की तरफ से उपेंद्र कुशवाहा को लिखित में सीट के लिए आश्वासन दिया गया था। ऐसे में इस सीट पर इनका चुना जाना तय माना जा रहा है। इस बार दो पूर्व MLC के बेटे के बीच मुकाबला RJD और JDU ने भोजपुर-बक्सर स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र, MLC सीट पर उपचुनाव के लिए अपने कैंडिडेट की घोषणा कर दी है। RJD की तरफ से पूर्व MLC लालदास राय के बेटे सोनू कुमार राय को प्रत्याशी बनाया गया है। दूसरी ओर जेडीयू ने राधाचरण साह के बेटे कन्हैया प्रसाद को जेडीयू ने उम्मीदवार बनाया है। यानी यहां इस बार दो पूर्व MLC के बेटे के बीच मुकाबला होगा। विधान परिषद की 12 सीटें हो रही खाली, इन सीटों का फॉर्मूला जानिए 28 जून 2026 को विधान परिषद की 9 सीटें खाली हो रही है। इनमें राजद की 2, जदयू की 3, कांग्रेस और बीजेपी की 1-1 सीट शामिल है। 2 सीटें पहले से खाली हैं। जून 2026 में राजद से मोहम्मद फारुक और सुनील कुमार सिंह, जदयू से गुलाम गौस, भीष्म सहनी और कुमुद वर्मा, बीजेपी से संजय मयूख और कांग्रेस से समीर कुमार सिंह का कार्यकाल पूरा होगा। इनके अलावा 2 सीट (बीजेपी के सम्राट चौधरी और जदयू के भगवान सिंह कुशवाहा की) पहले से ही खाली है। ये दोनों MLC रहते विधानसभा का चुनाव जीत गए थे। सम्राट चौधरी तारापुर तो भगवान सिंह कुशवाहा जगदीशपुर से विधायक बने थे। इन दोनों का कार्यकाल 28 जून 2026 को पूरा हो रहा था। इसके साथ ही विधान परिषद की 3 सीटों के लिए उप-चुनाव होना है। इसमें एक सीट नीतीश कुमार और दूसरी सीट बीजेपी नेता मंगल पांडेय की है। मंगल पांडेय विधायक बन गए हैं। वहीं, नीतीश कुमार ने राज्यसभा का चुनाव जीतने के बाद MLC पद से इस्तीफा दे दिया है। दोनों का कार्यकाल 2030 तक है। किसके हाथ लगेगी कितनी सीटें, जानिए अगर फॉर्मूले के लिहाज से देखें तो जदयू को 4, BJP को 3, RLM और RJD को 1-1 सीट मिल सकती है। इनके साथ LJP(R) का भी जून में विधान परिषद में खाता खुल सकता है। क्या है जीत का फॉर्मूला? कुल विधायकों की संख्या ÷ कुल सीटों की संख्या + वन। 243 ÷ 10 = 24.3 यानी कि 25 विधायक। अगर पूरे महागठबंधन को मिला दें तो 41 विधायक हैं। ऐसे में दूसरा प्रत्याशी उतारने के लिए उनके पास नंबर नहीं है। दो सीटों पर उप-चुनाव होने हैं। जिनके पास बहुमत होगा, वो जीतेगा। ऐसे में संभव है कि ये दोनों सीटें NDA के पास रहे। NDA को कितनी सीटों का फायदा होगा एनडीए को इस चुनाव में कम से कम 2 सीटों का फायदा हो सकता है। अभी महागठबंधन के पास 3 सीटें हैं। 2 राजद और 1 कांग्रेस के पास। इनमें राजद बस अपनी एक सीट बचा सकती है। अब NDA में देखें तो 9 सीटों में BJP के पास 2 और जदयू के हिस्से में 4 सीटें हैं। बीजेपी के 85 और जदयू के 80 विधायक हैं। यानी 3-3 सीटों पर इनकी जीत तय है। जदयू के हिस्से नीतीश कुमार वाली सीट भी आ रही है, यानी कि 12 सीटों में 4 सीट पर फिलहाल जदयू कैंडिडेट की जीत तय मानी जा रही है। चिराग की पार्टी का विधान परिषद में खुल सकता है खाता? राज्यसभा चुनाव के दौरान LJP(R) ने बिना शर्त के NDA को समर्थन दिया था। LJP(R) सूत्रों की मानें तो पार्टी अब विधान परिषद में एक सीट की डिमांड कर रही है। पार्टी के पास 19 विधायक हैं। इन्हें जीत के लिए 6 विधायक की जरूरत है। अपने 3 सदस्यों को जिताने के बाद भी BJP के 10 विधायक बचते हैं ऐसे में केवल BJP की मदद से ही LJP(R) की जीत संभव है। हालांकि, पार्टी के नेता फिलहाल विधान परिषद के चुनाव पर कुछ भी स्पष्ट बोलने के लिए राजी नहीं हो रहे हैं। सभी पार्टी नए चेहरों को दे सकते हैं मौका बीजेपी की तरफ से तीनों सीटों पर नया नाम जाना तय माना जा रहा है। मौजूदा MLC सम्राट चौधरी पहले ही विधायक बन चुके हैं। संजय मयूख का नाम बांकीपुर विधानसभा सीट के लिए चल रहा है। इनके साथ ही जदयू भी गुलाम गौस और भीषम सहनी की जगह नए चेहरे को मौका दे सकती है। दीपक प्रकाश और निशांत कुमार, दोनों ही युवा नेताओं की एंट्री उच्च सदन में हो रही है। राजद में राबड़ी के मुंहबोले भाई सुनिल सिंह का कार्यकाल पूरा हो रहा है। उनका दोबारा विधान परिषद जाना तय माना जा रहा है।  

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