लखनऊ में सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में दो दिवसीय ग्रीष्मकालीन पादप विज्ञान महोत्सव 2026 का शुभारंभ हो गया हैं । इस आयोजन में देशभर के शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जहां विज्ञान और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। वैज्ञानिक एवं नवाचार अनुसंधान अकादमी के निदेशक प्रो. मनोज कुमार धर ने मुख्य अतिथि के रूप में दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का उद्घाटन किया। एनबीआरआई के निदेशक डॉ. अजीत कुमार शासनी ने अतिथियों का स्वागत किया। यह महोत्सव वर्ष 2018 से किया जा रहा डॉ. शासनी ने बताया कि यह महोत्सव वर्ष 2018 से लगातार आयोजित किया जा रहा है और इसका संचालन शोधार्थियों द्वारा ही किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि यह आयोजन 13 अप्रैल 1953 की ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में किया जाता है, जब राष्ट्रीय वनस्पति उद्यान को वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद की छठी राष्ट्रीय प्रयोगशाला के रूप में मान्यता मिली थी। महोत्सव का मुख्य उद्देश्य युवा वैज्ञानिकों की प्रतिभा को मंच प्रदान करना और उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना है। समारोह में अयोध्या के गुरुकुल गुरुकृपा विद्यापीठ के विद्यार्थियों ने वैदिक मंत्रोच्चार कर पारंपरिक वातावरण निर्मित किया, जिससे कार्यक्रम में आध्यात्मिक रंग भी जुड़ गया और सभी का ध्यान आकर्षित हुआ। ट्रेजर हंट जैसी विभिन्न गतिविधियां शामिल रही महोत्सव की समन्वयक डॉ. पूनम सी. सिंह ने जानकारी दी कि इस वर्ष लगभग 200 शोधार्थी इसमें भाग ले रहे हैं। इसमें 19 मौखिक और 32 पोस्टर प्रस्तुतियों के साथ-साथ क्विज, पेंटिंग, डिजिटल फोटोग्राफी और ट्रेजर हंट जैसी विभिन्न गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। अपने संबोधन में प्रो.धर ने शोध और जिज्ञासा को सत्य की खोज का आधार बताया। उन्होंने कहा कि पौधे भले ही बोलते न हों, लेकिन वे जीवित होते हैं और अपने वातावरण के प्रति प्रतिक्रिया करते हैं। इसलिए उन्हें एक सक्रिय जीवन रूप के रूप में समझना आवश्यक है।अपने मुख्य व्याख्यान में प्रो. धर ने ‘केसर का वैज्ञानिक विश्लेषण’ विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने केसर की खेती, इसकी उच्च लागत, जैविक विशेषताओं और इसके औषधीय व आर्थिक महत्व को सरल शब्दों में समझाया। इस दो दिवसीय महोत्सव का समापन 16 अप्रैल को होगा।


