Noida Protest पर Rahul Gandhi का PM Modi पर हमला, मित्रों पर नहीं, मजदूरों पर महंगाई की मार

Noida Protest पर Rahul Gandhi का PM Modi पर हमला, मित्रों पर नहीं, मजदूरों पर महंगाई की मार
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे कारखाना श्रमिकों का समर्थन किया। कांग्रेस सांसद ने कहा कि सोमवार को नोएडा में जो हुआ वह देश के श्रमिकों की अंतिम पुकार थी। नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन भड़क उठे। प्रदर्शन के कुछ हिस्सों में हिंसा भड़की और आगजनी व तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं, जिसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लाया। राहुल ने श्रमिकों की मांग का समर्थन करते हुए ट्विटर पर एक लंबा पोस्ट लिखा, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार द्वारा उनकी मांगों को नजरअंदाज करने की कड़ी आलोचना की।

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राहुल ने लिखा कि कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो इस देश के श्रमिकों की आख़िरी चीख़ थी – जिसकी हर आवाज़ को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया। नोएडा में काम करने वाले एक मज़दूर की ₹12,000 महीने की तनख्वाह,₹4,000-7,000 किराया। जब तक ₹300 की सालाना बढ़ोतरी मिलती है, मकान मालिक ₹500 सालाना किराया बढ़ा देता है।  तनख्वाह बढ़ने तक ये बेलगाम महंगाई ज़िंदगी का गला घोंट देती है, कर्ज़ की गहराई में डुबा देती है – यही है विकसित भारत का सच। एक महिला मज़दूर ने कहा गैस के दाम बढ़ते हैं, पर हमारी तनख्वाह नहीं।” इन लोगों ने शायद इस गैस संकट के दौरान अपने घर का चूल्हा जलाने के लिए ₹5000 का भी सिलेंडर खरीदा होगा। यह सिर्फ़ नोएडा की बात नहीं है। और यह सिर्फ़ भारत की भी बात नहीं है। दुनियाभर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं – पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से सप्लाई चेन टूट गई है। 

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मगर, अमेरिका के टैरिफ़ वॉर, वैश्विक महंगाई, टूटती सप्लाई चेन – इसका बोझ Modi जी के “मित्र” उद्योगपतियों पर नहीं पड़ा। इसकी सबसे बड़ी मार पड़ी है उस मज़दूर पर जो दिहाड़ी कमाता है, तभी रोज़ खाता है। वो मज़दूर, जो किसी युद्ध का हिस्सा नहीं, जिसने कोई नीति नहीं बनाई – जिसने बस काम किया। चुपचाप। बिना शिकायत। और उसके बदले अपना हक मांगने पर उन्हें मिलता क्या है? दबाव और अत्याचार। एक और ज़रूरी मुद्दा – मोदी सरकार ने 4 लेबर कोड जल्दबाज़ी में बिना संवाद नवंबर, 2025 से लागू कर, काम का समय 12 घंटे तक बढ़ा दिया। जो मज़दूर हर रोज़ 12-12 घंटे खड़े होकर काम करता है फिर भी बच्चों की स्कूल फ़ीस क़र्ज़ लेकर भरता है – क्या उसकी मांग ग़ैरवाजिब है? और जो उसका हक़ हर रोज़ मार रहा है – वो “विकास” कर रहा है? नोएडा का मज़दूर ₹20,000 माँग रहा है। यह कोई लालच नहीं – यह उसका अधिकार, उसकी जिंदगी का एकमात्र आधार है। मैं हर उस मज़दूर के साथ हूं – जो इस देश की रीढ़ है और जिसे इस सरकार ने बोझ समझ लिया है।

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