सहरसा के सदर अस्पताल परिसर में अग्निशमन विभाग ने ‘अग्निशमन सेवा सप्ताह’ के तहत एक जागरूकता कार्यक्रम और मॉक ड्रिल का आयोजन किया। इस दौरान अस्पताल के डॉक्टरों, कर्मचारियों और आम लोगों को आग से बचाव के तरीके सिखाए गए। कार्यक्रम में सदर अस्पताल के सभी कर्मी और अधिकारी उपस्थित रहे। मॉक ड्रिल के दौरान अग्निशमन टीम ने व्यावहारिक प्रदर्शन करते हुए बताया कि आग लगने की स्थिति में घबराए बिना उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके आग पर कैसे काबू पाया जा सकता है। टीम ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘अग्निशमन सेवा सप्ताह’ का मुख्य उद्देश्य कारखानों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और तेल डिपो जैसे संवेदनशील स्थानों पर नागरिकों को अग्निकांडों की रोकथाम और उनसे होने वाले नुकसान से बचाव के लिए जागरूक और प्रशिक्षित करना है। ‘अग्निशमन सेवा सप्ताह’ के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला इस अवसर पर सहरसा अनुमंडल के सहायक अग्निशमन पदाधिकारी मनोज कुमार ने ‘अग्निशमन सेवा सप्ताह’ के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 14 अप्रैल 1944 को बंबई (अब मुंबई) के विक्टोरिया डॉक में सेना की विस्फोटक सामग्री से भरे एक जहाज में भीषण आग लग गई थी। इस आग पर काबू पाने और लोगों की जान बचाने के प्रयास में बंबई फायर सर्विस के अधिकारी और कर्मचारी भेजे गए थे। इस साहसिक अभियान में 66 फायरमैन शहीद हो गए थे। उन्हीं जांबाज शहीद अग्निशमन कर्मचारियों को श्रद्धांजलि देने के लिए प्रतिवर्ष 14 अप्रैल को ‘अग्निशमन सेवा दिवस’ और 14 से 20 अप्रैल तक ‘अग्निशमन सेवा सप्ताह’ मनाया जाता है। मौके पर मौजूद रहे अधिकारी इस जागरूकता कार्यक्रम में सदर अस्पताल के कर्मचारियों के अतिरिक्त अग्निशमन विभाग से सहायक अग्निशमन पदाधिकारी मनोज कुमार, निरंजन कुमार, धीरज कुमार, अशोक कुमार, प्रदीप तिवारी, प्रधान अग्निक रवि प्रसाद, अग्नि चालक राजेश रंजन, अग्निक अंकुल कुमार, राहुल कुमार, अमित कुमार साह, रवि कुमार, मिथलेश सिंह, शबनम कुमारी, स्मृति सुमन, बिट्टू कुमार और राम कुमार प्रमुख रूप से उपस्थित थे। सहरसा के सदर अस्पताल परिसर में अग्निशमन विभाग ने ‘अग्निशमन सेवा सप्ताह’ के तहत एक जागरूकता कार्यक्रम और मॉक ड्रिल का आयोजन किया। इस दौरान अस्पताल के डॉक्टरों, कर्मचारियों और आम लोगों को आग से बचाव के तरीके सिखाए गए। कार्यक्रम में सदर अस्पताल के सभी कर्मी और अधिकारी उपस्थित रहे। मॉक ड्रिल के दौरान अग्निशमन टीम ने व्यावहारिक प्रदर्शन करते हुए बताया कि आग लगने की स्थिति में घबराए बिना उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके आग पर कैसे काबू पाया जा सकता है। टीम ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘अग्निशमन सेवा सप्ताह’ का मुख्य उद्देश्य कारखानों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और तेल डिपो जैसे संवेदनशील स्थानों पर नागरिकों को अग्निकांडों की रोकथाम और उनसे होने वाले नुकसान से बचाव के लिए जागरूक और प्रशिक्षित करना है। ‘अग्निशमन सेवा सप्ताह’ के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला इस अवसर पर सहरसा अनुमंडल के सहायक अग्निशमन पदाधिकारी मनोज कुमार ने ‘अग्निशमन सेवा सप्ताह’ के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 14 अप्रैल 1944 को बंबई (अब मुंबई) के विक्टोरिया डॉक में सेना की विस्फोटक सामग्री से भरे एक जहाज में भीषण आग लग गई थी। इस आग पर काबू पाने और लोगों की जान बचाने के प्रयास में बंबई फायर सर्विस के अधिकारी और कर्मचारी भेजे गए थे। इस साहसिक अभियान में 66 फायरमैन शहीद हो गए थे। उन्हीं जांबाज शहीद अग्निशमन कर्मचारियों को श्रद्धांजलि देने के लिए प्रतिवर्ष 14 अप्रैल को ‘अग्निशमन सेवा दिवस’ और 14 से 20 अप्रैल तक ‘अग्निशमन सेवा सप्ताह’ मनाया जाता है। मौके पर मौजूद रहे अधिकारी इस जागरूकता कार्यक्रम में सदर अस्पताल के कर्मचारियों के अतिरिक्त अग्निशमन विभाग से सहायक अग्निशमन पदाधिकारी मनोज कुमार, निरंजन कुमार, धीरज कुमार, अशोक कुमार, प्रदीप तिवारी, प्रधान अग्निक रवि प्रसाद, अग्नि चालक राजेश रंजन, अग्निक अंकुल कुमार, राहुल कुमार, अमित कुमार साह, रवि कुमार, मिथलेश सिंह, शबनम कुमारी, स्मृति सुमन, बिट्टू कुमार और राम कुमार प्रमुख रूप से उपस्थित थे।


