‘माफी नहीं मांगूंगा’ एकनाथ शिंदे को लेकर विधानसभा कमेटी के सामने कुणाल कामरा के कड़े तेवर

‘माफी नहीं मांगूंगा’ एकनाथ शिंदे को लेकर विधानसभा कमेटी के सामने कुणाल कामरा के कड़े तेवर

Kunal Kamra says not sorry for Eknath Shinde: अपनी धारदार और विवादित कॉमेडी के लिए मशहूर कुणाल कामरा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। गुरुवार को वे महाराष्ट्र विधानसभा की विशेषाधिकार हनन कमेटी के सामने पेश हुए। मामला महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर की गई उनकी एक टिप्पणी से जुड़ा है। कमेटी के सामने हुई पूछताछ में कामरा ने जो रुख अपनाया, उसने इस विवाद को और हवा दे दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया कि वे अपने बयान के लिए माफी नहीं मांगेंगे और उन्हें इस पर कोई पछतावा नहीं है।

कुणाल कामरा का एकनाथ शिंदे पर बयान (Kunal Kamra says not sorry for Eknath Shinde)

विशेषाधिकार हनन कमेटी के अध्यक्ष प्रसाद लाड ने बताया कि पूछताछ के दौरान कुणाल कामरा से करीब 24 सवाल पूछे गए। जब कमेटी ने उनसे पूछा कि क्या उन्हें अपनी टिप्पणी पर दुख है या वे माफी मांगना चाहते हैं, तो कामरा का जवाब ‘ना’ में था। कामरा का तर्क था कि अगर वे दबाव में आकर या औपचारिकता के लिए माफी मांगते हैं, तो वह ‘सच्ची माफी’ नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह झुकने से कलाकारों की अभिव्यक्ति की आजादी (Freedom of Speech) पर गलत असर पड़ेगा।

Kunal Kamra says not sorry for Eknath Shinde

सोशल मीडिया पर भी रहे अड़े

कमेटी के सामने पेश होने के बाद कुणाल कामरा ने सोशल मीडिया का रुख किया और वहां भी अपने स्टैंड को दोहराया। उन्होंने लिखा कि वे अपने शब्दों पर कायम हैं और किसी भी तरह की झूठी या औपचारिक माफी मांगने के पक्ष में नहीं हैं। कामरा के इस कड़े रुख ने कमेटी के सदस्यों को भी हैरान कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद भाजपा के विधान परिषद सदस्य प्रवीण दरेकर की एक शिकायत के बाद शुरू हुआ। उन्होंने कामरा के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी करने की मांग की थी, जिसके बाद विधानसभा ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया।

कमेटी ने कामरा को यह विकल्प भी दिया कि अगर वे ‘बिना शर्त माफी’ मांग लेते हैं, तो मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता है और इसे खत्म किया जा सकता है। हालांकि, कामरा के वकील ने कहा कि वे इस प्रस्ताव पर अपने मुवक्किल से चर्चा करेंगे और जल्द ही ईमेल के जरिए अपना अंतिम लिखित जवाब देंगे।

अभिव्यक्ति की आजादी बनाम मर्यादा

यह मामला एक बार फिर उस बहस को जन्म दे रहा है कि हास्य और व्यंग्य की सीमा कहां खत्म होती है और राजनीतिक मर्यादा कहां शुरू होती है। कुणाल कामरा पहले भी कई बार सत्ता पक्ष के निशाने पर रहे हैं, लेकिन विधानसभा कमेटी के सामने इस तरह का सख्त रुख अपनाना उनके लिए कानूनी मुश्किलें बढ़ा सकता है। अब सबकी नजरें कमेटी के अगले कदम और कामरा के लिखित जवाब पर टिकी हैं।

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