बूंदी। जिले के ग्रामीण इलाके में रहने वाली एक किशोरी ने खुद का विवाह रुकवाने के लिए की एडीएम से गुहार लगाई है। उसने बताया कि ‘उसके परिजनों ने लड़के वालों से 4 लाख रुपए लेकर 20 अप्रेल को विवाह करना तय किया है, लेकिन वह अभी पढ़ना चाहती है, वह कक्षा 10वीं में अध्ययनरत है। उसने बताया कि वह शादी के डर से घर तक नहीं जाना चाह रही।’ ऐसे में उसने जिला प्रशासन से शादी रुकवाने की गुहार लगाई है।
किशोरी की तरफ से लगाई गई गुहार के बाद सूचना मिलते ही चाइल्ड लाइन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और किशोरी को बाल कल्याण समिति के अधीन आश्रय गृह में भेज दिया है। बीते दो माह में किशोरी द्वारा स्वयं जागरूक होकर खुद का बाल विवाह रुकवाने का दूसरा मामला है। इससे पहले तालेड़ा क्षेत्र में भी एक नाबालिग ने यह साहसी कदम उठाया था।
कलक्ट्रेट पहुंच लगाई न्याय की गुहार
नाबालिग ने बताया कि माता-पिता और अन्य शादी कराने पर अड़े हुए हैं। शादी की तैयारी घर में शुरू भी हो गई। जब इस बारे में उसे पता लगा कि उसकी शादी की चर्चा घर में होने लगी है और उसकी तारीख 20 अप्रेल तय की गई है तो उसने घर से निकलकर शनिवार सुबह कलक्ट्रेट पहुंची और न्याय की गुहार लगाई है।
घर से अलग रखी गई लड़की
हालांकि, किशोरी को अब बाल कल्याण विभाग के अधीन आश्रय गृह में रखा गया है। जिला प्रशासन किशोरी का बाल विवाह रुकवाने में जुट गया है। लड़की को घर से अलग कर दिया गया है। आगे की कार्यवाही में प्रशासन जुट गया है।
काउंसलिंग कराएंगे
‘प्रकरण में 20 अप्रेल से पूर्व विधिसम्मत निषेधाज्ञा आदेश जारी कराने की कार्यवाही की जाएगी, ताकि पुनः बाल विवाह का प्रयास न हो। साथ ही परिवारजनों की काउंसलिंग एवं समझाइश कर नाबालिग की शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया जाएगा।’ -सीमा पौद्दार, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति, बूंदी


