राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने शनिवार को प्रदेश की सबसे बड़ी पुलिस भर्ती परीक्षाओं में से एक, SI भर्ती-2021 को पूरी तरह रद्द करने के आदेश दिए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा की खंडपीठ ने एकलपीठ द्वारा 28 अगस्त 2025 को सुनाए गए फैसले को सही मानते हुए सरकार और चयनित अभ्यर्थियों की अपीलों को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने माना कि परीक्षा में बड़े पैमाने पर पेपरलीक, धांधली और अनियमितताएं हुई थीं, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया की शुचिता भंग हो गई थी।
कानूनी लड़ाई का पूरा घटनाक्रम: कब क्या हुआ?
यह मामला पिछले कई महीनों से कानूनी दांव-पेच में फंसा हुआ था:
- 28 अगस्त 2025: हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अनियमितताओं के चलते पूरी भर्ती को रद्द करने का आदेश दिया।
- 8 सितंबर 2025: खंडपीठ ने अंतरिम आदेश देते हुए एकलपीठ के फैसले पर रोक लगा दी, जिससे चयनितों को राहत मिली थी।
- 24 सितंबर 2025: मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का आदेश देते हुए चयनितों की फील्ड पोस्टिंग पर रोक लगा दी।
- 19 जनवरी 2026: खंडपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
- 4 अप्रैल 2026: आज खंडपीठ ने अंतिम फैसला सुनाते हुए भर्ती को पूरी तरह रद्द कर दिया।
कोर्ट की टिप्पणी: ‘धांधली के आगे प्रतिभा की हार नहीं हो सकती’
एक्टिंग सीजे की खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जब परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हों और जांच में पेपरलीक के पुख्ता प्रमाण मिलें, तो पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करना ही एकमात्र विकल्प बचता है। कोर्ट ने एकलपीठ के उस तर्क को सही माना जिसमें कहा गया था कि ‘दूषित’ चयन प्रक्रिया से ईमानदार अभ्यर्थियों का हक मारा गया है।
अभ्यर्थियों के लिए राहत: आयु सीमा में मिलेगी छूट
भर्ती रद्द होने से हजारों अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है, लेकिन कोर्ट ने उनके हितों का ध्यान रखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जब भी यह परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी, तब उन सभी अभ्यर्थियों को आयु सीमा (Age Limit) में छूट दी जाएगी जो इस भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा थे। इससे उन युवाओं को दोबारा मौका मिल सकेगा जो इस लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान ओवर-एज हो गए थे।
राजस्थान पुलिस और सरकार के लिए बड़ी चुनौती
इस फैसले के बाद अब राज्य सरकार और राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के सामने नई परीक्षा आयोजित करने की बड़ी चुनौती है।
- पदों की रिक्तता: 800 से अधिक पदों पर होने वाली इस भर्ती के रद्द होने से थानों में अधिकारियों की कमी बरकरार रहेगी।
- ईमानदारी की परीक्षा: अब सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि आगामी परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी और पेपरलीक प्रूफ हो, ताकि युवाओं का भरोसा बहाल हो सके।
युवाओं और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर दो फाड़ नजर आ रहे हैं। एक तरफ वे अभ्यर्थी हैं जो सालों की मेहनत के बाद चयनित हुए थे और अब सड़क पर आ गए हैं, वहीं दूसरी तरफ वे बेरोजगार युवा हैं जो पेपरलीक माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे।


