सिटी रिपोर्टर | गोपालगंज खरीफ सीजन से सूखे, अधूरी सिंचाई व्यवस्था और पंपसेट पर निर्भरता से जूझ रहे किसानों को राहत मिलने जा रही है। नहर प्रमंडल द्वारा तैयार किया गया व्यापक ब्लू प्रिंट जिले की कृषि तस्वीर बदलने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है। योजनाबद्ध तरीके से नहरों का पक्कीकरण किया जा रहा है। इससे जल रिसाव पर रोक लगेगी और टेल एंड तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य साकार होगा। खास बात यह है कि करीब 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और शेष काम 31 मई तक खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में जून से शुरू होने वाले खरीफ सीजन में हर खेत तक पानी पहुंचाने की तैयारी लगभग पूरी मानी जा रही है।अब तक सिंचाई की सीमित व्यवस्था के कारण किसान बारिश पर निर्भर रहते थे या फिर महंगे पंपसेट के जरिए सिंचाई करते थे। लेकिन नहरों के दुरुस्तीकरण और एकीकृत सिंचाई व्यवस्था के लागू होने से खेती की लागत घटेगी और उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। इससे किसानों की आय में सीधा इजाफा होगा। नहरों की मजबूती से बदलेगी तस्वीर जिले में 52 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर, 2.74 किलोमीटर शाखा कैनाल और 62 वितरणियों का पक्कीकरण किया जा रहा है। इस बड़े स्तर के काम से नहरों की क्षमता बढ़ेगी और पानी की बर्बादी रुकेगी। कार्यपालक अभियंता दिलीप कुमार के अनुसार, पक्कीकरण के बाद पानी अंतिम छोर तक पहुंचेगा, जिससे उन किसानों को भी लाभ मिलेगा जो अब तक सिंचाई से वंचित रहे हैं। किसानों को मिलेगा बड़ा सहारा जून से धान सहित अन्य खरीफ फसलों की बुआई शुरू होते ही किसानों को पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होगा। साथ ही, डीजल और बिजली से चलने वाले पंपसेट पर निर्भरता कम होने से किसानों का खर्च भी घटेगा। बड़ी चुनौती, उम्मीद मजबूत जिले में 1 लाख 63 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि खेती योग्य है, लेकिन करीब 64 हजार हेक्टेयर क्षेत्र अब भी असिंचित है। वर्तमान में नहरों से केवल 35 हजार हेक्टेयर तक ही पानी पहुंच पाता है। नलकूप और पंपसेट के सहारे सिंचाई का दायरा बढ़ाया जाता है, फिर भी यह पर्याप्त नहीं है। नई सिंचाई योजनाएं किसानों के लिए बड़ी उम्मीग साबित हो सकती हैं। सिटी रिपोर्टर | गोपालगंज खरीफ सीजन से सूखे, अधूरी सिंचाई व्यवस्था और पंपसेट पर निर्भरता से जूझ रहे किसानों को राहत मिलने जा रही है। नहर प्रमंडल द्वारा तैयार किया गया व्यापक ब्लू प्रिंट जिले की कृषि तस्वीर बदलने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है। योजनाबद्ध तरीके से नहरों का पक्कीकरण किया जा रहा है। इससे जल रिसाव पर रोक लगेगी और टेल एंड तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य साकार होगा। खास बात यह है कि करीब 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और शेष काम 31 मई तक खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में जून से शुरू होने वाले खरीफ सीजन में हर खेत तक पानी पहुंचाने की तैयारी लगभग पूरी मानी जा रही है।अब तक सिंचाई की सीमित व्यवस्था के कारण किसान बारिश पर निर्भर रहते थे या फिर महंगे पंपसेट के जरिए सिंचाई करते थे। लेकिन नहरों के दुरुस्तीकरण और एकीकृत सिंचाई व्यवस्था के लागू होने से खेती की लागत घटेगी और उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। इससे किसानों की आय में सीधा इजाफा होगा। नहरों की मजबूती से बदलेगी तस्वीर जिले में 52 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर, 2.74 किलोमीटर शाखा कैनाल और 62 वितरणियों का पक्कीकरण किया जा रहा है। इस बड़े स्तर के काम से नहरों की क्षमता बढ़ेगी और पानी की बर्बादी रुकेगी। कार्यपालक अभियंता दिलीप कुमार के अनुसार, पक्कीकरण के बाद पानी अंतिम छोर तक पहुंचेगा, जिससे उन किसानों को भी लाभ मिलेगा जो अब तक सिंचाई से वंचित रहे हैं। किसानों को मिलेगा बड़ा सहारा जून से धान सहित अन्य खरीफ फसलों की बुआई शुरू होते ही किसानों को पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होगा। साथ ही, डीजल और बिजली से चलने वाले पंपसेट पर निर्भरता कम होने से किसानों का खर्च भी घटेगा। बड़ी चुनौती, उम्मीद मजबूत जिले में 1 लाख 63 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि खेती योग्य है, लेकिन करीब 64 हजार हेक्टेयर क्षेत्र अब भी असिंचित है। वर्तमान में नहरों से केवल 35 हजार हेक्टेयर तक ही पानी पहुंच पाता है। नलकूप और पंपसेट के सहारे सिंचाई का दायरा बढ़ाया जाता है, फिर भी यह पर्याप्त नहीं है। नई सिंचाई योजनाएं किसानों के लिए बड़ी उम्मीग साबित हो सकती हैं।


