पानीपत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप सिंह की अदालत ने हरियाणा आबकारी एवं कराधान विभाग में हुए करोड़ों रुपए के कथित ‘सी-फॉर्म’ घोटाले में नामजद तत्कालीन आबकारी एवं कराधान अधिकारी (ETO) दिविक शर्मा और उनके सह-आरोपी गोविंद को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और साजिश के आरोपों को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। क्या था पूरा मामला? यह मामला साल 2019 में दर्ज हुआ था, जिसमें आरोप था कि M/s पारस एंटरप्राइजेज नाम की एक फर्जी फर्म बनाई गई। आरोप था कि इस फर्म ने साल 2016-17 और 2017-18 के दौरान बिना किसी वास्तविक खरीद-बिक्री के 155.2 करोड़ रुपए के ‘C-Form’ जारी करवा लिए। इसके जरिए करीब 17.33 करोड़ रुपए के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का फर्जी दावा कर सरकारी खजाने को चूना लगाने का आरोप लगाया गया था। कोर्ट में पलटा मामला, ETO निकले ‘व्हिसलब्लोअर’ सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि ETO दिविक शर्मा को बलि का बकरा बनाया गया है। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर महत्वपूर्ण बातें नोट कीं। जिनमें यह सामने आया कि आरोपी अधिकारी दिविक शर्मा ने ही सबसे पहले इस गड़बड़ी को पकड़ा था और उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर FIR दर्ज करने व फर्म का लाभ रोकने की सिफारिश की थी। जांच में पाया गया कि जिस वक्त फर्म का रजिस्ट्रेशन हुआ, उस समय वह भौतिक रूप से अस्तित्व में थी, इसलिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में कोई धोखाधड़ी साबित नहीं हुई। विभाग यह साबित नहीं कर पाया कि फर्जी फॉर्म किस IP एड्रेस या कंप्यूटर से जारी हुए थे। साथ ही, डिजिटल सिग्नेचर के पासवर्ड सभी अधिकारियों के लिए समान थे, जिनका दुरुपयोग संभव था। भ्रष्टाचार के सबूत नहीं मिले अदालत ने पाया कि पुलिस अधिकारी (DCP Crime) ने स्वीकार किया कि आरोपी दिविक शर्मा से किसी प्रकार की कोई बरामदगी नहीं हुई है। अधिकारी द्वारा खरीदी गई एक प्लॉट की जानकारी पहले ही विभाग को दी गई थी, जो उनकी पत्नी की आय और बैंक लोन से खरीदी गई थी। दूसरे आरोपी गोविंद के पास से बरामद गाड़ी या नकदी का संबंध ‘सी-फॉर्म’ घोटाले से जोड़ने में भी पुलिस नाकाम रही। न्यायालय का फैसला न्यायाधीश संदीप सिंह ने अपने 26 पन्नों के फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के बीच किसी भी प्रकार की मिलीभगत या रिश्वत के लेन-देन को साबित नहीं कर सका। अदालत ने ‘ब्लैकस्टोन रेशियो’ का हवाला देते हुए कहा कि चाहे दस गुनहगार छूट जाएं, लेकिन एक निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए। इसी के साथ कोर्ट ने दिविक शर्मा और गोविंद को सभी आरोपों से बरी करते हुए उनके जमानत बांड रद्द करने के आदेश जारी किए ।


