सहारनपुर में 26 साल बाद जमानत पर रिहाई के आदेश:कोर्ट बोला–एक अपराध में दो बार सजा नहींदी जा सकती, पहले काट चुका उम्र कैद की सजा

सहारनपुर में 26 साल बाद जमानत पर रिहाई के आदेश:कोर्ट बोला–एक अपराध में दो बार सजा नहींदी जा सकती, पहले काट चुका उम्र कैद की सजा

सहारनपुर में करीब 26 साल पुराने बहुचर्चित हत्या कांड में कोर्ट ने दोषी देवेंद्र उर्फ भालू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर पांच हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। हालांकि, मामले में पहले ही सजा काट चुके दोषी को अदालत ने संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए निजी मुचलके पर रिहा करने के आदेश भी दिए हैं। जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता दीपक सैनी ने बताया कि थाना बड़गांव में 23 अक्तूबर 1999 को यशवीर सिंह ने तहरीर देकर देवेंद्र उर्फ भालू पर अपनी पत्नी सुनीता की हत्या करने और बेटे अंकित उर्फ राहुल को लेकर फरार होने का आरोप लगाया था। इसी मामले में दूसरी तहरीर यशपाल सिंह ने दी थी। तहरीर के मुताबिक, 22 अक्तूबर 1999 को यशपाल अपनी बहन सुनीता और जयवती के गांव मोरा आया था। रात में जब वह बहन सुनीता के घर पहुंचा तो वहां उसका बहनोई देवेंद्र उर्फ भालू अपने भाइयों भीष्म, नीटू, राजू और मुकेश के साथ शराब पीते हुए हंगामा कर रहा था। आरोप है कि सभी सुनीता के साथ अभद्रता कर रहे थे। विरोध करने पर आरोपियों ने यशपाल के साथ मारपीट शुरू कर दी। इसके बाद वह अपने दूसरे बहनोई सुखपाल को लेकर वापस पहुंचा, लेकिन आरोपियों ने उनके साथ भी झगड़ा किया और जान से मारने की धमकी दी। डर के कारण वे वहां से लौट आए। अगली सुबह सूचना मिली कि सुनीता की हत्या कर दी गई है और उसके बेटे अंकित उर्फ राहुल को गायब कर दिया गया है। पुलिस ने जांच शुरू की और 26 अक्तूबर 1999 को गांव के तालाब से बच्चे का शव बरामद किया। इसके बाद मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश, कक्ष संख्या-3 की अदालत में हुई, जहां बेटे अंकित उर्फ राहुल की हत्या के आरोप में देवेंद्र उर्फ भालू को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई। दो बार हाईकोर्ट पहुंचा मामला अदालत ने 25 मई 2003 को पहली बार देवेंद्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद उसने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील की। उच्च न्यायालय ने सुनवाई के बाद निचली अदालत का फैसला निरस्त कर पुनः सुनवाई के आदेश दिए। इसके बाद 16 अगस्त 2006 को जिला सत्र अदालत ने फिर से उसे सजा सुनाई। इस फैसले के खिलाफ भी देवेंद्र ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि आरोपी को अंकित उर्फ राहुल की हत्या के आरोप में उचित अवसर दिए बिना ही दोषी ठहरा दिया गया था, जिससे उसके बचाव के अधिकार का हनन हुआ। इसके बाद मामले में 29 सितंबर 2025 को दोबारा आरोप पत्र दाखिल किया गया। एक अपराध में दो बार सजा नहीं ताजा सुनवाई में अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 20(2) के तहत किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए दो बार न तो मुकदमा चलाया जा सकता है और न ही सजा दी जा सकती है। अदालत ने माना कि सुनीता और अंकित उर्फ राहुल की हत्या एक ही घटना और एक ही अपराध संख्या से जुड़ी है। चूंकि देवेंद्र उर्फ भालू इस मामले में पहले ही आजीवन कारावास की सजा काट चुका है और जेल में उसका आचरण भी संतोषजनक पाया गया, इसलिए अदालत ने उसे 50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।

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