इंदौर में 8 मौतों की एक और दर्दनाक दास्तां, अपने ही घर में रास्ता भटक गए थे बच्चे

इंदौर में 8 मौतों की एक और दर्दनाक दास्तां, अपने ही घर में रास्ता भटक गए थे बच्चे

Indore- इन्दौर में कारोबारी मनोज पुगलिया के बृजेश्वरी एनेक्स स्थित घर में हुए भीषण अग्निकांड में आठ लोगों की मौत मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आ गई है। इसमें खुलासा हुआ कि मौतें करंट से नहींं बल्कि दम घुटने व आग मेंं झुलसने से हुई। इस आग का शिकार मनोज, बहू सिमरन और बिहार से आए उनके साले विजय सेठिया का परिवार हो गया था। तिलकनगर टीआइ मनीष लोधा ने बताया, सभी की पीएम रिपोर्ट में मौत का कारण धुएं से दम घुटना और आग से झुलसना निकला है। हादसे का दुखद पहलू यह है कि छोटे बच्चे अपने ही घर का रास्ता भटक गए और विलंब की वजह से उनकी सांसें थमती गईं।

हादसे की सबसे विचलित करने वाली तस्वीर छह वर्षीय तनय जैन की है। रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि तनय का पूरा शव बरामद नहीं हो सका। उसका कुछ हिस्सा जलकर नष्ट हो गया। रेस्क्यू टीम को शव के अवशेष के साथ छोटा सा फोम का टुकड़ा भी मिला।

मामले मेंं पश्चिमी क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी व इलेकि्ट्रक सेफ़्टी विभाग भी जांच कर रहा है। कंपनी पोल से मीटर तक जांच रही है, सेफ़्टी विभाग घर के अंदर। कंपनी ने जांच पूरी कर ली है, वहीं सेफ़्टी विभाग की जांच चल रही है। कंपनी के कार्यपालन यंत्री डीके तिवारी ने बताया, हमने पोल, स्मार्ट मीटर और ट्रांसफॉर्मर की जांच की। ट्रांसफॉर्मर व पोल में कोई फॉल्ट नहीं हुआ। रात में ईवी चार्ज करने की पुष्टि हुई है।

सेफ़्टी विभाग के इंस्पेक्टर अभिमन्यू साहू ने बताया कि घर में कोई फॉल्ट की जानकारी सामने नहीं आई। सब कुछ जल जाने
से किसी नतीजे पर पहुंचना मुश्किल लग रहा है। सबसे ज्यादा किचन ही जला है। तिलकनगर Tilaknagar टीआइ मनीष लोधा का कहना है, मकान में आग लगने के बाद बिजली केबल की भी जांच की जा रही है।

बचने को किया संघर्ष, गर्म गेट व चैनल से रुके

ग्राउंड फ़्लोर : नीचे के कमरे में विजय और उनकी पत्नी फंस गए थे। बाहर निकलने का मुख्य दरवाजा लोहे का था, जो आग में तपकर लाल हो गया था। दपंती उसे खोल नहीं पाए और अंदर ही झुलस गए। लोहे का गेट लॉक होने और
गर्मी से फैल जाने के कारण वे उसे पार नहीं कर सके।

पहली मंजिल : पहली मंजिल पर आगे की तरफ सौरभ, सौमिल और हर्षित सहित उनकी मां सुनीता थे। इस वजह से बालकनी के रास्ते बाहर आ गए।

दूसरी मंजिल : अंदर की तरफ रुचिका और उनके बच्चे थे। इन्हें निकलने का मौका नहीं मिला और वह अंदर ही झुलस गए।

छत की तरफ : ऊपर की मंजिल पर मनोज और उनकी बहू सिमरन निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वहां लगा सुरक्षा चैनल गेट तकनीकी रूप से फंस गया। तब तक देर हो चुकी थी।

बच्चे रास्ता भटक गए और सांसें थम गईं

टीआइ के मुताबिक, जांच में सामने आया कि आग लगी तब परिवार को इसकी भयावहता का अंदाजा नहीं था। वे घर के अंदर पानी डाल आग बुझाने का प्रयास करते रहे। बाहर आग ने विकराल रूप ले लिया और धुआं फैला, तब तक निकलने के सारे रास्ते बंद हो चुके थे। पहली मंजिल पर बच्चे रास्ता भटक गए और उनकी सांसें थम गईं।

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