इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि ग्राम पंचायत द्वारा आश्रयहीन कृषि श्रमिक को आवंटित आवासीय भूमि के संरक्षण का दायित्व एस डी एम का है।यदि कोई आवंटी को बेदखल कर कब्जा कर लेता है तो उसे हटाकर आवंटी को कब्जा सौंपा जायेगा। कोर्ट ने कहा आवंटित आवासीय भूमि पर उत्तराधिकार हो सकता है किन्तु इससे आवंटी को भूमिधरी या आसामी का अधिकार नहीं मिल जाता।जमीन ग्राम पंचायत की ही रहेगी।उसे आवंटन निरस्त करने का भी अधिकार होगा। फतेहपुर के मामले में कोर्ट का आदेश इसी के साथ कोर्ट ने आवंटी को कब्जा दिलाने व अतिक्रमण हटाने का समादेश जारी करने की मांग में दाखिल याचिका स्वीकार कर ली है और एस डी एम खागा , फतेहपुर को राजस्व संहिता की धारा 65 में संक्षिप्त कार्यवाही कर आवंटी याची को कब्जा सौप घर बनाने दे। ऐसा करने से पूर्व अतिक्रमणकारियों को सुनवाई का पूरा मौका दिया जाय और दो माह में निर्णय ले। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने श्रीमती गीता देवी व अन्य की याचिका पर अधिवक्ता दिनेश कुमार मिश्र को सुनकर दिया है। घर बनाने से रोका, भगा दिया खागा तहसील के गांव ओरहा के भूमिहीन आश्रयहीन खेतिहर मजदूर याची के पति रामलाल के नाम घर बनाने के लिए ग्राम पंचायत ने 16अप्रैल 12को भूमि आवंटन का प्रस्ताव भेजा जिसे एस डी एम द्वारा 24दिसंबर 12को अनुमोदित किया गया।याची के पति ने कच्चा मकान बनाया ,इसी बीच उसकी दुर्घटना में मौत हो गई। जिसमें याची को मुआवजा मिला तो उसने घर बनाना शुरू किया किन्तु विपक्षियों ने रोक दिया और भगा दिया। जिलाधिकारी व एस डी एम से शिकायत की किंतु कोई कार्रवाई न होने पर हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने कानूनी मुद्दे पर फैसला सुनाया और कहा कि ऐसे मामलों में एस डी एम को धारा 65मे संक्षिप्त कार्यवाही कर आवंटी को कब्जा सौंपने का अधिकार प्राप्त है।इस मामले में धारा 134के उपबंध नहीं लागू होंगे।यह धारा भूमिधरी या आसामी की बेदखली पर कार्यवाही का उपबंध करती है।
जो धारा 63 के आवासीय आवंटन पर लागू नहीं होती।जिसके अतिक्रमण से संरक्षण देने का अधिकार एस डी एम को है।एस डी एम का कर्तव्य है कि वह आवंटी को कब्जा दिलाये। क्योंकि आवास का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(e)व अनुच्छेद 21के तहत मूल अधिकारों में शामिल हैं।


