ईरान संघर्ष का असर, सूखे मेवे हो सकते हैं महंगे, व्यापारियों ने जताई कीमतों में उछाल की आशंका

ईरान संघर्ष का असर, सूखे मेवे हो सकते हैं महंगे, व्यापारियों ने जताई कीमतों में उछाल की आशंका

आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका
पश्चिम एशिया में जारी ईरान से जुड़े संघर्ष का असर अब स्थानीय बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। हुब्बल्ली के व्यापारियों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में सूखे मेवों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है। भारत में आयात होने वाले सूखे मेवों का बड़ा हिस्सा ईरान से आता है, ऐसे में आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। व्यापारियों के अनुसार अंजीर, पिस्ता, बादाम और खासकर ईरानी खजूर की मांग रमजान के दौरान काफी बढ़ जाती है। ईरान के मजाफती खजूर कर्नाटक में सबसे लोकप्रिय माने जाते हैं और फिलहाल करीब 300 रुपए प्रति किलो बिक रहे हैं।

व्यापारियों ने पहले ही पर्याप्त स्टॉक जमा किया
रमजान को देखते हुए शहर के अधिकांश व्यापारियों ने पहले ही पर्याप्त स्टॉक जमा कर लिया है। उनका कहना है कि ईद तक किसी बड़ी कमी की संभावना नहीं है, लेकिन यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो हालात बिगड़ सकते हैं। कुछ व्यापारियों ने संभावित आपूर्ति संकट को देखते हुए पिस्ता के दाम 200 से 300 रुपए प्रति किलो तक बढ़ा दिए हैं। ईरानी केसर, जिसे विश्व में सर्वोत्तम गुणवत्ता का माना जाता है, वर्तमान में 2.5 लाख से 3 लाख रुपए प्रति किलो बिक रहा है।

कई मसाले ईरान से आयात हो रहे
व्यापारियों का अनुमान है कि दो सप्ताह में इसकी कीमत 4 लाख रुपए प्रति किलो तक पहुंच सकती है। फिलहाल ईरान से आयातित पिस्ता 1,800 से 2,100 रुपए प्रति किलो, अंजीर लगभग 1,600 रुपए, ममरा बादाम 2,500 रुपए और चिलगोजा करीब 8,000 रुपए प्रति किलो के आसपास बिक रहे हैं।
सूखे मेवों के अलावा जायफल, दालचीनी और स्टार ऐनिस जैसे मसाले भी ईरान से आयात होते हैं।

आयात बाधित रहा तो पड़ेगा असर
यदि ईरानी बंदरगाहों पर व्यापार प्रभावित होता है तो अफगानिस्तान से आने वाली आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है। व्यापारियों का मानना है कि थोक बाजार में कीमतों में उछाल का सीधा असर खुदरा ग्राहकों पर पड़ेगा। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल स्थिति पर नजर रखी जा रही है, लेकिन यदि आयात बाधित रहा तो आने वाले समय में सूखे मेवे आम उपभोक्ताओं की पहुंच से और दूर हो सकते हैं।

त्योहार के समय ड्राई फ्रूट्स की बिक्री अधिक
हुब्बल्ली में ड्राई फ्रूट्स के होलसेल विक्रेता तांबाराम चौधरी कहते हैं, पर्व-त्योहार के दौरान ड्राई फ्रूट्स अधिक बिकते हैं। रमजान के समय खासकर खजूर की बिक्री अधिक रहती है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो कीमतों पर थोड़ा असर पड़ सकता है।

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