नालंदा को विश्व प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थस्थल बोधगया से सीधे जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित इस्लामपुर-मानपुर रेललाइन परियोजना वित्तीय कसौटी के पेच में उलझ गई है। जहानाबाद-बिहारशरीफ रेलखंड के बाद अब इस रूट पर भी ब्रेक लग गया है। 41.96 किलोमीटर लंबी और करीब 788.27 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का वित्तीय आंतरिक प्रतिफल दर (एफआईआरआर) महज 0.97 प्रतिशत आंका गया है। रेलवे नियमों के तहत किसी भी नई लाइन के लिए न्यूनतम 10 प्रतिशत रिटर्न जरूरी है। मानक से काफी कम प्रतिफल होने के कारण रेलवे के वित्त विभाग ने इसके विस्तृत प्राक्कलन को वेट करने से इनकार कर दिया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस परियोजना को महज 8 लाख रुपये का अग्रिम टोकन आवंटन मिला था। आरटीआई से हुआ बड़ा खुलासा परियोजना के ठंडे बस्ते में जाने का खुलासा सूचना के अधिकार के तहत हुआ है। अकबरपुर (पचलोवा) निवासी शोधार्थी विकास आनंद द्वारा मांगी गई जानकारी के जवाब में पूर्व-मध्य रेलवे राजगीर के उप मुख्य अभियंता अभिषेक साव ने बताया कि एफआईआरआर निर्धारित 10 प्रतिशत की सीमा से काफी नीचे होने के चलते डिटेल्ड एस्टीमेट को फाइनेंस क्लियरेंस नहीं मिल सका है। 30 साल में 10 प्रतिशत रिटर्न का नियम बना अड़ंगा रेलवे के वित्तीय मानकों के अनुसार किसी भी नई रेल परियोजना का आर्थिक जीवन 30 वर्ष आंका जाता है। इस अवधि में परिचालन और राजस्व से निवेश की भरपाई के साथ कम से कम 10 प्रतिशत का सालाना रिटर्न मिलना अनिवार्य है। इस्लामपुर-मानपुर रूट पर शुरुआती आकलन में अनुमानित कमाई बेहद कम पाई गई, जिससे रिटर्न एक प्रतिशत भी नहीं पहुंच सका। आसान शब्दों में कहें तो रेलवे को यहां 100 रुपये के पूंजी निवेश पर सालाना एक रुपये का भी प्रतिफल मिलता नहीं दिख रहा है। 40 लाख की आबादी और बुद्ध सर्किट को लगा झटका इस रेलखंड के निर्माण से क्षेत्र की करीब 40 लाख की आबादी को सुगम व सस्ती यात्रा का लाभ मिलता। यह लाइन बुद्ध सर्किट के दो प्रमुख केंद्रों नालंदा और बोधगया को सीधा संपर्क देकर अंतरराष्ट्रीय व घरेलू पर्यटकों की राह आसान करती। साथ ही इस्लामपुर, हिलसा और आसपास के क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियां, रोजगार और माल ढुलाई के नए रास्ते खुलते। जिले में प्रस्तावित सात रेललाइनों के नेटवर्क में यह परियोजना बेहद अहम कड़ी थी, जो अब नीतिगत और वित्तीय असमंजस में फंस गई है। 2021 सर्वे के मुख्य आंकड़े वर्ष 2021 में रेलवे बोर्ड को भेजी गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के अनुसार 41.96 किमी लंबे इस ब्रॉडगेज रूट पर इस्लामपुर, मुसौली, जमुआवां, नौडीहा, खिजरसराय, मकसुदपुर, बरेवा और मानपुर समेत 8 स्टेशन और 4 हॉल्ट प्रस्तावित हैं। पूरे रूट पर 3 बड़े पुल, 22 छोटे पुल, 15 आरयूबी (अंडरब्रिज), 2 क्रॉसिंग और 2 जंक्शन बनाए जाने की योजना तैयार की गई थी। नालंदा को विश्व प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थस्थल बोधगया से सीधे जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित इस्लामपुर-मानपुर रेललाइन परियोजना वित्तीय कसौटी के पेच में उलझ गई है। जहानाबाद-बिहारशरीफ रेलखंड के बाद अब इस रूट पर भी ब्रेक लग गया है। 41.96 किलोमीटर लंबी और करीब 788.27 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का वित्तीय आंतरिक प्रतिफल दर (एफआईआरआर) महज 0.97 प्रतिशत आंका गया है। रेलवे नियमों के तहत किसी भी नई लाइन के लिए न्यूनतम 10 प्रतिशत रिटर्न जरूरी है। मानक से काफी कम प्रतिफल होने के कारण रेलवे के वित्त विभाग ने इसके विस्तृत प्राक्कलन को वेट करने से इनकार कर दिया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस परियोजना को महज 8 लाख रुपये का अग्रिम टोकन आवंटन मिला था। आरटीआई से हुआ बड़ा खुलासा परियोजना के ठंडे बस्ते में जाने का खुलासा सूचना के अधिकार के तहत हुआ है। अकबरपुर (पचलोवा) निवासी शोधार्थी विकास आनंद द्वारा मांगी गई जानकारी के जवाब में पूर्व-मध्य रेलवे राजगीर के उप मुख्य अभियंता अभिषेक साव ने बताया कि एफआईआरआर निर्धारित 10 प्रतिशत की सीमा से काफी नीचे होने के चलते डिटेल्ड एस्टीमेट को फाइनेंस क्लियरेंस नहीं मिल सका है। 30 साल में 10 प्रतिशत रिटर्न का नियम बना अड़ंगा रेलवे के वित्तीय मानकों के अनुसार किसी भी नई रेल परियोजना का आर्थिक जीवन 30 वर्ष आंका जाता है। इस अवधि में परिचालन और राजस्व से निवेश की भरपाई के साथ कम से कम 10 प्रतिशत का सालाना रिटर्न मिलना अनिवार्य है। इस्लामपुर-मानपुर रूट पर शुरुआती आकलन में अनुमानित कमाई बेहद कम पाई गई, जिससे रिटर्न एक प्रतिशत भी नहीं पहुंच सका। आसान शब्दों में कहें तो रेलवे को यहां 100 रुपये के पूंजी निवेश पर सालाना एक रुपये का भी प्रतिफल मिलता नहीं दिख रहा है। 40 लाख की आबादी और बुद्ध सर्किट को लगा झटका इस रेलखंड के निर्माण से क्षेत्र की करीब 40 लाख की आबादी को सुगम व सस्ती यात्रा का लाभ मिलता। यह लाइन बुद्ध सर्किट के दो प्रमुख केंद्रों नालंदा और बोधगया को सीधा संपर्क देकर अंतरराष्ट्रीय व घरेलू पर्यटकों की राह आसान करती। साथ ही इस्लामपुर, हिलसा और आसपास के क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियां, रोजगार और माल ढुलाई के नए रास्ते खुलते। जिले में प्रस्तावित सात रेललाइनों के नेटवर्क में यह परियोजना बेहद अहम कड़ी थी, जो अब नीतिगत और वित्तीय असमंजस में फंस गई है। 2021 सर्वे के मुख्य आंकड़े वर्ष 2021 में रेलवे बोर्ड को भेजी गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के अनुसार 41.96 किमी लंबे इस ब्रॉडगेज रूट पर इस्लामपुर, मुसौली, जमुआवां, नौडीहा, खिजरसराय, मकसुदपुर, बरेवा और मानपुर समेत 8 स्टेशन और 4 हॉल्ट प्रस्तावित हैं। पूरे रूट पर 3 बड़े पुल, 22 छोटे पुल, 15 आरयूबी (अंडरब्रिज), 2 क्रॉसिंग और 2 जंक्शन बनाए जाने की योजना तैयार की गई थी।

