संतकबीरनगर में वन विभाग के लगाए 5500 पौधे गायब:विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘शक्ति वन’ की हकीकत उजागर, डीएम ने जांच के दिए निर्देश

संतकबीरनगर में वन विभाग के लगाए 5500 पौधे गायब:विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘शक्ति वन’ की हकीकत उजागर, डीएम ने जांच के दिए निर्देश

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर संतकबीरनगर में पर्यावरण संरक्षण की एक महत्वाकांक्षी योजना की जमीनी हकीकत सामने आई है। बेलहर विकास खंड स्थित आमी नदी के दरही घाट पर ‘शक्ति वन’ योजना के तहत लगाए गए 5500 पौधों में से अधिकांश अब गायब हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी आलोक कुमार ने जांच और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
सरकार की महत्वाकांक्षी ‘शक्ति वन’ योजना का उद्देश्य हरित क्षेत्र का विस्तार करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और नदी तटों को हरा-भरा बनाना था। इसी लक्ष्य के तहत बेलहर विकास खंड के आमी नदी स्थित दरही घाट पर पिछले वर्षों में 5500 पौधे रोपे गए थे। लेकिन विश्व पर्यावरण दिवस पर किए गए निरीक्षण में इस योजना की स्थिति चिंताजनक मिली। स्थल पर अधिकांश स्थानों पर पौधे दिखाई नहीं दिए। जहां कभी हजारों पौधे लगाए जाने का दावा किया गया था, वहां अब केवल खरपतवार और झाड़ियां नजर आ रही हैं। कुछ गिने-चुने पौधे ही जीवित अवस्था में दिखाई पड़े, जिनकी संख्या नगण्य बताई जा रही है।
पौधरोपण कर औपचारिकता पूरी स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पौधरोपण के बाद उनकी देखरेख और संरक्षण की व्यवस्था प्रभावी ढंग से नहीं की गई। समय पर सिंचाई, सुरक्षा और निगरानी के अभाव में अधिकांश पौधे नष्ट हो गए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि केवल पौधरोपण कर औपचारिकता पूरी कर दी गई, जबकि पौधों को संरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए गए। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने दोबारा पौधरोपण कर क्षेत्र को हरित बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन योजनाओं की निगरानी और रखरखाव में लापरवाही के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में यह मामला पौधरोपण अभियानों की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करता है। जिलाधिकारी आलोक कुमार ने मामले को गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण का निरीक्षण कराया जाएगा और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पौधों के गायब होने के कारणों की भी जांच कराई जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो।

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