मुजफ्फरनगर में प्रस्तावित शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। बुधवार दोपहर करीब 2 बजे गांव रोनी हरजीपुर के दर्जनों ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने भूमि अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित मुआवजे पर आपत्ति जताते हुए जमीन का भुगतान बाजार मूल्य के अनुसार करने की मांग की। प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने एडीएम वित्त से मुलाकात की और अपनी मांगों व आपत्तियों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन का मुआवजा वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर दिया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने दावा किया कि क्षेत्र में जमीन का बाजार मूल्य करीब 50 लाख रुपये प्रति बीघा है, जबकि सर्किल रेट इससे काफी कम है। ऐसे में किसानों को सर्किल रेट के बजाय वास्तविक बाजार दर के हिसाब से मुआवजा दिया जाना चाहिए। एक्सप्रेसवे से दो हिस्सों में बंट जाएगी जमीन ग्रामीणों ने मुआवजे के साथ ही एक्सप्रेसवे के डिजाइन और आवागमन की व्यवस्था को लेकर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि प्रस्तावित एक्सप्रेसवे से कई किसानों की जमीन दो हिस्सों में बंट जाएगी। इससे खेत के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक पहुंचने में किसानों को परेशानी होगी। ग्रामीणों ने मांग की कि किसानों और स्थानीय लोगों के आवागमन के लिए पर्याप्त रास्ते बनाए जाएं। साथ ही एक्सप्रेसवे के दोनों ओर सर्विस रोड की व्यवस्था की जाए, ताकि ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी न हो। पेड़, मकान और ट्यूबवेल का भी उचित मुआवजा मांगा ग्रामीणों ने कहा कि भूमि अधिग्रहण के दौरान सिर्फ जमीन का ही नहीं, बल्कि उस पर मौजूद संपत्तियों का भी उचित मूल्यांकन किया जाना चाहिए। उन्होंने पेड़, मकान, ट्यूबवेल और अन्य प्रभावित संपत्तियों का अलग से उचित मुआवजा देने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि खेती उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। जमीन चले जाने के बाद उनके सामने रोजगार और परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो सकता है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उचित मुआवजा और जरूरी सुविधाओं की मांग पूरी किए बिना वे भूमि अधिग्रहण के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो वे आगे भी आंदोलन जारी रखेंगे।

