44 तोला सोना और 3.5 किलो चांदी के आभूषणों से सजीं मां जगदंबा, अशोकनगर में सजा भक्ति का स्वर्ण दरबार

44 तोला सोना और 3.5 किलो चांदी के आभूषणों से सजीं मां जगदंबा, अशोकनगर में सजा भक्ति का स्वर्ण दरबार

Ashoknagar Durga Pandal Gold Jewellery: मध्यप्रदेश के अशोकनगर शहर में गौशाला रोड स्थित श्री जिंदबाबा झांकी समिति के पंडाल में विराजी मां दुर्गा की प्रतिमा इस बार भी पूरे शहर में चर्चाओं का विषय बनी हुई है। हर साल की तरह इस साल भी मां जगदंबा का दरबार अलौकिक छटा बिखेर रहा है। यहां माता रानी का श्रंगार 44 तोला सोने और साढ़े तीन किलो चांदी के आभूषणों से किया गया है। माता के इस बेशकीमती स्वरूप के दर्शनों को भक्तों का तांता लगा हुआ है। वहीं श्रंगार की सुरक्षा के लिए 24 घंटे एक-चार की पुलिस गार्ड तैनात है। वहीं सीसीटीवी कैमरों से निगरानी हो रही है और समिति के सदस्य भी ड्यूटी दे रहे हैं।

सोने-चांदी के आभूषणों से मां का श्रंगार

समिति के संयोजक महेंद्र भारद्वाज के अनुसार, इस वर्ष मां दुर्गा के आभूषणों में और भी इजाफा किया गया है। माता को सोने के बाजूबंद, माथे की बिंदी, पुतली, एक बड़ा हार, मंगलसूत्र, नथ, बेंदी, दो रानी हार, करधनी, कानों के कुंडल और 16 अंगूठियां पहनाई गई हैं। वहीं चांदी की पांच मालाएं, पायल, बिछिया और 3 किलो चांदी का मुकुट सजाया गया है। इसके अलावा चांदी की चरण पादुका, श्रंगारदानी और चांदी की थाली भी है।

विसर्जन के दिन लगती है बोली

इस झांकी की सबसे अनूठी व रोचक परंपरा आभूषणों की नीलामी है। नौ दिन के नवरात्र उत्सव के बाद, विसर्जन वाले दिन माता द्वारा धारण किए गए इन गहनों की बाकायदा बोली लगाई जाती है। श्रद्धालु इन आभूषणों को पाने बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं और ऊंची कीमत पर खरीदते हैं। समिति के अनुसार, यह सिलसिला वर्षों पहले दान में आए चांदी के छोटे आभूषणों से शुरु हुआ था, जो श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था के साथ मुकुट और फिर स्वर्ण आभूषणों में तब्दील हो गया। अब हर साल माता के लिए नए और पहले से अधिक आभूषण बनवाए जाते हैं।

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