देवघर जिले के मधुपुर रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने बड़ी कार्रवाई की। आरपीएफ ने दरभंगा-हावड़ा एक्सप्रेस से चार नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया। प्रारंभिक जांच में इन बच्चों के बाल तस्करी का शिकार होने की आशंका जताई जा रही है। आरपीएफ की टीम ने तत्परता दिखाते हुए बच्चों को अपनी सुरक्षा में लिया। इसके बाद चाइल्ड हेल्पलाइन के सहयोग से उन्हें बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया गया। सीडब्ल्यूसी अब बच्चों की देखरेख और पुनर्वास के लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है। हालांकि, इस कार्रवाई के दौरान बाल तस्कर गिरोह के सदस्य मौके से फरार होने में सफल रहे। गौरतलब है कि इन दिनों रेल मार्ग के जरिए बच्चों की तस्करी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। तस्कर मासूम बच्चों को बहला-फुसलाकर या झांसा देकर दूसरे शहरों में ले जाने की कोशिश करते हैं। रेलवे सुरक्षा बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता ऐसे मामलों में बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। बीते दिनों भी जसीडीह रेलवे स्टेशन से 13 नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया गया था, जबकि जामताड़ा स्टेशन से सात बच्चों को सुरक्षित निकाला गया था। इन सभी मामलों में बच्चों को बाल कल्याण समिति को सौंपा गया था। आश्रय संस्था की सचिव दीपा कुमारी ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बाल तस्करी एक गंभीर अपराध है। उन्होंने इसके खिलाफ लगातार जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया। दीपा कुमारी ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों पर विशेष ध्यान दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें। देवघर जिले के मधुपुर रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने बड़ी कार्रवाई की। आरपीएफ ने दरभंगा-हावड़ा एक्सप्रेस से चार नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया। प्रारंभिक जांच में इन बच्चों के बाल तस्करी का शिकार होने की आशंका जताई जा रही है। आरपीएफ की टीम ने तत्परता दिखाते हुए बच्चों को अपनी सुरक्षा में लिया। इसके बाद चाइल्ड हेल्पलाइन के सहयोग से उन्हें बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया गया। सीडब्ल्यूसी अब बच्चों की देखरेख और पुनर्वास के लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है। हालांकि, इस कार्रवाई के दौरान बाल तस्कर गिरोह के सदस्य मौके से फरार होने में सफल रहे। गौरतलब है कि इन दिनों रेल मार्ग के जरिए बच्चों की तस्करी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। तस्कर मासूम बच्चों को बहला-फुसलाकर या झांसा देकर दूसरे शहरों में ले जाने की कोशिश करते हैं। रेलवे सुरक्षा बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता ऐसे मामलों में बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। बीते दिनों भी जसीडीह रेलवे स्टेशन से 13 नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया गया था, जबकि जामताड़ा स्टेशन से सात बच्चों को सुरक्षित निकाला गया था। इन सभी मामलों में बच्चों को बाल कल्याण समिति को सौंपा गया था। आश्रय संस्था की सचिव दीपा कुमारी ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बाल तस्करी एक गंभीर अपराध है। उन्होंने इसके खिलाफ लगातार जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया। दीपा कुमारी ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों पर विशेष ध्यान दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।


