पश्चिम चंपारण के सिकटा प्रखंड की सिरसिया पंचायत के लालपरसा गांव निवासी अफाक अहमद ने शिक्षा के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक समय तक सेवा देने के बाद राजनीति में कदम रखा। शिक्षक के रूप में लंबी पारी खेलने के बाद उन्होंने पहली बार चुनावी मैदान में उतरकर जीत हासिल की। उनकी राजनीतिक यात्रा जन सुराज अभियान से जुड़ाव के बाद आगे बढ़ी। 1987 में शुरू किया शिक्षक का सफर अफाक अहमद ने शुरुआती पढ़ाई बेतिया से की। पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 1987 में शिक्षक के तौर पर करियर शुरू किया। उन्होंने करीब 32 वर्षों तक बेतिया जिले के आमना उर्दू हाई स्कूल में बच्चों को पढ़ाया। लंबे समय तक शिक्षा के क्षेत्र में सेवा देने के बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ली। जन सुराज अभियान से जुड़े VRS लेने के बाद अफाक अहमद सक्रिय राजनीति में आए। उनके मुताबिक, बिहार में जन सुराज अभियान की शुरुआत के समय से ही वे प्रशांत किशोर के विचारों से प्रभावित थे। उनका कहना है कि बिहार की राजनीति में बदलाव और आम लोगों के मुद्दों को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में लाने के उद्देश्य से वे अभियान से जुड़े। पहली बार चुनाव में उतरे वर्ष 2023 में अफाक अहमद ने पहली बार चुनाव लड़ा। वे जन सुराज समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे। चुनाव में उन्होंने महागठबंधन समर्थित भाकपा उम्मीदवार आनंद पुष्कर को हराया। पहली जीत ने बदला राजनीतिक समीकरण पहले ही चुनाव में मिली जीत ने अफाक अहमद को क्षेत्रीय राजनीति में चर्चा में ला दिया। उनकी जीत को इलाके के पुराने राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के तौर पर देखा गया। शिक्षक से राजनीति में आए अफाक की चुनावी सफलता जन सुराज अभियान के लिए भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम रही। सारण की राजनीति में भी चर्चा सारण क्षेत्र बिहार की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। सारण लोकसभा क्षेत्र से राजद अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव भी सांसद रह चुके हैं। वर्तमान में इस लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भाजपा के राजीव प्रताप रूडी कर रहे हैं। राजीव प्रताप रूडी पूर्व केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में सारण से तत्कालीन सांसद राबड़ी देवी को पराजित किया था। शिक्षक से राजनेता तक का सफर अफाक अहमद का राजनीतिक सफर शिक्षा के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक समय तक सेवा देने के बाद शुरू हुआ। शिक्षक की नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और पहली चुनावी पारी में ही जीत दर्ज की। इससे वे अपने क्षेत्र की राजनीति में चर्चा का विषय बने। पश्चिम चंपारण के सिकटा प्रखंड की सिरसिया पंचायत के लालपरसा गांव निवासी अफाक अहमद ने शिक्षा के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक समय तक सेवा देने के बाद राजनीति में कदम रखा। शिक्षक के रूप में लंबी पारी खेलने के बाद उन्होंने पहली बार चुनावी मैदान में उतरकर जीत हासिल की। उनकी राजनीतिक यात्रा जन सुराज अभियान से जुड़ाव के बाद आगे बढ़ी। 1987 में शुरू किया शिक्षक का सफर अफाक अहमद ने शुरुआती पढ़ाई बेतिया से की। पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 1987 में शिक्षक के तौर पर करियर शुरू किया। उन्होंने करीब 32 वर्षों तक बेतिया जिले के आमना उर्दू हाई स्कूल में बच्चों को पढ़ाया। लंबे समय तक शिक्षा के क्षेत्र में सेवा देने के बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ली। जन सुराज अभियान से जुड़े VRS लेने के बाद अफाक अहमद सक्रिय राजनीति में आए। उनके मुताबिक, बिहार में जन सुराज अभियान की शुरुआत के समय से ही वे प्रशांत किशोर के विचारों से प्रभावित थे। उनका कहना है कि बिहार की राजनीति में बदलाव और आम लोगों के मुद्दों को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में लाने के उद्देश्य से वे अभियान से जुड़े। पहली बार चुनाव में उतरे वर्ष 2023 में अफाक अहमद ने पहली बार चुनाव लड़ा। वे जन सुराज समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे। चुनाव में उन्होंने महागठबंधन समर्थित भाकपा उम्मीदवार आनंद पुष्कर को हराया। पहली जीत ने बदला राजनीतिक समीकरण पहले ही चुनाव में मिली जीत ने अफाक अहमद को क्षेत्रीय राजनीति में चर्चा में ला दिया। उनकी जीत को इलाके के पुराने राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के तौर पर देखा गया। शिक्षक से राजनीति में आए अफाक की चुनावी सफलता जन सुराज अभियान के लिए भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम रही। सारण की राजनीति में भी चर्चा सारण क्षेत्र बिहार की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। सारण लोकसभा क्षेत्र से राजद अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव भी सांसद रह चुके हैं। वर्तमान में इस लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भाजपा के राजीव प्रताप रूडी कर रहे हैं। राजीव प्रताप रूडी पूर्व केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में सारण से तत्कालीन सांसद राबड़ी देवी को पराजित किया था। शिक्षक से राजनेता तक का सफर अफाक अहमद का राजनीतिक सफर शिक्षा के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक समय तक सेवा देने के बाद शुरू हुआ। शिक्षक की नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और पहली चुनावी पारी में ही जीत दर्ज की। इससे वे अपने क्षेत्र की राजनीति में चर्चा का विषय बने।

