‘मेरे बेटे ने 17 साल तक मां भारती की सेवा की है, वो मां भारती के साथ गद्दारी नहीं कर सकता है। तीन साल पहले यानी 2023 में मेरे बेटे ने भारतीय सेना से वीआरएस ली थी। इसके बाद उसने हम लोगों को बताया कि प्रतियोगिता परीक्षा दी थी और मेरा सिलेक्शन असम के सचिवालय में रक्षा विभाग में हो गया है। इसके बाद वो पत्नी और बच्चों को लेकर गुवाहाटी में ही किराए के मकान में रहने लगा। करीब दो महीने पहले मेरी तबीयत खराब थी, तब वो गांव आया था। मेरा इलाज कराया और गुवाहाटी लौट गया। मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, क्योंकि मेरा बेटा निर्दोष है। पता नहीं मेरी बहू और पोता-पोती किस हाल में होंगे। मेरे बेटे का एक दोस्त है, जो एक आंख से नहीं देख पाता है, उसी ने मेरे बेटे को फंसाया है।’ बेगूसराय के पपरौर गांव के रहने वाले 60 साल के अशोक सिंह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में ये बातें कही। दरअसल, 4 अक्टूबर को असम पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने भारतीय सेना की तेजपुर स्थित गजराज कॉर्प्स की मिलिट्री इंटेलिजेंस के साथ एक संयुक्त ऑपरेशन चलाते हुए पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले दो लोगों को पकड़ा। इनमें से एक अशोक सिंह का बेटा 39 साल का रितेश कुमार सिंह है। रितेश और उसके दोस्त अभिषेक की गिरफ्तारी गुवाहाटी के सतगांव इलाके से हुई। रितेश पर सीधे तौर पर पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी (PIO – Pakistan Intelligence Operative) के संपर्क में रहने और सुरक्षा से जुड़ी अति-संवेदनशील व गोपनीय सैन्य जानकारियां सीमा पार भेजने का गंभीर आरोप है। रितेश के पिता अशोक सिंह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में और क्या-क्या बताया? जासूसी के आरोप में पकड़े गए रितेश की क्या कहानी है? रितेश की गिरफ्तारी को लेकर उसके पड़ोसियों का क्या कहना है? पढ़िए, ग्राउंड रिपोर्ट। सबसे पहले रितेश के गांव की दो तस्वीरें देखिए अब जासूसी के आरोप में पकड़े गए रितेश की कहानी जानिए जासूसी कांड में गिरफ्तार रितेश कुमार सिंह ने अपने गांव में ही रहकर स्नातक (बीए ऑनर्स) की पढ़ाई की। साल 2006 में वो भारतीय सेना में भर्ती हुआ था। साल 2015 में उसकी शादी उलाव गांव की रहने वाली अर्चना के साथ संपन्न हुई थी, जिनसे उनके दो बच्चे अभिषेक और आदया हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच जब दैनिक भास्कर की टीम बेगूसराय जिले के पपरौर गांव में आरोपी रितेश कुमार सिंह के घर पहुंची। रितेश के पक्के मकान के लोहे के मेन गेट पर ताला लटका हुआ था। घर में उसकी मां मौजूद नहीं थीं। रितेश की पत्नी और बच्चे गुवाहाटी में ही थे। घर के बाहर सीढ़ियों पर केवल उसके वृद्ध पिता अशोक कुमार सिंह अकेले और बेहद मायूस बैठे हुए थे। रितेश की इस गिरफ्तारी और उस पर लगे देशद्रोह व जासूसी के आरोपों की सूचना न तो असम पुलिस ने और न ही उसकी बहू अर्चना ने घर के बुजुर्गों को दी थी। मंगलवार को जब पुलिस की दो अलग-अलग टीम गांव पहुंची और आसपास हलचल शुरू हुई, तब पिता को पहली बार बेटे पर लगे इस संगीन आरोप का अहसास हुआ। ‘मैं शेविंग कराकर निकल रहा था, नाई ने ही मुझे जानकारी दी’ अशोक कुमार सिंह ने बताया कि मैं सोमवार को शेविंग कराकर नाई की दुकान से बाहर निकल रहा था, तब नाई ने ही मुझे जानकारी दी कि आपका बेटा गुवाहाटी में पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में पकड़ा गया है। अशोक सिंह ने कहा कि मेरा बेटा ऐसा कभी नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि रितेश की मुझसे फोन पर बहुत कम बात होती थी और अधिकांश बातचीत उसकी मां से ही होती थी, जो इस वक्त अपने मायके में है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को पुलिस आई और उन्होंने बेटे का नाम, घर का पता आदि नोट किया था। पड़ोसी ने कहा- रितेश मरने के लिए तैयार हो सकता है, गद्दारी नहीं कर सकता पड़ोसी उदय मालाकार ने बताया कि रितेश को हम बचपन से देख रहे हैं। वह मरने के लिए तैयार हो सकता है, लेकिन देश से गद्दारी करने जैसा गलत काम नहीं कर सकता है। हम भी यहीं पर पैदा हुए और रितेश भी यहीं पैदा हुआ। बचपन से उसको देखते आए। आर्मी में नौकरी किया, रिटायर किया, अब कौन विभाग में कहां नौकरी करता है, वह सब हम नहीं जानते हैं। उन्होंने कहा कि रितेश गांव आता था, हम लोगों से मिलता था, बातचीत करता था। उतना टाइम नहीं मिलता था जो अधिक बात करें। करीब 2 महीना पहले भी आया था, लेकिन हमसे मुलाकात नहीं हुई। हमको लगता है कि उसे फंसाया ही गया है। मोतिहारी के अभिषेक से पूछताछ में सामने आया रितेश का नाम जानकारी के मुताबिक, जांच एजेंसियों की ओर से की गई गहन पड़ताल में इस जासूसी कांड का मुख्य सरगना बिहार के ही पूर्वी चंपारण जिले का रहने वाला अभिषेक कुमार सिंह निकला है। मुख्य आरोपी अभिषेक इस वर्ष जून महीने से ही गुवाहाटी के सतगांव थाना क्षेत्र के गांधीनगर इलाके में किराए का एक मकान लेकर रह रहा था और वहीं से इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। नेशनल एजेंसी के इनपुट पर असम एसटीएफ ने इस आपराधिक कृत्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सबसे पहले कार्रवाई करते हुए मुख्य साजिशकर्ता अभिषेक को गिरफ्तार किया था। इसके बाद एसटीएफ और मिलिट्री इंटेलिजेंस के अधिकारियों ने अभिषेक को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ शुरू की, तो इस पूरे तंत्र में बेगूसराय के पूर्व सैनिक रितेश कुमार सिंह का नाम प्रमुखता से सामने आया। रितेश भी सतगांव क्षेत्र में ही एक अन्य किराए का मकान लेकर रह रहा था और पूर्व फौजी होने का लाभ उठाकर सामरिक जानकारियां जुटाने तथा उन्हें पाकिस्तानी आकाओं तक पहुंचाने में अभिषेक की हर संभव मदद कर रहा था। पुख्ता डिजिटल और भौतिक सुराग मिलते ही एसटीएफ ने रितेश को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की और अपराध में उसकी सीधी संलिप्तता पाए जाने के बाद गिरफ्तार कर लिया। ‘भारतीय सेना के डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर, सेना की गतिविधियों की जानकारी दे रहे थे’ असम पुलिस का कहना है कि ये दोनों आरोपी भारतीय सेना के बुनियादी ढांचे यानी डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर तथा सेना की गतिविधियों से जुड़ी गोपनीय जानकारियां लगातार पाकिस्तानी हैंडलर्स को सप्लाई कर रहे थे। पूर्वोत्तर राज्यों में तैनात भारतीय सेना के बड़े काफिलों की आवाजाही, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पुलों और ढांचों की वास्तविक स्थिति तथा छावनियों की बारीक मैपिंग जैसी अति-संवेदनशील जानकारियां डिजिटल माध्यमों से सीमा पार भेजी जा रही थी। इस काम को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने कई अत्याधुनिक एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया एप्लिकेशन्स और फर्जी प्रोफाइल-अकाउंट्स का सहारा ले रखा था। जिससे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की सर्विलांस नजरों से लंबे समय तक बचा जा सके। इस जासूसी नेटवर्क के तार पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के हनीट्रैप मॉड्यूल से जुड़े होने की भी आशंका जताई जा रही है। ‘आरोपी पाकिस्तानी हैंडलर्स के ऑनलाइन बुने गए जाल में पूरी तरह फंस चुके थे’ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयान के अनुसार शुरुआती जांच में इस बात के स्पष्ट संकेत मिले हैं कि ब्लैकमेलिंग, डर या पैसों के लालच के दम पर उनसे देश की सुरक्षा से जुड़े अति-गोपनीय दस्तावेज और इनपुट हासिल किए जाते हैं। पुलिस अब इस वित्तीय और तकनीकी पहलू की भी गहराई से जांच कर रही है कि दोनों आरोपियों को इस राष्ट्रविरोधी जासूसी के बदले कितनी रकम मिली और उसका भुगतान बैंक खातों, यूपीआई या हवाला के किस रास्ते से किया गया था। इस संवेदनशील स्पाइडर वेब को ध्वस्त करने में भारतीय सेना की तेजपुर स्थित गजराज कॉर्प्स की मिलिट्री इंटेलिजेंस की भूमिका सबसे अहम साबित हुई। सेना की खुफिया इकाई को सबसे पहले मिली थी जासूसी की जानकारी सेना की खुफिया इकाई को सबसे पहले यह पुख्ता इनपुट प्राप्त हुआ था कि असम में तैनात सुरक्षा बलों की हलचल और सैन्य छावनियों से जुड़ी सामरिक जानकारियां किसी स्थानीय नेटवर्क के जरिए बाहर लीक की जा रही हैं। इसके बाद मिलिट्री इंटेलिजेंस ने असम एसटीएफ और शोणितपुर (तेजपुर) पुलिस प्रशासन से संपर्क साधा और अपने खुफिया इनपुट साझा किए। इस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की और जासूसी के इस नेटवर्क को । छापेमारी और गिरफ्तारी के दौरान पुलिस की टीम ने आरोपियों के ठिकानों से कई मोबाइल फोन, संदिग्ध सिम कार्ड और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए हैं। इन डिजिटल साक्ष्यों को फॉरेंसिक जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। जिससे यह सटीक जानकारी सामने आ सके कि अब तक भारतीय सेना की कौन-कौन सी फाइलें, नक्शे और तस्वीरें पाकिस्तान को भेजी जा चुकी हैं। जांच एजेंसियों को संदेह है कि आरोपियों को सेना के अंदरूनी तंत्र और परिसरों की जानकारी हासिल करने में पूर्व फौजी का सहयोग मिल रहा था। ‘मेरे बेटे ने 17 साल तक मां भारती की सेवा की है, वो मां भारती के साथ गद्दारी नहीं कर सकता है। तीन साल पहले यानी 2023 में मेरे बेटे ने भारतीय सेना से वीआरएस ली थी। इसके बाद उसने हम लोगों को बताया कि प्रतियोगिता परीक्षा दी थी और मेरा सिलेक्शन असम के सचिवालय में रक्षा विभाग में हो गया है। इसके बाद वो पत्नी और बच्चों को लेकर गुवाहाटी में ही किराए के मकान में रहने लगा। करीब दो महीने पहले मेरी तबीयत खराब थी, तब वो गांव आया था। मेरा इलाज कराया और गुवाहाटी लौट गया। मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, क्योंकि मेरा बेटा निर्दोष है। पता नहीं मेरी बहू और पोता-पोती किस हाल में होंगे। मेरे बेटे का एक दोस्त है, जो एक आंख से नहीं देख पाता है, उसी ने मेरे बेटे को फंसाया है।’ बेगूसराय के पपरौर गांव के रहने वाले 60 साल के अशोक सिंह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में ये बातें कही। दरअसल, 4 अक्टूबर को असम पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने भारतीय सेना की तेजपुर स्थित गजराज कॉर्प्स की मिलिट्री इंटेलिजेंस के साथ एक संयुक्त ऑपरेशन चलाते हुए पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले दो लोगों को पकड़ा। इनमें से एक अशोक सिंह का बेटा 39 साल का रितेश कुमार सिंह है। रितेश और उसके दोस्त अभिषेक की गिरफ्तारी गुवाहाटी के सतगांव इलाके से हुई। रितेश पर सीधे तौर पर पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी (PIO – Pakistan Intelligence Operative) के संपर्क में रहने और सुरक्षा से जुड़ी अति-संवेदनशील व गोपनीय सैन्य जानकारियां सीमा पार भेजने का गंभीर आरोप है। रितेश के पिता अशोक सिंह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में और क्या-क्या बताया? जासूसी के आरोप में पकड़े गए रितेश की क्या कहानी है? रितेश की गिरफ्तारी को लेकर उसके पड़ोसियों का क्या कहना है? पढ़िए, ग्राउंड रिपोर्ट। सबसे पहले रितेश के गांव की दो तस्वीरें देखिए अब जासूसी के आरोप में पकड़े गए रितेश की कहानी जानिए जासूसी कांड में गिरफ्तार रितेश कुमार सिंह ने अपने गांव में ही रहकर स्नातक (बीए ऑनर्स) की पढ़ाई की। साल 2006 में वो भारतीय सेना में भर्ती हुआ था। साल 2015 में उसकी शादी उलाव गांव की रहने वाली अर्चना के साथ संपन्न हुई थी, जिनसे उनके दो बच्चे अभिषेक और आदया हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच जब दैनिक भास्कर की टीम बेगूसराय जिले के पपरौर गांव में आरोपी रितेश कुमार सिंह के घर पहुंची। रितेश के पक्के मकान के लोहे के मेन गेट पर ताला लटका हुआ था। घर में उसकी मां मौजूद नहीं थीं। रितेश की पत्नी और बच्चे गुवाहाटी में ही थे। घर के बाहर सीढ़ियों पर केवल उसके वृद्ध पिता अशोक कुमार सिंह अकेले और बेहद मायूस बैठे हुए थे। रितेश की इस गिरफ्तारी और उस पर लगे देशद्रोह व जासूसी के आरोपों की सूचना न तो असम पुलिस ने और न ही उसकी बहू अर्चना ने घर के बुजुर्गों को दी थी। मंगलवार को जब पुलिस की दो अलग-अलग टीम गांव पहुंची और आसपास हलचल शुरू हुई, तब पिता को पहली बार बेटे पर लगे इस संगीन आरोप का अहसास हुआ। ‘मैं शेविंग कराकर निकल रहा था, नाई ने ही मुझे जानकारी दी’ अशोक कुमार सिंह ने बताया कि मैं सोमवार को शेविंग कराकर नाई की दुकान से बाहर निकल रहा था, तब नाई ने ही मुझे जानकारी दी कि आपका बेटा गुवाहाटी में पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में पकड़ा गया है। अशोक सिंह ने कहा कि मेरा बेटा ऐसा कभी नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि रितेश की मुझसे फोन पर बहुत कम बात होती थी और अधिकांश बातचीत उसकी मां से ही होती थी, जो इस वक्त अपने मायके में है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को पुलिस आई और उन्होंने बेटे का नाम, घर का पता आदि नोट किया था। पड़ोसी ने कहा- रितेश मरने के लिए तैयार हो सकता है, गद्दारी नहीं कर सकता पड़ोसी उदय मालाकार ने बताया कि रितेश को हम बचपन से देख रहे हैं। वह मरने के लिए तैयार हो सकता है, लेकिन देश से गद्दारी करने जैसा गलत काम नहीं कर सकता है। हम भी यहीं पर पैदा हुए और रितेश भी यहीं पैदा हुआ। बचपन से उसको देखते आए। आर्मी में नौकरी किया, रिटायर किया, अब कौन विभाग में कहां नौकरी करता है, वह सब हम नहीं जानते हैं। उन्होंने कहा कि रितेश गांव आता था, हम लोगों से मिलता था, बातचीत करता था। उतना टाइम नहीं मिलता था जो अधिक बात करें। करीब 2 महीना पहले भी आया था, लेकिन हमसे मुलाकात नहीं हुई। हमको लगता है कि उसे फंसाया ही गया है। मोतिहारी के अभिषेक से पूछताछ में सामने आया रितेश का नाम जानकारी के मुताबिक, जांच एजेंसियों की ओर से की गई गहन पड़ताल में इस जासूसी कांड का मुख्य सरगना बिहार के ही पूर्वी चंपारण जिले का रहने वाला अभिषेक कुमार सिंह निकला है। मुख्य आरोपी अभिषेक इस वर्ष जून महीने से ही गुवाहाटी के सतगांव थाना क्षेत्र के गांधीनगर इलाके में किराए का एक मकान लेकर रह रहा था और वहीं से इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। नेशनल एजेंसी के इनपुट पर असम एसटीएफ ने इस आपराधिक कृत्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सबसे पहले कार्रवाई करते हुए मुख्य साजिशकर्ता अभिषेक को गिरफ्तार किया था। इसके बाद एसटीएफ और मिलिट्री इंटेलिजेंस के अधिकारियों ने अभिषेक को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ शुरू की, तो इस पूरे तंत्र में बेगूसराय के पूर्व सैनिक रितेश कुमार सिंह का नाम प्रमुखता से सामने आया। रितेश भी सतगांव क्षेत्र में ही एक अन्य किराए का मकान लेकर रह रहा था और पूर्व फौजी होने का लाभ उठाकर सामरिक जानकारियां जुटाने तथा उन्हें पाकिस्तानी आकाओं तक पहुंचाने में अभिषेक की हर संभव मदद कर रहा था। पुख्ता डिजिटल और भौतिक सुराग मिलते ही एसटीएफ ने रितेश को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की और अपराध में उसकी सीधी संलिप्तता पाए जाने के बाद गिरफ्तार कर लिया। ‘भारतीय सेना के डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर, सेना की गतिविधियों की जानकारी दे रहे थे’ असम पुलिस का कहना है कि ये दोनों आरोपी भारतीय सेना के बुनियादी ढांचे यानी डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर तथा सेना की गतिविधियों से जुड़ी गोपनीय जानकारियां लगातार पाकिस्तानी हैंडलर्स को सप्लाई कर रहे थे। पूर्वोत्तर राज्यों में तैनात भारतीय सेना के बड़े काफिलों की आवाजाही, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पुलों और ढांचों की वास्तविक स्थिति तथा छावनियों की बारीक मैपिंग जैसी अति-संवेदनशील जानकारियां डिजिटल माध्यमों से सीमा पार भेजी जा रही थी। इस काम को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने कई अत्याधुनिक एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया एप्लिकेशन्स और फर्जी प्रोफाइल-अकाउंट्स का सहारा ले रखा था। जिससे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की सर्विलांस नजरों से लंबे समय तक बचा जा सके। इस जासूसी नेटवर्क के तार पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के हनीट्रैप मॉड्यूल से जुड़े होने की भी आशंका जताई जा रही है। ‘आरोपी पाकिस्तानी हैंडलर्स के ऑनलाइन बुने गए जाल में पूरी तरह फंस चुके थे’ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयान के अनुसार शुरुआती जांच में इस बात के स्पष्ट संकेत मिले हैं कि ब्लैकमेलिंग, डर या पैसों के लालच के दम पर उनसे देश की सुरक्षा से जुड़े अति-गोपनीय दस्तावेज और इनपुट हासिल किए जाते हैं। पुलिस अब इस वित्तीय और तकनीकी पहलू की भी गहराई से जांच कर रही है कि दोनों आरोपियों को इस राष्ट्रविरोधी जासूसी के बदले कितनी रकम मिली और उसका भुगतान बैंक खातों, यूपीआई या हवाला के किस रास्ते से किया गया था। इस संवेदनशील स्पाइडर वेब को ध्वस्त करने में भारतीय सेना की तेजपुर स्थित गजराज कॉर्प्स की मिलिट्री इंटेलिजेंस की भूमिका सबसे अहम साबित हुई। सेना की खुफिया इकाई को सबसे पहले मिली थी जासूसी की जानकारी सेना की खुफिया इकाई को सबसे पहले यह पुख्ता इनपुट प्राप्त हुआ था कि असम में तैनात सुरक्षा बलों की हलचल और सैन्य छावनियों से जुड़ी सामरिक जानकारियां किसी स्थानीय नेटवर्क के जरिए बाहर लीक की जा रही हैं। इसके बाद मिलिट्री इंटेलिजेंस ने असम एसटीएफ और शोणितपुर (तेजपुर) पुलिस प्रशासन से संपर्क साधा और अपने खुफिया इनपुट साझा किए। इस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की और जासूसी के इस नेटवर्क को । छापेमारी और गिरफ्तारी के दौरान पुलिस की टीम ने आरोपियों के ठिकानों से कई मोबाइल फोन, संदिग्ध सिम कार्ड और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए हैं। इन डिजिटल साक्ष्यों को फॉरेंसिक जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। जिससे यह सटीक जानकारी सामने आ सके कि अब तक भारतीय सेना की कौन-कौन सी फाइलें, नक्शे और तस्वीरें पाकिस्तान को भेजी जा चुकी हैं। जांच एजेंसियों को संदेह है कि आरोपियों को सेना के अंदरूनी तंत्र और परिसरों की जानकारी हासिल करने में पूर्व फौजी का सहयोग मिल रहा था।

