गोरखपुर में 250 युवाओं ने ली ईको ब्रिक ट्रेनिंग:1 क्विंटल प्लास्टिक कचरे से बनाई गईं ईको ब्रिक, सीखा प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट

गोरखपुर में 250 युवाओं ने ली ईको ब्रिक ट्रेनिंग:1 क्विंटल प्लास्टिक कचरे से बनाई गईं ईको ब्रिक, सीखा प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट

गोरखपुर में पूर्वांचल यूथ वेलफेयर एसोसिएशन और फ्लाईअप फाउंडेशन की ओर से शुरू किए गए “नील गगन पूर्वांचल – ईको वॉरियर” अभियान के तहत “ईको ब्रिक ट्रेनिंग और प्रदर्शनी” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसका उद्देश्य युवाओं को पर्यावरण संरक्षण, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट और सस्टेनेबल डेवेलपमेंट के प्रति जागरूक करना था। प्रोग्राम में लगभग 250 युवाओं और विद्यार्थियों ने हिस्सा लेकर ईको ब्रिक बनाने और प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट की ट्रेनिंग ली। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न छात्र टीमों की ओर से बनाए गए ईको ब्रिक संरचनाओं की प्रदर्शनी लगाई गई। आयोजकों ने बताया कि अब तक लगभग 1 क्विंटल प्लास्टिक कचरे के दुबारा उपयोग से विभिन्न उपयोगी और पर्यावरण अनुकूल वस्तुओं व संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है। ‘Waste To Value’ मॉडल से जोड़ने का प्रयास
इस दौरान मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT), दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों के छात्र शामिल रहें। साथ ही गेस्ट के तौर पर TSI रामवृक्ष और DDU के प्रोफेसर्स और रोवर्स रेंजर्स के कोऑर्डिनेटर मौजूद रहें। इसके माध्यम से प्लास्टिक कचरे को पर्यावरण में जाने से रोकने के साथ-साथ युवाओं को “Waste To Value” मॉडल से जोड़ने का प्रयास किया गया। अभियान के अंतर्गत अब तक 200 से अधिक ईको ब्रिक्स तैयार किए जा चुके हैं। ईको पार्क विकसित किया जाएगा इन ईको ब्रिक्स से निर्मित संरचनाओं को आगामी समय में विकसित किए जाने वाले “ईको पार्क” में स्थापित किया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि आगे चलकर एक विशेष ईको पार्क विकसित किया जाएगा, जिसमें ईको ब्रिक आधारित संरचनाएं, बैठने की व्यवस्था, डस्टबिन, कलात्मक इंस्टॉलेशन एवं क्षेत्रीय पौधों का रोपण किया जाएगा। यह ईको पार्क पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का मॉडल केंद्र बनेगा। 2023 से शुरू किया पहल
अभय सिंह ने वर्ष 2023 में एक अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संस्था (International NGO) से ईको ब्रिक और प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट का प्रशिक्षण प्राप्त किया था। इसी प्रशिक्षण से प्रेरित होकर उन्होंने पूर्वांचल क्षेत्र में इस मॉडल को लागू करने की योजना बनाई। इसके बाद उन्होंने PYWA के अध्यक्ष नारायण दत्त पाठक से संपर्क किया, जिनके सहयोग और संगठनात्मक नेतृत्व से यह अभियान व्यापक जनभागीदारी वाला पर्यावरणीय आंदोलन बन सका। आयोजकों ने बताया कि यह अभियान अब अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है। पहले साल में विद्यार्थियों को ईको ब्रिक निर्माण का पायलट ट्रेनिंग दिया गया। दूसरे साल ईको ब्रिक आधारित पायलट संरचनाओं का निर्माण किया गया। वहीं तीसरे साल में ईको पार्क विकास, पूर्ण रूप से ईको संरचनाओं का निर्माण और सक्रिय वॉलंटियर नेटवर्क विकसित किया गया है। 3 महीने का अभियान
“नील गगन पूर्वांचल – ईको वॉरियर” एक 3 महीने का पर्यावरणीय अभियान है, जिसके अंतर्गत ईको पार्क विकास, वृक्षारोपण, वेस्ट सेग्रीगेशन और युवाओं की सहभागिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में इस अभियान से 150 से अधिक वॉलंटियर्स और इंटर्न जुड़े हुए हैं। समस्या से समाधान में बदलता ईको ब्रिक मॉडल-अभय सिंह फ्लाईअप फाउंडेशन के निदेशक अभय सिंह ने कहा कि “युवाओं को केवल पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूक करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें व्यवहारिक मॉडल से जोड़ना आवश्यक है। ईको ब्रिक एक ऐसा ही मॉडल है जो प्लास्टिक कचरे को समस्या से समाधान में बदलता है।” ईको पार्क युवाओं के लिए प्रेरणा-नारायण दत्त PYWA के अध्यक्ष नारायण दत्त पाठक ने कहा कि “यह अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि जनभागीदारी आधारित पर्यावरणीय आंदोलन है। आने वाले समय में ईको पार्क युवाओं के लिए प्रेरणा केंद्र बनेगा।” रोवर एंड रेंजर्स के कोऑर्डिनेटर प्रो. शरद मिश्रा ने कहा कि “युवाओं की ऊर्जा को पर्यावरण संरक्षण जैसे सकारात्मक कार्यों में जोड़ना समय की आवश्यकता है। यह अभियान विद्यार्थियों में सामाजिक एवं पर्यावरणीय जिम्मेदारी विकसित कर रहा है।” प्लास्टिक अपशिष्ट आज एक गंभीर समस्या- TSI टीएसआई रामवृक्ष यादव ने कहा कि “प्लास्टिक अपशिष्ट आज एक गंभीर समस्या है। इस प्रकार की पहल समाज में व्यवहारिक परिवर्तन लाने में सहायक सिद्ध होगी।”

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