प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री ने ईंधन बचाने के लिए अपने काफिले छोटे कर दिए हैं, लेकिन इसके विपरीत केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के मुंगेर आगमन पर उनके काफिले में एक दर्जन से अधिक वाहन देखे गए। इस काफिले में प्रशासनिक अधिकारियों के वाहनों के साथ-साथ पार्टी कार्यकर्ताओं की गाड़ियां भी शामिल थीं। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने मंत्रियों व विधायकों से आवश्यकता पड़ने पर ही यात्रा करने और काफिले छोटे रखने की अपील की है। उन्होंने सप्ताह में एक या दो दिन ‘व्हीकल डे’ मनाने का भी सुझाव दिया है। आम जनता को संदेश देने के लिए प्रधानमंत्री अपने काफिले में केवल तीन वाहनों का उपयोग कर रहे हैं, जबकि बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपने आवास से कार्यालय तक पैदल जाते हैं। केंद्रीय मंत्री के इतने बड़े काफिले को देखकर लोगों में सवाल उठने लगे। कई लोगों ने टिप्पणी की कि शायद प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की अपील केंद्रीय मंत्री ललन सिंह तक नहीं पहुंची है। दो दिन पहले, बिहार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र भी मुंगेर आए थे। उन्होंने भी ईंधन बचाने के लिए सप्ताह में दो दिन अपने आवास से कार्यालय पैदल जाने की बात कही थी और अन्य कार्यकर्ताओं व नेताओं से भी वाहनों का कम उपयोग करने का आग्रह किया था। इधर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के मुंगेर आगमन के दौरान जब केंद्रीय मंत्री जिला परिषद भवन सौंदर्यीकरण होने के बाद भवन का उद्घाटन करने पहुंचे थे इस दौरान जहां जिप अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बुके देकर स्वागत किया। वहीं एक जिला परिषद सदस्य मंत्री जी के साथ अपनी पहचान बनाने के लिए पहले उन्हें बुके देकर स्वागत किया गया इसके बाद भी मन नहीं माना तो जीप सदस्य ने उनके पांव छूकर आशीर्वाद लिए। इस मौके पर अन्य लोग मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री ने ईंधन बचाने के लिए अपने काफिले छोटे कर दिए हैं, लेकिन इसके विपरीत केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के मुंगेर आगमन पर उनके काफिले में एक दर्जन से अधिक वाहन देखे गए। इस काफिले में प्रशासनिक अधिकारियों के वाहनों के साथ-साथ पार्टी कार्यकर्ताओं की गाड़ियां भी शामिल थीं। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने मंत्रियों व विधायकों से आवश्यकता पड़ने पर ही यात्रा करने और काफिले छोटे रखने की अपील की है। उन्होंने सप्ताह में एक या दो दिन ‘व्हीकल डे’ मनाने का भी सुझाव दिया है। आम जनता को संदेश देने के लिए प्रधानमंत्री अपने काफिले में केवल तीन वाहनों का उपयोग कर रहे हैं, जबकि बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपने आवास से कार्यालय तक पैदल जाते हैं। केंद्रीय मंत्री के इतने बड़े काफिले को देखकर लोगों में सवाल उठने लगे। कई लोगों ने टिप्पणी की कि शायद प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की अपील केंद्रीय मंत्री ललन सिंह तक नहीं पहुंची है। दो दिन पहले, बिहार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र भी मुंगेर आए थे। उन्होंने भी ईंधन बचाने के लिए सप्ताह में दो दिन अपने आवास से कार्यालय पैदल जाने की बात कही थी और अन्य कार्यकर्ताओं व नेताओं से भी वाहनों का कम उपयोग करने का आग्रह किया था। इधर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के मुंगेर आगमन के दौरान जब केंद्रीय मंत्री जिला परिषद भवन सौंदर्यीकरण होने के बाद भवन का उद्घाटन करने पहुंचे थे इस दौरान जहां जिप अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बुके देकर स्वागत किया। वहीं एक जिला परिषद सदस्य मंत्री जी के साथ अपनी पहचान बनाने के लिए पहले उन्हें बुके देकर स्वागत किया गया इसके बाद भी मन नहीं माना तो जीप सदस्य ने उनके पांव छूकर आशीर्वाद लिए। इस मौके पर अन्य लोग मौजूद थे।


