लदनियां|प्रखंड में शारदीय नवरात्र को लेकर उत्साह चरम पर है। रविवार को कलश स्थापना के साथ नौ दिवसीय अनुष्ठान शुरू हो गया। इस वर्ष प्रखंड में 22 स्थानों पर दुर्गा पूजा और मेले का आयोजन किया जा रहा है। मुख्य बाजार लदनियां में 85वां दुर्गा पूजा महोत्सव मनाया जा रहा है। खास बात यह है कि पिछले 84 वर्षों से लदनियां बाजार दुर्गा पूजा समिति के पदेन अध्यक्ष थानाध्यक्ष होते रहे हैं। खाजडीह, पद्मा, सिधपकला, योगिया, सिधपा, गारहा, पिपराही, दोनवारी और गजहरा समेत विभिन्न स्थानों पर मां दुर्गा की आराधना की जा रही है। पद्मा क्षेत्र में चार और गजहरा में पांच प्रमुख स्थानों पर पूजा का आयोजन हो रहा है। क्षेत्र में दुर्गा पूजा की ऐतिहासिक शुरुआत गारहा मठ से हुई थी। समय के साथ यह परंपरा प्रखंड के विभिन्न गांवों और बाजारों तक पहुंच गई। आज पूजा के साथ मेले का आयोजन भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनता है। पूजा को लेकर मूर्तिकार प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। वहीं, पंडालों के निर्माण और सजावट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। बारिश की आशंका को देखते हुए पंडालों को सुरक्षित बनाने पर भी जोर है। पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए पुलिस-प्रशासन सतर्क है। इंस्पेक्टर सह थानाध्यक्ष मुकुल रंजन कुमार सिंह ने बताया कि प्रखंड के सभी 22 पूजा स्थलों के लिए लाइसेंस जारी कर दिए गए हैं। पूजा समितियों को सुरक्षा व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। भास्कर न्यूज|मधुबनी जिले में शारदीय नवरात्र के पहले दिन रविवार को कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की आराधना शुरू हो गई। मंदिरों और पूजा स्थलों पर धार्मिक अनुष्ठान व दुर्गा सप्तशती के पाठ से माहौल भक्तिमय बना हुआ है। श्रद्धालु मां भगवती की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं। सौराठ गांव के उत्तरदायी टोले स्थित दुर्गा मंदिर में पहले दिन ही आरती के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना के लिए भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया था। नवरात्र के प्रथम दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। माता का वाहन वृषभ है। इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्वजन्म में माता सती प्रजापति दक्ष की पुत्री थीं। योगाग्नि में आत्मदाह के बाद उन्होंने हिमालय के घर पुनर्जन्म लिया। नवरात्र के प्रथम दिन इनकी आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। नवरात्र के दूसरे दिन सोमवार को मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाएगी। माता को तपस्या, त्याग, संयम और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह, भगवती से सुख-शांति, आरोग्य और समृद्धि की कामना की गई धार्मिक मान्यता के अनुसार, इनकी आराधना से साधकों को धैर्य, आत्मबल और आत्मविश्वास की प्रेरणा मिलती है। पूजा में सफेद व पीले पुष्प, चंदन, रोली और अक्षत अर्पित करने की परंपरा है। माता को चीनी, शक्कर और मिश्री का भोग लगाया जाता है। पंडित पंकज झा शास्त्री के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में श्रद्धा और विधि-विधान का विशेष महत्व है। धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं में इनका संबंध मंगल ग्रह से भी बताया जाता है। मंगल को साहस, ऊर्जा और पराक्रम का कारक माना गया है। शारदीय नवरात्र में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाएगी। इस दौरान मंदिरों और पूजा स्थलों पर मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठान और दुर्गा सप्तशती के पाठ होंगे। जिले में नवरात्र को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। भक्त मां भगवती से सुख-शांति, आरोग्य और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। लदनियां|प्रखंड में शारदीय नवरात्र को लेकर उत्साह चरम पर है। रविवार को कलश स्थापना के साथ नौ दिवसीय अनुष्ठान शुरू हो गया। इस वर्ष प्रखंड में 22 स्थानों पर दुर्गा पूजा और मेले का आयोजन किया जा रहा है। मुख्य बाजार लदनियां में 85वां दुर्गा पूजा महोत्सव मनाया जा रहा है। खास बात यह है कि पिछले 84 वर्षों से लदनियां बाजार दुर्गा पूजा समिति के पदेन अध्यक्ष थानाध्यक्ष होते रहे हैं। खाजडीह, पद्मा, सिधपकला, योगिया, सिधपा, गारहा, पिपराही, दोनवारी और गजहरा समेत विभिन्न स्थानों पर मां दुर्गा की आराधना की जा रही है। पद्मा क्षेत्र में चार और गजहरा में पांच प्रमुख स्थानों पर पूजा का आयोजन हो रहा है। क्षेत्र में दुर्गा पूजा की ऐतिहासिक शुरुआत गारहा मठ से हुई थी। समय के साथ यह परंपरा प्रखंड के विभिन्न गांवों और बाजारों तक पहुंच गई। आज पूजा के साथ मेले का आयोजन भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनता है। पूजा को लेकर मूर्तिकार प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। वहीं, पंडालों के निर्माण और सजावट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। बारिश की आशंका को देखते हुए पंडालों को सुरक्षित बनाने पर भी जोर है। पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए पुलिस-प्रशासन सतर्क है। इंस्पेक्टर सह थानाध्यक्ष मुकुल रंजन कुमार सिंह ने बताया कि प्रखंड के सभी 22 पूजा स्थलों के लिए लाइसेंस जारी कर दिए गए हैं। पूजा समितियों को सुरक्षा व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। भास्कर न्यूज|मधुबनी जिले में शारदीय नवरात्र के पहले दिन रविवार को कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की आराधना शुरू हो गई। मंदिरों और पूजा स्थलों पर धार्मिक अनुष्ठान व दुर्गा सप्तशती के पाठ से माहौल भक्तिमय बना हुआ है। श्रद्धालु मां भगवती की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं। सौराठ गांव के उत्तरदायी टोले स्थित दुर्गा मंदिर में पहले दिन ही आरती के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना के लिए भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया था। नवरात्र के प्रथम दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। माता का वाहन वृषभ है। इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्वजन्म में माता सती प्रजापति दक्ष की पुत्री थीं। योगाग्नि में आत्मदाह के बाद उन्होंने हिमालय के घर पुनर्जन्म लिया। नवरात्र के प्रथम दिन इनकी आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। नवरात्र के दूसरे दिन सोमवार को मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाएगी। माता को तपस्या, त्याग, संयम और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह, भगवती से सुख-शांति, आरोग्य और समृद्धि की कामना की गई धार्मिक मान्यता के अनुसार, इनकी आराधना से साधकों को धैर्य, आत्मबल और आत्मविश्वास की प्रेरणा मिलती है। पूजा में सफेद व पीले पुष्प, चंदन, रोली और अक्षत अर्पित करने की परंपरा है। माता को चीनी, शक्कर और मिश्री का भोग लगाया जाता है। पंडित पंकज झा शास्त्री के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में श्रद्धा और विधि-विधान का विशेष महत्व है। धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं में इनका संबंध मंगल ग्रह से भी बताया जाता है। मंगल को साहस, ऊर्जा और पराक्रम का कारक माना गया है। शारदीय नवरात्र में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाएगी। इस दौरान मंदिरों और पूजा स्थलों पर मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठान और दुर्गा सप्तशती के पाठ होंगे। जिले में नवरात्र को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। भक्त मां भगवती से सुख-शांति, आरोग्य और समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

